लोकसभा में बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद ने ईरान के युद्धग्रस्त स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए अपनी एक महीने की सैलरी दान करने का ऐलान किया। कश्मीर की जनता ने भी नकद, सोना और चांदी दान कर मदद का संदेश दिया।
New Delhi: लोकसभा में बारामूला के निर्दलीय सांसद इंजीनियर रशीद ने ईरान के उस स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए अपनी एक महीने की सैलरी दान करने का ऐलान किया, जिसमें हाल ही में 162 बच्चियों की दुखद मौत हुई थी। रशीद ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सहानुभूति किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल के आम नागरिक, जो अपनी सरकार की नीतियों के कारण प्रभावित हुए हैं, उनके प्रति भी संवेदना रखते हैं। सांसद ने कहा कि इस समय जरूरत केवल राजनीतिक बयान देने की नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना दिखाने की है।
कश्मीर से बढ़ी मदद की पहल
इंजीनियर रशीद के ऐलान से एक दिन पहले ही कश्मीर की वादियों में युद्धग्रस्त ईरान के राहत कोष के लिए मदद की मुहिम तेज हो गई थी। स्थानीय लोगों ने नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान दान करके अपने समर्थन और एकजुटता का संदेश दिया। घाटी के शिया बहुल इलाकों में रविवार को युवा घर-घर जाकर ईरान में प्रभावित लोगों के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे।
रैनावारी निवासी एजाज अहमद ने कहा कि इजराइल की सरकार और उसके समर्थकों द्वारा ईरान पर थोपे गए इस युद्ध ने भारी तबाही मचाई है। उन्होंने आगे कहा कि सभ्य दुनिया को कम से कम इतना तो करना चाहिए कि पीड़ितों की मदद के लिए समर्थन भेजा जाए।
सांसद रशीद का तर्क
इंजीनियर रशीद ने लोकसभा में कहा कि युद्ध के समय भारत को मजबूती से ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का जिक्र किया जिसमें आगामी मुश्किलों की बात कही गई थी। रशीद ने यह भी कहा कि केवल कुछ लीटर LNG (Liquefied Natural Gas) लाकर मदद करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक महत्व वाले प्रोजेक्ट्स पर भारत का ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, केवल आर्थिक या ऊर्जा मदद सीमित राहत दे सकती है, जबकि गंभीर मानवीय संकट में तत्काल और ठोस कदम उठाना जरूरी है।
ईरान के स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए दान
रशीद ने अपनी एक महीने की सैलरी ईरान के उस स्कूल की मदद के लिए देने की घोषणा करते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वे पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए कुछ कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास युद्ध की मार झेल रहे लोगों के लिए मनोबल बढ़ाने का काम करेगा।
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सांसद ने लोकसभा में यह स्पष्ट किया कि भारत की जनता मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता में विश्वास रखती है और इस संकट के समय में पीड़ितों के साथ खड़ी है।
कश्मीर के नागरिकों की उदारता
कश्मीर के विभिन्न इलाकों में लोग भी युद्धग्रस्त ईरान के लोगों के लिए सहायता भेज रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, दान अभियान में पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी ने भाग लिया। विशेष रूप से महिलाओं ने आगे आकर सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन और अन्य मूल्यवान घरेलू सामान दान किए। कुछ परिवारों ने पशुधन भी दान में दिया। इस तरह की जन भागीदारी ने मानवीय संवेदना और एकजुटता का उदाहरण पेश किया है।
ईरानी दूतावास की प्रतिक्रिया
दान और सहायता भेजने के बाद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर आभार व्यक्त किया। दूतावास ने कहा कि यह दयालुता का कार्य कभी नहीं भुलाया जाएगा और यह दर्शाता है कि भारत की जनता युद्धग्रस्त देशों के प्रति संवेदनशील है। दूतावास ने कहा कि इस मदद से स्कूल के पुनर्निर्माण और पीड़ित परिवारों की राहत में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
आम जनता का योगदान
कश्मीर की वादियों में लोगों ने नकद राशि के अलावा सोना, चांदी और तांबे के बर्तन जैसे कई कीमती सामान दान किए। अधिकारियों के अनुसार, कई परिवारों ने अपने निजी संसाधनों से मदद भेजी। यह दान अभियान स्थानीय लोगों की मानवीय संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय संकट के प्रति उनके सहयोग की भावना को दर्शाता है।
युद्धग्रस्त ईरान के लिए भारत का समर्थन
सांसद रशीद का कहना है कि युद्ध की मार झेल रहे ईरान के लिए भारत का समर्थन जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक मदद पर्याप्त नहीं है। मानवीय संवेदना, तत्काल राहत और पुनर्निर्माण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। रशीद ने कहा कि इस समय रणनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि प्रभावित नागरिकों की मदद समय पर की जा सके।
बच्चों की सुरक्षा पर जोर
रशीद ने कहा कि विशेष रूप से स्कूलों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने लोकसभा में बताया कि 162 बच्चियों की जान चली गई थी और इसके बाद स्कूल का पुनर्निर्माण अत्यंत आवश्यक है। सांसद ने कहा कि शिक्षा और जीवन सुरक्षा सभी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए और युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।









