कोटा के न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 48 घंटे में दूसरी महिला की मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना दिया। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और टेक्निकल टीम मामले की पड़ताल कर रही है।
कोटा: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद सामने आए एक गंभीर मामले ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में भर्ती कई महिलाओं की हालत बिगड़ने के बाद अब तक दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
यह घटना 4 मई के बाद सामने आई, जब गायनिक वार्ड में कुछ महिलाओं की सर्जरी के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लगभग छह महिलाओं को किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा।
कैसे बिगड़ी मरीजों की हालत?
अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ ही घंटों के भीतर मरीजों में संक्रमण और अंगों के फेल होने के लक्षण दिखाई देने लगे। स्थिति गंभीर होने पर एक महिला पायल (28 वर्ष) को बचाया नहीं जा सका और 5 मई को उसकी मौत हो गई।
इसके बाद गुरुवार सुबह एक अन्य महिला ज्योति (20 वर्ष) की हालत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत की पुष्टि कर दी गई।
परिजनों का आक्रोश और अस्पताल में हंगामा
दोनों मौतों के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक महिला के परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि यह पूरी घटना अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही का परिणाम है।
हॉस्पिटल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के बाहर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस दौरान कुछ स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कोटा के कलेक्टर पीयूष समारिया स्वयं अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने मीडिया को बताया कि मामले की जांच के लिए एक तकनीकी समिति गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि मरीजों को दी गई दवाएं और उपचार प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार थी या नहीं।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मरीजों की स्थिति बिगड़ने के पीछे असली कारण क्या था।
संक्रमण या मेडिकल लापरवाही? जांच में उठे सवाल
प्रारंभिक स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह मामला या तो गंभीर संक्रमण का हो सकता है या फिर किसी दवा या प्रक्रिया में हुई गलती का परिणाम हो सकता है।
विशेषज्ञों की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं ऑपरेशन थिएटर की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया में कोई चूक तो नहीं हुई।

अन्य मरीजों की स्थिति गंभीर, जयपुर रेफर की तैयारी
अस्पताल में भर्ती अन्य प्रभावित महिलाओं की हालत अभी भी स्थिर नहीं है। कई मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही है।
डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है और हर संभावित जटिलता को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
परिवारों की पीड़ा: एक नवजात और टूटता परिवार
मृतक पायल के परिवार में इस घटना के बाद गहरा शोक है। बताया जा रहा है कि पायल ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया था, जिसकी देखभाल अब उसकी दादी कर रही है।
परिवार का कहना है कि यह एक खुशियों का समय होना चाहिए था, लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर भारत में सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीज सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए अस्पतालों में सख्त निगरानी, बेहतर संक्रमण नियंत्रण और समय-समय पर ऑडिट जरूरी है।









