कर्मचारी का सिक लीव और फिटनेस ऐप 16,000 कदम दिखने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ा

कर्मचारी का सिक लीव और फिटनेस ऐप 16,000 कदम दिखने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ा

चीन में 2019 का एक विवाद सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है, जिसमें एक कर्मचारी को सिक लीव लेने के बहाने नौकरी से निकाला गया। कंपनी ने फिटनेस ऐप पर रिकॉर्ड 16,000 कदम का हवाला दिया। कोर्ट ने कर्मचारी की जीत सुनाते हुए प्राइवेट डेटा के दुरुपयोग को गैरकानूनी ठहराया।

सिक लीव प्राइवेसी विवाद: चीन के जियांग्शु प्रांत में 2019 का एक मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें एक कर्मचारी को सिक लीव लेने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। कंपनी ने दावा किया कि उसी दिन उसकी फिटनेस ऐप ने 16,000 कदम रिकॉर्ड किए थे। कर्मचारी ने मेडिकल रिपोर्ट पेश की और कोर्ट ने कंपनी के प्राइवेट डेटा इस्तेमाल को गैरकानूनी करार देते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया। यह मामला तकनीकी निगरानी और प्राइवेसी अधिकारों पर बहस को फिर से जीवित करता है।

सिक लीव पर नौकरी से निकाला गया कर्मचारी

चीन में 2019 का एक मामला हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आया है, जिसमें एक कर्मचारी को सिक लीव लेने के बहाने नौकरी से निकाल दिया गया था। कंपनी का दावा था कि जिस दिन उसने छुट्टी ली थी, उसकी फिटनेस ऐप ने रिकॉर्ड किया कि वह 16,000 कदम चल चुका था। इसके आधार पर कंपनी ने उसे बीमारी का बहाना बनाने का आरोप लगाते हुए नौकरी से हटाया।

कर्मचारी ने तुरंत कोर्ट का रुख किया और दावा किया कि उसके पास मेडिकल रिपोर्ट है, जबकि कंपनी ने चैट लॉग और सर्विलांस फुटेज पेश किए। कोर्ट ने जांच के बाद पाया कि कंपनी ने प्राइवेट डेटा का गैरकानूनी इस्तेमाल किया और कर्मचारी को मुआवजा देने का आदेश दिया। कंपनी की अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

मामला 2019 का, अब फिर चर्चा में

यह मामला 2019 का है, जब जियांग्शु प्रांत में रहने वाले चेन नाम के कर्मचारी को कमर की चोट के चलते पहले भी मेडिकल लीव मिल चुकी थी। चोट से उबरने के बाद डॉक्टर ने उसे एक हफ्ते के आराम की सलाह दी, लेकिन कंपनी ने इसे स्वीकार नहीं किया और नौकरी से निकाल दिया।

सोशल मीडिया पर इस केस के पोस्ट होने के बाद तकनीकी निगरानी और प्राइवेसी पर बहस फिर शुरू हो गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि फिटनेस ऐप और डिजिटल डेटा का कामकाजी फैसलों में इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है।

कोर्ट का फैसला और प्राइवेसी का मामला

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी को गैरकानूनी तरीके से हटाया गया और उसकी प्राइवेसी का उल्लंघन हुआ। कंपनी को मुआवजा देने के आदेश के साथ ही यह संदेश भी गया कि निजी स्वास्थ्य डेटा का दुरुपयोग गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला अन्य कंपनियों के लिए चेतावनी है कि डिजिटल मॉनिटरिंग का सीमित और कानूनी इस्तेमाल ही करना चाहिए। कर्मचारियों के स्वास्थ्य और प्राइवेसी अधिकारों का सम्मान जरूरी है।

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