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कॉमनवेल्थ गेम्स 2030: भारत कैसे मिलेगी मेजबानी? जानें पूरी प्रक्रिया

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030: भारत कैसे मिलेगी मेजबानी? जानें पूरी प्रक्रिया

भारत खेलों की दुनिया में एक नई ऊंचाई छूने की तैयारी कर रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की दावेदारी करने के बाद अब भारत की नजर ओलंपिक 2036 की मेजबानी पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इस बारे में संकेत दे चुके हैं और अहमदाबाद को संभावित होस्ट सिटी के रूप में पेश किया जा रहा है। 

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी के लिए औपचारिक दावेदारी पेश कर दी है और इसके बाद देश की नजर ओलंपिक 2036 पर है। ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने के लिए सबसे पहले इच्छुक देश को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) को अपनी रुचि पत्र के जरिए जानकारी देनी होती है। इसके बाद IOC उस शहर और देश की इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल सुविधाओं, परिवहन, सुरक्षा और आर्थिक क्षमता का आकलन करता है। 

चयन प्रक्रिया में विस्तृत बिड बुक, सरकारी गारंटी और वित्तीय योजनाएं प्रस्तुत करनी होती हैं। इसके पश्चात IOC सदस्य शहरों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करते हैं और फिर वोटिंग के जरिए मेजबान शहर का चयन होता है। इसी प्रक्रिया से तय होगा कि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिल पाएगी या नहीं।

ओलंपिक की मेजबानी की प्रक्रिया

ओलंपिक खेलों की मेजबानी तय करने की जिम्मेदारी इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) की होती है। किसी भी देश या शहर को इसकी मेजबानी पाने के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना होता है। यह प्रक्रिया चार मुख्य चरणों में बंटी होती है।

स्टेप 1: प्रारंभिक बातचीत (Continuous Dialogue)

सबसे पहले, जिस देश को मेजबानी करनी होती है, वहां की नेशनल ओलंपिक कमेटी (NOC) और IOC के बीच प्रारंभिक बातचीत होती है। इसमें उस शहर या क्षेत्र पर चर्चा की जाती है, जहां आयोजन संभव है। यह स्टेप पूरी तरह जानकारी साझा करने और संभावनाओं को समझने पर आधारित होता है।

स्टेप 2: गेम्स प्लान की रूपरेखा

इस चरण में NOC और IOC के बीच लगातार बातचीत जारी रहती है। IOC यह देखता है कि प्रस्तावित शहर या क्षेत्र ओलंपिक के लिए कितना तैयार है और वहां किस तरह की सुविधाएं मौजूद हैं।

  • आयोजक शहर को एक गेम्स प्लान तैयार करना होता है।
  • इसमें बुनियादी ढांचे, खेल स्थलों, खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधाओं, ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।
  • IOC यह भी देखता है कि आयोजन से स्थानीय नागरिकों और शहर को दीर्घकालिक लाभ कैसे मिलेगा।

स्टेप 3: टार्गेटेड डायलॉग (Targeted Dialogue)

जब IOC को लगता है कि कोई देश या शहर मेजबानी के लिए गंभीर है और उसकी तैयारियां ठोस हैं, तब उसे टार्गेटेड डायलॉग के लिए बुलाया जाता है। इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होती है, जैसे:

  • आयोजन की अनुमानित लागत
  • पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact)
  • स्थानीय जनता का समर्थन
  • इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्थाएं

IOC का फ्यूचर होस्ट कमीशन इन सभी बिंदुओं पर गहन अध्ययन करता है और रिपोर्ट तैयार करता है।

स्टेप 4: वोटिंग और चयन

यदि किसी विशेष वर्ष के लिए एक से अधिक देश दावेदारी करते हैं, तो IOC फाइनल वोटिंग कराता है। इस दौरान:

  • सभी उम्मीदवार देश अपनी प्रस्तुति (Final Presentation) IOC सेशन में देते हैं।
  • इसके बाद IOC सदस्य सीक्रेट बैलेट के जरिए वोट डालते हैं।
  • जिस देश को बहुमत मिलता है, उसके साथ IOC होस्ट सिटी कॉन्ट्रैक्ट साइन करता है।
  • इसके साथ ही आधिकारिक तौर पर उस शहर और देश को ओलंपिक की मेजबानी मिल जाती है।

भारत ने हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए दावेदारी की है। इसके लिए अहमदाबाद को प्रस्तावित शहर के रूप में पेश किया गया है। अगर भारत कॉमनवेल्थ जैसे बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करता है, तो यह भविष्य में ओलंपिक मेजबानी की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

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