भारतीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित नाम स्वर्गीय गुलशन कुमार की बेटी और अभिनेत्री खुशाली कुमार इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि, फिल्मों से इतर उनकी निजी और पेशेवर यात्रा भी उतनी ही प्रेरणादायक रही है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: "मुझे इस बात पर बेहद गर्व है कि मैं अपने पापा, गुलशन कुमार की बेटी हूं। जब लोग मुझे गुलशन जी की बेटी कहकर बुलाते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। हम तीनों भाई-बहन हमेशा यही चाहते हैं कि हमारी पहचान हमारे पापा के नाम से हो।" यह कहना है भारतीय संगीत उद्योग में क्रांति लाने वाले दिवंगत संगीत निर्माता और टी-सीरीज़ के संस्थापक Gulshan Kumar की बेटी Khushali Kumar का। खुशाली ने अपने पिता की विरासत पर गर्व जताते हुए कहा कि उनके परिवार के लिए इससे बड़ी बात कोई नहीं हो सकती कि लोग उन्हें आज भी गुलशन कुमार के नाम से पहचानते हैं।
पिता की पहचान पर गर्व
खुशाली कुमार का कहना है कि उन्हें अपने पिता गुलशन कुमार की बेटी कहलाने पर हमेशा गर्व महसूस होता है। उनके अनुसार, गुलशन कुमार ने भारतीय संगीत उद्योग को नई दिशा दी और संगीत को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि वह चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी उनके पिता के योगदान को याद रखें।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सभी सदस्य—भूषण कुमार, तुलसी कुमार और वह स्वयं—अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान उनके पिता की विरासत से जुड़ी हुई है। खुशाली मानती हैं कि यह उनके लिए सम्मान की बात है कि लोग उन्हें आज भी गुलशन कुमार के नाम से जोड़ते हैं।
बचपन का सपना था अभिनय
हालांकि आज खुशाली एक अभिनेत्री के रूप में पहचान बना रही हैं, लेकिन उनका अभिनय का सपना बचपन से था। उन्होंने बताया कि छोटी उम्र से ही कैमरे के सामने काम करने की इच्छा थी, लेकिन परिवार की परिस्थितियों और माता-पिता की चिंताओं के कारण उनका यह सपना तुरंत पूरा नहीं हो सका। खुशाली के अनुसार, उनके पिता उनके सपनों के प्रति काफी सहयोगी थे, लेकिन उनकी मां अधिक सतर्क स्वभाव की थीं। पिता के निधन के बाद परिवार की प्राथमिकताएं बदल गईं और सभी बच्चों का ध्यान परिवार और व्यवसाय को संभालने पर केंद्रित हो गया।

फैशन डिजाइनिंग में बनाई अलग पहचान
अभिनय में आने से पहले खुशाली ने फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें कपड़ों और डिजाइनिंग में रुचि थी। वह अपनी मां की साड़ियों से नए डिजाइन तैयार करने की कोशिश करती थीं, जिसके चलते परिवार को लगा कि फैशन इंडस्ट्री उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
उन्होंने फैशन डिजाइनिंग में करियर बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने ब्रांड को स्थापित किया। उनके डिजाइन विदेशों के कई स्टोर्स में उपलब्ध थे और उनका व्यवसाय लगातार बढ़ रहा था। खुशाली के अनुसार, दुनिया के विभिन्न देशों में उनके डिजाइन किए गए कपड़े 30 से 40 स्टोर्स में बिक रहे थे। इसके बावजूद उन्हें हमेशा महसूस होता था कि उनकी वास्तविक खुशी अभिनय में है। उन्होंने स्वीकार किया कि व्यावसायिक सफलता मिलने के बावजूद कैमरे के सामने काम करने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई।
परिवार की जिम्मेदारियां बनीं प्राथमिकता
खुशाली ने अपने जीवन के उस कठिन दौर को भी याद किया जब उनके पिता का निधन हुआ। उन्होंने बताया कि उस समय उनके भाई भूषण कुमार बहुत कम उम्र के थे और उन्हें एक बड़े व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। परिवार के सभी सदस्यों ने एक-दूसरे का साथ दिया और कोशिश की कि किसी भी तरह का अतिरिक्त दबाव उनकी मां पर न आए। खुशाली के अनुसार, इसी कारण उन्होंने अपने अभिनय के सपने को कुछ समय के लिए पीछे रखा और परिवार को प्राथमिकता दी।
समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और उनकी मां ने भी उनके अभिनय करियर का समर्थन करना शुरू कर दिया। आज परिवार उनके पेशेवर सफर पर गर्व महसूस करता है।
अभिनय की दुनिया में नया अध्याय
खुशाली ने फिल्मों में अपेक्षाकृत देर से कदम रखा, लेकिन वह इसे अपने जीवन की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में से एक मानती हैं। उनका कहना है कि लोग उनकी यात्रा को पहली फिल्म से देखते हैं, जबकि वह इसे उस छोटी बच्ची के सपने से जोड़कर देखती हैं जो हमेशा अभिनेत्री बनना चाहती थी। वह मानती हैं कि अभिनय केवल एक पेशा नहीं, बल्कि उनके जीवन का जुनून है और इसी वजह से वह आज अपने करियर से संतुष्ट और खुश हैं।
रिश्तों और विवाह पर क्या है खुशाली की राय?
अपनी फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ के संदर्भ में जब उनसे विवाह और जीवनसाथी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि आज के समय में सही साथी चुनना आसान नहीं है। उनका मानना है कि किसी भी रिश्ते की सबसे महत्वपूर्ण नींव भावनात्मक जुड़ाव और आपसी समझ होती है। खुशाली के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के साथ गहरा जुड़ाव महसूस होता है, तो उसकी कमियां भी बड़ी नहीं लगतीं।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत रिश्ता वही होता है जिसमें व्यक्ति को अपने परिवार जैसा भरोसा और सहजता महसूस हो। उनके विचार में यही वह आधार है, जिस पर एक सफल और लंबे समय तक चलने वाला संबंध खड़ा होता है।










