सोनम वांगचुक मामला: ‘लद्दाख में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात बनाने’ की बात कही, इसलिए NSA लगाया' - केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि सोनम वांगचुक पर NSA इसलिए लगाया गया क्योंकि उन्होंने ‘लद्दाख में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात’ बनाने की बात कही थी।

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक ने युवाओं को भड़काने और देश के खिलाफ सोच फैलाने का प्रयास किया, जिसके चलते उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया है।

नई दिल्ली: लद्दाख के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तारी को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वांगचुक के बयान “हिंसा भड़काने वाले” थे और उन्होंने खासकर युवाओं, विशेष रूप से GenZ को सरकार के खिलाफ उकसाने की कोशिश की, इसलिए उनकी हिरासत जरूरी थी। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

सरकार ने बताई NSA लगाने की वजह

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र सरकार की ओर से दलीलें रख रहे थे, ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक के भाषणों और बयानों में राष्ट्र-विरोधी तत्व पाए गए। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने संबोधनों में केंद्र सरकार को “वे” कहकर संबोधित किया, जिससे “हम बनाम वे” जैसी विभाजनकारी भाषा पैदा होती है।मेहता के अनुसार, ऐसी भाषा समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाती है और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने कहा कि यह अकेला तथ्य ही NSA जैसी सख्त कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार बनता है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने अपने भाषणों में कहा था कि “लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात बनाए जाने चाहिए।” सरकार का दावा है कि यह बयान अस्थिरता और अलगाव की भावना को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि वांगचुक ने कथित तौर पर अपने भाषणों में आत्मदाह जैसे चरम कदमों का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने “हिंसा को बढ़ावा देने वाला” करार दिया। सरकार के मुताबिक, ऐसे बयान न सिर्फ सार्वजनिक शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि युवाओं को कट्टर रुख अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

सोनम वांगचुक मामला: ‘लद्दाख में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात बनाने’ की बात कही, इसलिए NSA लगाया' - केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

लद्दाख की संवेदनशीलता का हवाला

सॉलिसिटर जनरल ने लद्दाख की रणनीतिक अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लद्दाख भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, क्योंकि यह सीमा से सटा हुआ है और यहां से सेना के लिए रसद (लॉजिस्टिक्स) की आपूर्ति होती है। मेहता ने तर्क दिया कि ऐसे इलाके में “अलगाववादी” या “अलग पहचान” की बात करना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वांगचुक ने कुछ मौकों पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) की बात कही थी, जो सरकार के अनुसार “संवैधानिक ढांचे के खिलाफ” है।

दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके पति ने केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल किया और हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “सरकार की आलोचना करना किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है। असहमति को दबाने के लिए NSA जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल करना गलत है।” उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक ने कभी हिंसा का आह्वान नहीं किया और उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहा है।

क्या है NSA और क्यों विवादित?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 सरकार को किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है, अगर उसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या देश की अखंडता के लिए खतरा माना जाए। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून का अक्सर राजनीतिक असहमति दबाने के लिए दुरुपयोग किया जाता है। इसी कारण यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील बन गया है।

पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख में स्थानीय प्रतिनिधित्व, पर्यावरण संरक्षण और राज्य का दर्जा जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। सोनम वांगचुक इन आंदोलनों के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि वह शिक्षा, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहे हैं। वहीं, सरकार का रुख है कि उनके कुछ बयान सीमा पार से प्रभावित हो सकते हैं और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ जा सकते हैं।

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