NCRB 2024 के आंकड़ों के अनुसार भारत में हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा शिकार 35 वर्ष से कम आयु के लोग बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों व शहरों में युवाओं के खिलाफ हिंसा के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।
नई दिल्ली: NCRB 2024 की रिपोर्ट ने देश में बढ़ती युवा हिंसा को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। आंकड़ों के मुताबिक हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग 0 से 30 वर्ष आयु के लोग हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक तनाव, व्यक्तिगत दुश्मनी, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव जैसी वजहें युवाओं को हिंसा और अपराध के दायरे में धकेल रही हैं।
भारत में हत्या के मामलों का पैटर्न तेजी से बदल रहा है और सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसका सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ रहा है। NCRB
के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, 35 साल से कम उम्र के लोग हत्या के मामलों में सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। यह सिर्फ अपराध का डेटा नहीं, बल्कि देश के युवा भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
युवाओं और किशोरों पर बढ़ रहा हिंसा का खतरा
आंकड़े बताते हैं कि 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित है। वहीं 0 से 18 वर्ष के बच्चों और किशोरों की भी बड़ी संख्या इन घटनाओं में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हत्या के पीछे अब संगठित अपराध से ज्यादा व्यक्तिगत कारण सामने आ रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- व्यक्तिगत दुश्मनी
- संपत्ति विवाद
- पारिवारिक झगड़े
- प्रेम संबंधों में तनाव
- सामाजिक और मानसिक दबाव
यानी अपराध का बड़ा हिस्सा अब लोगों के करीबी सामाजिक दायरे से पैदा हो रहा है, जो समाज में बढ़ती असहिष्णुता और तनाव को दिखाता है।
बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा मामले
राज्यवार आंकड़ों में बड़े और घनी आबादी वाले राज्य सबसे आगे हैं।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- मध्य प्रदेश
उत्तर प्रदेश और बिहार में 18–30 आयु वर्ग में ही 1,000 से ज्यादा हत्याएं दर्ज होना इस बात का संकेत है कि युवा अवस्था सबसे ज्यादा जोखिम भरी बन चुकी है।
महानगरों में बढ़ता खतरा, दिल्ली सबसे आगे
शहरों की बात करें तो दिल्ली सबसे बड़ा ‘हॉटस्पॉट’ बनकर सामने आई है। इसके बाद बेंगलुरु, पटना, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों का नाम शामिल है।
दिल्ली में युवाओं की हत्या के मामले दूसरे शहरों की तुलना में लगभग दोगुने पाए गए। आंकड़े बताते हैं कि यहां बड़ी संख्या में मामले व्यक्तिगत विवाद और आपसी टकराव से जुड़े हुए हैं।
क्यों बढ़ रही है युवाओं में हिंसा?
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलती जीवनशैली, बेरोजगारी, रिश्तों में अस्थिरता और मानसिक तनाव युवाओं को हिंसा की ओर धकेल रहे हैं। छोटे-छोटे विवाद अब जानलेवा घटनाओं में बदलते जा रहे हैं।
दिल्ली में 81 मामले सीधे विवाद से जुड़े पाए गए, जबकि बेंगलुरु में यह संख्या 41 रही। इससे साफ है कि गुस्सा, तनाव और संवाद की कमी अब गंभीर अपराधों का रूप ले रही है।
समाजशास्त्री इसे ‘सोशलाइजेशन की प्रक्रिया’ से जोड़ते हैं। यानी व्यक्ति जिस माहौल में बड़ा होता है, वही उसके व्यवहार और फैसलों को प्रभावित करता है।
NCRB के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि अगर युवाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक माहौल पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा हो सकता है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और परिवार दोनों के लिए बड़ा चेतावनी संकेत है।









