वन नेशन वन इलेक्शन पर तेज हुई बहस, हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान बोले- बार-बार चुनाव विकास में बाधा

One Nation One Election: हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश-एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि बार-बार चुनाव विकास और जनसेवा की गति को प्रभावित करते

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा बयान दिया है। हरिद्वार में संतों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया और कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास की गति में बाधा डालते हैं।

One Nation One Election: भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संत समाज की बैठक में ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव विकास और जनसेवा की रफ्तार को प्रभावित करते हैं। वहीं, इस मुद्दे पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति भी संबंधित विधेयकों पर विचार-विमर्श कर रही है।

भारत में वन नेशन वन इलेक्शन यानी लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हरिद्वार में आयोजित संत समाज के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी, प्रशासनिक संसाधनों और वित्तीय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

बार-बार चुनाव से विकास प्रभावित: शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लगातार होने वाले चुनावों के कारण सरकारों का ध्यान लंबे समय की विकास योजनाओं से हटकर चुनावी तैयारियों पर केंद्रित हो जाता है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक संसाधनों की तैनाती करनी पड़ती है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, एक साथ चुनाव होने से समय और संसाधनों की बचत हो सकती है। 

उन्होंने संत समाज से भी इस विषय पर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की अपील की। उनका तर्क है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चुनावी व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

क्या 2029 में लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन?

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी संभावित समयसीमा को लेकर है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह संभावना जताई जा रही है कि यदि आवश्यक संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराए जा सकते हैं।

हालांकि, 2029 में सभी राज्यों के चुनाव एक साथ कराने के लिए मौजूदा विधानसभा कार्यकाल में बदलाव करना होगा। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2027 या 2028 में होने हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल को सामान्य पांच वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले समाप्त करने की संवैधानिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

2027 और 2028 में होने वाले चुनाव बड़ी चुनौती

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उन राज्यों का समायोजन सबसे महत्वपूर्ण होगा, जहां विधानसभा चुनाव 2027 और 2028 में निर्धारित हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में 2027 में चुनाव होने हैं। वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड सहित कुछ राज्यों में 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 

यदि 2029 में लोकसभा के साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो इन राज्यों के मौजूदा कार्यकाल को छोटा करना पड़ सकता है। इसी वजह से वन नेशन वन इलेक्शन सिर्फ राजनीतिक सहमति का नहीं, बल्कि संवैधानिक और प्रशासनिक समायोजन का भी बड़ा विषय है।

भारत में पहले भी साथ होते थे चुनाव

एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव भारत के लिए नया विचार नहीं है। स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दशकों में देश में दोनों चुनाव एक ही समय पर कराए जाते थे। 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव साथ हुए थे। हालांकि, समय के साथ कुछ राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव, समय से पहले सरकारों के गिरने और विधानसभा भंग होने जैसी परिस्थितियों के कारण चुनावों का यह चक्र टूट गया। इसके बाद लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे।

वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) भी विचार कर रही है। समिति की बैठकों में सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के सांसद भी हिस्सा ले रहे हैं। JPC के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने संकेत दिया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और व्यापक सहमति बनती है तो प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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