Narendra Modi ने गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक को लेकर Lok Sabha में संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस पहल को 25–30 साल पहले ही लागू कर दिया गया होता, तो आज तक यह और अधिक परिपक्व स्थिति में पहुंच चुका होता और समय-समय पर इसमें आवश्यक सुधार भी किए जा सकते थे, जो लोकतंत्र की खूबसूरती है।
नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरदार संबोधन दिया। उन्होंने इस बिल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक “महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण” बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसे सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। यह विधेयक महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा है, जिसे सरकार देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देख रही है।
समय पर लागू होता तो आज और आगे होते: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि यह पहल 25-30 साल पहले लागू हो जाती, तो आज तक इसमें और सुधार हो चुके होते और लोकतंत्र अधिक समावेशी बन चुका होता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि समय के साथ नीतियों में सुधार होते रहते हैं और समाज आगे बढ़ता है। पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की 50 प्रतिशत आबादी की भागीदारी का सवाल है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश की महिलाओं को नीति निर्माण में समान अवसर मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और यह बदलाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देता है।
“विरोध करने वालों को जनता जवाब देगी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष को सीधे संदेश देते हुए कहा कि जो भी इस विधेयक का विरोध करेगा, उसे आने वाले चुनावों में जनता जवाब देगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार विरोध राजनीतिक कारणों से किया जाता है, लेकिन देश की जनता ऐसे फैसलों को ध्यान से देखती है और सही समय पर अपना निर्णय देती है।
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से अपील की कि इस विधेयक को किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से न देखा जाए और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह अवसर भारत के संसदीय इतिहास में एक “धरोहर” की तरह है, जिसे सभी दलों को मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए।
“महिला आरक्षण राजनीति नहीं, विकास का मुद्दा है”
पीएम मोदी ने कहा कि देश के विकास की परिभाषा केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें सामाजिक भागीदारी भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि देश की आधी आबादी नीति निर्माण में शामिल नहीं होगी तो विकास अधूरा रहेगा। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि इस बिल का श्रेय किसी एक दल या व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो यह पूरे देश की जीत होगी, न कि किसी एक राजनीतिक दल की। पीएम मोदी ने संकेत दिया कि यदि इस प्रक्रिया में और देरी होती है तो यह उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि अब इस मुद्दे पर आगे बढ़ा जाए और इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए।










