लखनऊ में बाढ़ से 40 हजार घर जलमग्न, सड़कों पर चल रहीं नावें, लोग घर छोड़ किराए पर रहने को मजबूर

लखनऊ में 13 दिनों से बाढ़ का कहर जारी है। फैजुल्लागंज में हजारों घर डूबे, 3 लाख लोग प्रभावित हैं। गोमती का जलस्तर घटा, लेकिन राहत नहीं मिली।

लखनऊ में 13 दिनों से जारी बाढ़ से 3 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। फैजुल्लागंज में हजारों घर पानी में डूबे हैं, वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और घरेलू सामान खराब हो गया है। गोमती का जलस्तर थोड़ा घटा है, लेकिन लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं।

उत्तर प्रदेश: राजधानी लखनऊ में बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में घरों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। घरों में रखा राशन और अन्य सामान खराब हो गया है, जबकि कई परिवार अपने मकान छोड़कर किराए पर रहने को मजबूर हैं। इस बीच गोमती नदी का जलस्तर थोड़ा घटा है, लेकिन जलभराव से राहत नहीं मिली है।

लखनऊ में बाढ़ से 40 हजार घर प्रभावित, सड़कों पर चल रहीं नावें

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले 13 दिनों से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा से तीन लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है। सबसे गंभीर स्थिति फैजुल्लागंज इलाके में है, जहां करीब 40 से 50 हजार घरों के जलमग्न होने की बात सामने आई है। कई घरों में आधे से अधिक पानी भरने के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।

इलाके की सड़कों और गलियों में पानी भरने से आवागमन मुश्किल हो गया है। लोग एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए नावों का इस्तेमाल कर रहे हैं। घरों के बाहर खड़ी कारें और बाइकें पानी में डूब गई हैं। कई वाहन पानी में तैरते दिखाई दे रहे हैं। घरों में रखा राशन और अन्य जरूरी सामान भी खराब हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कुछ परिवारों को अपना घर छोड़कर किराए के कमरों में रहना पड़ रहा है।

फैजुल्लागंज में सीवर से निकल रहा पानी, मंदिर भी बंद

फैजुल्लागंज के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नाले, नालियां और सीवर लाइनें पानी में डूबने के कारण कुछ घरों में सीवर के रास्ते पानी फव्वारे की तरह बाहर निकलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से नावों के जरिए आवाजाही में मदद मिल रही है, लेकिन घरों में रखा सामान खराब होने से उन्हें काफी नुकसान हुआ है। कई लोगों को अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा है।

बाढ़ का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। जलभराव के कारण मां चंद्रिका देवी धाम मंदिर बंद है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु मंदिर में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इससे भक्तों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

गोमती नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर घटा

बाढ़ के बीच गोमती नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। गऊघाट पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को शाम छह बजे नदी का जलस्तर 108.54 मीटर रिकॉर्ड किया गया। शुक्रवार को यह 108.60 मीटर था। यानी जलस्तर में 0.06 मीटर या छह सेंटीमीटर की कमी आई है।

हालांकि, जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रभावित इलाकों में पानी भरा हुआ है। लोगों को अपने घरों तक पहुंचने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में रखा राशन, फर्नीचर और अन्य सामान खराब होने से आर्थिक नुकसान भी हुआ है।

फिलहाल प्रभावित परिवारों को पानी उतरने और सामान्य स्थिति बहाल होने का इंतजार है। बाढ़ से जूझ रहे इलाकों में सुरक्षित आवाजाही, जरूरी सामान की उपलब्धता और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Leave a comment