कर्नाटक कैबिनेट गठन पर सियासी मंथन तेज: डीके शिवकुमार दिल्ली रवाना, 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर मतभेद

कर्नाटक में नई कैबिनेट गठन को लेकर दिल्ली में मंथन जारी है। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया आलाकमान से मुलाकात करेंगे। 4 डिप्टी सीएम प्रस्ताव पर मतभेद सामने आए।

कर्नाटक में नई कैबिनेट गठन को लेकर D K Shivakumar और Siddaramaiah दिल्ली पहुंचे। आलाकमान मंत्रियों की सूची पर विचार कर रहा है, जबकि 4 डिप्टी सीएम के प्रस्ताव पर शिवकुमार सहमत नहीं हैं और चर्चा जारी है।

बेंगलुरु: कर्नाटक में नई सरकार के गठन से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत नेता डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज एक साथ चार्टर्ड विमान से दिल्ली रवाना हो रहे हैं। उनके साथ वरिष्ठ नेता केजे जॉर्ज, एचसी महादेवप्पा, सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया और विधायक एस पोनन्ना भी मौजूद रहे।

दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली इस बैठक में नई कैबिनेट के गठन, मंत्रियों के चयन और डिप्टी सीएम पदों की संख्या को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।

कैबिनेट गठन को लेकर आलाकमान की रणनीति

कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक की नई सरकार के गठन के लिए मुख्यमंत्री पद के लिए नामित नेताओं से मंत्रियों की सूची मांगी है। सूत्रों के अनुसार, नई कैबिनेट में पुराने मंत्रियों की बड़ी संख्या में छुट्टी हो सकती है और लगभग दो दर्जन से अधिक चेहरों को बदला जा सकता है।

पार्टी नेतृत्व का फोकस एक संतुलित और प्रभावी कैबिनेट तैयार करने पर है, जिसमें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखा जाएगा।

3 जून को हो सकती है नई सरकार की शपथ

सूत्रों के अनुसार कर्नाटक में नई सरकार की शपथ 3 जून को होने की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ 9 से 14 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई जा सकती है। शेष मंत्रियों का विस्तार बाद में किया जा सकता है, विशेषकर राज्यसभा चुनावों के बाद।

यह रणनीति कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीतिक संतुलन और संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही है।

4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर बढ़ा विवाद

नई कैबिनेट गठन से पहले सबसे बड़ा विवाद डिप्टी मुख्यमंत्री पदों की संख्या को लेकर सामने आया है। कांग्रेस आलाकमान कथित तौर पर चार डिप्टी सीएम बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, ताकि विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया जा सके।

कर्नाटक कैबिनेट गठन पर सियासी मंथन तेज: डीके शिवकुमार दिल्ली रवाना, 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर मतभेद

हालांकि, मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत डीके शिवकुमार इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि अधिक डिप्टी सीएम रखने से प्रशासनिक निर्णयों में भ्रम और सत्ता संतुलन में जटिलता बढ़ सकती है।

इसी मुद्दे पर दिल्ली में होने वाली बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां पार्टी नेतृत्व इस फॉर्मूले पर अंतिम निर्णय ले सकता है।

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की संयुक्त दिल्ली यात्रा

कर्नाटक की राजनीति में यह भी ध्यान देने योग्य है कि डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक ही विमान में दिल्ली रवाना हुए हैं। दोनों नेताओं के बीच नेतृत्व और कैबिनेट गठन को लेकर आंतरिक समन्वय की कोशिशें भी जारी हैं।

इस यात्रा में पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक में सरकार गठन को लेकर हर स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

मंत्रियों की सूची पर मंथन जारी

कांग्रेस नेतृत्व ने दोनों प्रमुख नेताओं से संभावित मंत्रियों की सूची तैयार करने को कहा है। इस सूची के आधार पर ही नई कैबिनेट का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी संगठन ऐसे चेहरों को प्राथमिकता देना चाहता है जो जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हों और आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकें।

इसके साथ ही यह भी संभावना है कि कई पुराने मंत्रियों को नई कैबिनेट में जगह न मिले, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

बेंगलुरु में शपथ ग्रहण की तैयारी तेज

उधर बेंगलुरु में 3 जून को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इसी बीच एक धार्मिक और सामाजिक पहल के तहत संतों के एक समूह ने डीके शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें आगामी जिम्मेदारी के लिए आशीर्वाद दिया।

कांग्रेस के सामने संतुलन की बड़ी चुनौती

कर्नाटक में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी कैबिनेट बनाना है जो सभी गुटों और समुदायों को संतुष्ट कर सके। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही पार्टी के मजबूत नेता हैं और उनके बीच संतुलन बनाए रखना आलाकमान के लिए अहम है।

डिप्टी सीएम की संख्या, मंत्रियों का चयन और विभागों का बंटवारा—ये सभी मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण तय करेंगे।

प्रशासनिक स्थिरता और राजनीतिक संदेश पर नजर

नई कैबिनेट का गठन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह सत्ता में स्थिरता, समावेशिता और मजबूत नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिप्टी सीएम के मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो यह भविष्य में सरकार के भीतर आंतरिक तनाव का कारण बन सकता है।

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