उजैर अली, एमपी के राष्ट्रीय जिम्नास्ट खिलाड़ी, को कोलकाता में प्रैक्टिस के दौरान चोट लगी और इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई। दल के साथ गए स्टाफ में प्रशिक्षित कोच नहीं थे। परिजन गैरइरादतन हत्या की मांग कर रहे हैं।
Madhya Pradesh: 16 जनवरी 2024 को कोलकाता में नेशनल जिम्नास्टिक टूर्नामेंट के दौरान उजैर अली वार्मअप कर रहे थे। उनके साथ कोच अमन वर्मा थे, लेकिन जब उजैर ने छलांग लगाने की कोशिश की, तो अमन पीछे हट गए। हवा में संतुलन बिगड़ने के कारण उजैर सीधे सिर के बल नीचे गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
उजैर को तुरंत कोलकाता के पीजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 14 दिन तक इलाज के बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रशिक्षित कोच कभी भी युवा खिलाड़ी को जोखिम भरी जंप अकेले नहीं करने देता।
दल के साथ गया था अनट्रेंड स्टाफ
एमपी की टीम के साथ 8 कोच और 2 मैनेजर कोलकाता गए थे, लेकिन इनमें से किसी के पास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (NIS), पटियाला से जिम्नास्टिक कोचिंग का डिप्लोमा नहीं था। यह कोर्स एक साल का होता है और इसमें खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ चोट लगने पर प्राथमिक उपचार, सुरक्षा उपाय और खेल की बारीकियां सिखाई जाती हैं।
लेकिन टीम के साथ गए लोग सिर्फ स्कूल शिक्षक या सीनियर खिलाड़ी थे, जिन्हें औपचारिक कोचिंग का कोई अनुभव नहीं था। असल में, टूर्नामेंट से 19 दिन पहले चयनित कोचों ने जाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में अनट्रेंड स्टाफ को भेजा।
प्रशासन की लापरवाही
हादसे के बाद उजैर के परिजन को कोलकाता पहुंचने में समय लग गया। परिजन पहुंचे तो बाकी 43 खिलाड़ी और दल वापस एमपी लौट चुके थे। उजैर के मामा शाकिब ने बताया कि इस दौरान किसी अधिकारी ने फोन करके हालचाल तक नहीं पूछा।
उजैर के इलाज और शव को घर लाने में परिवार को 60 घंटे से अधिक संघर्ष करना पड़ा। इंडिगो एयरलाइंस ने शव फ्लाइट में नहीं ले जाने की बात कही। अंततः परिवार ने कई घंटे की जद्दोजहद के बाद शव को दिल्ली और फिर इंदौर होते हुए उज्जैन लाया।
भविष्य के लिए चेतावनी
उजैर अली का सपना ओलिंपिक में देश का नाम रोशन करना था। वह रोज सुबह 4 बजे उठकर रेलवे जिम्नास्टिक ग्राउंड में प्रैक्टिस करता और स्कूल के बाद फिर से प्रैक्टिस में जुट जाता। पिछले 6 सालों से उसकी यही दिनचर्या थी।
परिवार और स्थानीय लोग शिक्षा विभाग की लापरवाही पर गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। पार्षद प्रतिनिधि मुजीब सुपारीवाला ने गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। इस घटना ने दिखा दिया कि प्रशिक्षित स्टाफ की कमी और प्रशासन की चूक युवा खिलाड़ियों के जीवन के लिए कितना खतरनाक हो सकती है।









