लोकसभा में अटेंडेंस नियमों में बड़ा बदलाव, अब अपनी सीट से ही लगेगी सांसदों की हाजिरी

लोकसभा में अटेंडेंस नियमों में बड़ा बदलाव, अब अपनी सीट से ही लगेगी सांसदों की हाजिरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत आगामी बजट सत्र से लोकसभा सांसद केवल अपनी निर्धारित सीटों से ही हाजिरी दर्ज कर सकेंगे।

नई दिल्ली: भारत की संसद में कार्य संस्कृति और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए नया नियम लागू करने की घोषणा की है। इस नए नियम के तहत अब सांसद केवल सदन में अपनी निर्धारित सीट से ही हाजिरी दर्ज करा सकेंगे। यह व्यवस्था आगामी बजट सत्र से लागू होगी।

लॉबी से अटेंडेंस की सुविधा खत्म

अब तक लोकसभा सांसदों को सदन की लॉबी से भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की सुविधा मिलती थी। लेकिन नए नियमों के अनुसार इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांसदों की हाजिरी केवल संसद परिसर में मौजूदगी तक सीमित न रहे, बल्कि सदन की कार्यवाही में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि अब सांसद तभी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे जब सदन की कार्यवाही चल रही हो। यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है, चाहे वह हंगामे की वजह से ही क्यों न हो, उस स्थिति में सांसद अटेंडेंस नहीं लगा पाएंगे।

बजट सत्र से होगा लागू

यह नया नियम 28 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से प्रभावी होगा। स्पीकर ने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही की उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह सुधार आवश्यक था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र केवल उपस्थिति से नहीं, बल्कि गंभीर चर्चा और संवाद से मजबूत होता है। नई व्यवस्था के तहत लोकसभा की प्रत्येक सीट पर डिजिटल कंसोल लगाए गए हैं। इन कंसोल के माध्यम से सांसद अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। यह तकनीकी सुधार संसद की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओम बिरला ने कहा कि इस बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सांसद सदन की कार्यवाही के दौरान अपनी सीट पर मौजूद रहें और चर्चाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लें। इससे न केवल विधायी कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही भी बढ़ेगी।

संसदीय अनुशासन पर जोर

लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद में अनुशासन और गंभीरता समय की मांग है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास तभी बढ़ता है जब निर्वाचित प्रतिनिधि जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाते हैं।

सम्मेलन के दौरान ओम बिरला ने यह भी बताया कि संसद ने एक विशेष समिति का गठन किया है, जो देश की सभी विधायी संस्थाओं—लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं—में नियमों और परंपराओं में एकरूपता लाने के उपायों पर विचार करेगी। उन्होंने राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे विधायी कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार होगा।

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