लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पास, पीएम मोदी नहीं दे पाए जवाब

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पास हो गया, लेकिन पीएम मोदी जवाब देने के लिए उपस्थित नहीं हो पाए। जानें घटनाक्रम और

लोकसभा में जबरदस्त हंगामे के बीच गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि, सदन में बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस पर उत्तर देना पारंपरिक रूप से होता है, लेकिन इस बार विपक्ष के जबरदस्त हंगामे और गतिरोध के कारण पीएम इस अवसर पर जवाब नहीं दे सके।

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बाद दोपहर 2 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। यह प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सर्वानंद सोनोवाल ने पेश किया था, जबकि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपने विचार साझा किए।

धन्यवाद प्रस्ताव क्या है?

धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय संसद की महत्वपूर्ण औपचारिक प्रक्रिया है। नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति का अभिभाषण हर वर्ष संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – में पेश किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाता है, जिसे आमतौर पर सत्ताधारी दल लाता है। इस प्रक्रिया में सदस्यों को इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा का अवसर मिलता है। सदस्य चाहे तो संशोधन भी पेश कर सकते हैं। चर्चा के अंत में प्रधानमंत्री या कोई अन्य वरिष्ठ मंत्री जवाब देते हैं। इसके बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया जाता है।

धन्यवाद प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रति आभार व्यक्त करना होता है, लेकिन यह सदन में सरकार की नीतियों पर बहस और विश्वास मत जैसा महत्व भी रखता है।

गुरुवार के हंगामे का विवरण

गुरुवार को चर्चा शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और शोर-शराबा किया। अध्यक्ष ओम बिरला ने आसन के समीप प्रदर्शन कर रहे सांसदों को बैनर न दिखाने का निर्देश दिया। हंगामे के कारण दोपहर 12 बजे सभा स्थगित हुई और बाद में पुनः शुरू की गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चर्चा में पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए चीन के साथ टकराव के मुद्दे को उठाने का प्रयास किया, लेकिन अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी।

इसके अलावा मंगलवार को असामाजिक व्यवहार के चलते विपक्ष के आठ सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था। बुधवार को तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के सांसद जीएम हरीश बालयोगी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने चर्चा में हिस्सा लिया। दुबे ने नेहरू-गांधी परिवार पर कई आरोप लगाए, लेकिन अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए उनके पुस्तक संदर्भों को सदन में पेश करने की अनुमति नहीं दी।

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