लखनऊ के लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अक्टूबर तक लिवर और बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने की उम्मीद है। प्रदेश का पहला एडवांस ट्रांसप्लांट सेंटर तैयार हो चुका है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट सेंटर तैयार होने के बाद अक्टूबर तक लिवर और बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके शुरू होने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में इलाज के लिए जाने की जरूरत कम होगी।
एक ही परिसर में मिलेंगी ट्रांसप्लांट की आधुनिक सुविधाएं
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को नई दिशा देने की तैयारी पूरी कर ली है। संस्थान में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से विकसित एडवांस सेंटर फॉर ट्रांसप्लांट बनकर तैयार हो चुका है। इस केंद्र में किडनी, लिवर और बोनमैरो ट्रांसप्लांट जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी।
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संस्थान प्रशासन के अनुसार वर्तमान में यहां रोबोटिक तकनीक के जरिए किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। अब लिवर और बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सेवाओं को भी शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद पूरी हो चुकी है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
गंभीर बीमारियों के मरीजों को होगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर, रक्त कैंसर, थैलेसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया और कई गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों में ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक उपचार साबित होता है। अभी ऐसे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जहां लंबी प्रतीक्षा सूची और अधिक खर्च का सामना करना पड़ता है।
नई सुविधा शुरू होने के बाद प्रदेश के मरीजों को अपने राज्य में ही उन्नत उपचार मिल सकेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी, साथ ही मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक राहत भी मिलेगी।
जांच से लेकर फॉलोअप तक एक ही छत के नीचे
ट्रांसप्लांट सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि मरीजों को सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। जांच, सर्जरी, आईसीयू देखभाल, पोस्ट-ट्रांसप्लांट मॉनिटरिंग और फॉलोअप जैसी सुविधाओं के लिए अलग-अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा सीमित संस्थानों में उपलब्ध है। ऐसे में लोहिया संस्थान में यह सेवा शुरू होने से मरीजों के लिए विकल्प बढ़ेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी विस्तारित होगा।
चिकित्सा शिक्षा और शोध को भी मिलेगा बढ़ावा
संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह के अनुसार यह केंद्र केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मेडिकल छात्रों, सुपर स्पेशियलिटी रेजिडेंट्स और शोधार्थियों को आधुनिक ट्रांसप्लांट तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस केंद्र के शुरू होने से प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं का नेटवर्क और मजबूत होगा। भविष्य में अन्य जटिल प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं के लिए भी बेहतर आधार तैयार होगा, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकेगा।
क्या होता है बोनमैरो ट्रांसप्लांट?
बोनमैरो ट्रांसप्लांट एक विशेष चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त बोनमैरो को स्वस्थ बोनमैरो स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। इसका उपयोग रक्त कैंसर, थैलेसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों के इलाज में किया जाता है। यह कई मरीजों के लिए जीवन बचाने वाला उपचार माना जाता है।









