लखनऊ में होगी राहुल गांधी के खिलाफ केस की सुनवाई, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

लखनऊ में होगी राहुल गांधी के खिलाफ केस की सुनवाई, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली में चल रहे एक मामले को अब लखनऊ ट्रांसफर किया जाएगा और इसकी सुनवाई लखनऊ की विशेष अदालत में होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को इस संबंध में सुनवाई के बाद आदेश पारित किया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक अहम कानूनी प्रक्रिया में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली में चल रहे एक आपराधिक मामले को अब लखनऊ की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस मामले में राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने स्थानांतरण याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि रायबरेली की अदालत में चल रही कार्यवाही को अब लखनऊ की विशेष अदालत में ट्रांसफर किया जाए, जहां आगे की सुनवाई होगी। यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसे भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दाखिल किया था। उन्होंने रायबरेली में चल रहे मुकदमे को लखनऊ स्थानांतरित करने की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सवाल उठाते हुए रायबरेली की विशेष अदालत में आपराधिक परिवाद दायर किया था। इस परिवाद में दावा किया गया कि राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच की जानी चाहिए। इस मामले की सुनवाई रायबरेली में चल रही थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए हस्तक्षेप की मांग की कि वहां निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पा रही है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि रायबरेली में उनकी जान को खतरा है और स्थानीय परिस्थितियों के कारण वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि रायबरेली राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र रहा है, ऐसे में वहां निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई प्रभावित हो सकती है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मामले को लखनऊ स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह केस लखनऊ की विशेष अदालत में चलेगा। इससे न केवल सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान होगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में मदद मिलेगी।

 

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