लखनऊ में 1 साल बाद पकड़ी गई लोला: 29 की दिखने के लिए कराई थी प्लास्टिक सर्जरी, विदेश से महिलाओं को लाकर चलाती थी हाईप्रोफाइल रैकेट

लखनऊ में एक साल से फरार उज्बेकिस्तान की लोला कायूमोवा गिरफ्तार हुई। विदेश से महिलाओं को लाने और प्लास्टिक सर्जरी के जरिए पहचान बदलने का आरोप है।
लखनऊ में 1 साल बाद पकड़ी गई लोला: 29 की दिखने के लिए कराई थी प्लास्टिक सर्जरी, विदेश से महिलाओं को लाकर चलाती थी हाईप्रोफाइल रैकेट
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लखनऊ में करीब एक साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तान की लोला कायूमोवा को खुफिया एजेंसी आईबी ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर विदेशी महिलाओं को भारत लाकर हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है। आईबी ने लोला को पकड़ने के बाद उसे सुशांत गोल्फ सिटी थाने की पुलिस के सुपुर्द कर दिया। गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने भी उससे पूछताछ की और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई।

यह मामला करीब एक साल पहले उस समय सामने आया था, जब लखनऊ में विदेशी महिलाओं के अवैध रूप से रहने और उनकी पहचान छिपाने से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा हुआ था। जांच के दौरान पुलिस और अन्य एजेंसियों के सामने लोला का नाम आया था। इसके बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, लोला जांच एजेंसियों से बचती रही और लगातार अपना ठिकाना बदलती रही।

जांच एजेंसियों के अनुसार, लोला पर नेपाल और उज्बेकिस्तान से महिलाओं को लखनऊ लाने का आरोप है। आरोप है कि इन महिलाओं को शहर के पॉश इलाकों में किराए के फ्लैटों में रखा जाता था और वहां से हाईप्रोफाइल ग्राहकों के लिए नेटवर्क संचालित किया जाता था। पूरे मामले में अवैध रूप से विदेशी नागरिकों को भारत में ठहराने और मानव तस्करी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू विदेशी महिलाओं की पहचान बदलने के लिए कथित तौर पर कराई गई प्लास्टिक सर्जरी है। जांच में सामने आया कि लखनऊ के एक निजी क्लीनिक से जुड़े प्लास्टिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता की मदद से दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं की सर्जरी कराई गई थी। आरोप था कि उनके चेहरे और हुलिए में बदलाव कर उन्हें भारतीय महिलाओं जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

2025 में कार्रवाई के दौरान एफआरआरओ की टीम ने लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट से दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं, होलिडा और निलोफर, को पकड़ा था। जांच में उनके पास भारत में रहने से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पूछताछ में प्लास्टिक सर्जरी और कथित नेटवर्क से जुड़े कई नाम जांच के दायरे में आए थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, लोला इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि वह विदेश से महिलाओं को भारत लाने की व्यवस्था करती थी और लखनऊ में उनके ठहरने तथा आगे के नेटवर्क से जुड़े इंतजामों में भी भूमिका निभाती थी। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और आपराधिक गतिविधियों की जानकारी जुटाने की चुनौती है। विदेश से महिलाओं को लाने, उन्हें ठहराने, फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने और पहचान बदलने जैसे आरोपों के पीछे किन लोगों की भूमिका थी, इसकी जांच की जा रही है।

जांच के दौरान डॉक्टर और कथित एजेंट की भूमिका भी सामने आई थी। 2025 में एफआरआरओ की कार्रवाई के बाद डॉ. विवेक गुप्ता और त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा के खिलाफ विदेशी अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब लोला की गिरफ्तारी के बाद इस पुराने मामले की जांच को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

लोला को लेकर एक और चर्चा उसकी खुद की प्लास्टिक सर्जरी को लेकर है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह कम उम्र की दिखने के लिए कई बार प्लास्टिक सर्जरी करा चुकी थी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में उसकी उम्र 49 साल और करीब 29 साल की दिखने की इच्छा का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस तरह के व्यक्तिगत दावों को जांच एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि से अलग देखना जरूरी है।

पुलिस की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नेटवर्क में शामिल महिलाओं को किस तरह लखनऊ लाया जाता था और उनके लिए रहने की व्यवस्था कौन करता था। विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश, वीजा, दस्तावेज और ठहरने से जुड़े नियमों के उल्लंघन का पहलू भी जांच का हिस्सा है।

मामला केवल देह व्यापार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं नेटवर्क के पीछे मानव तस्करी, अवैध रूप से विदेशी नागरिकों को ठहराने और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाला कोई बड़ा संगठित गिरोह तो नहीं है। इसी वजह से लोला से पूछताछ को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोला की गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों का थाने पहुंचना भी मामले की गंभीरता को दर्शाता है। एजेंसियां उससे नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, विदेश में मौजूद संपर्कों और लखनऊ में सक्रिय सहयोगियों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।

पिछले मामले में जिन विदेशी महिलाओं को पकड़ा गया था, वे लंबे समय से लखनऊ में रह रही थीं। जांच में यह भी सामने आया था कि उनकी पहचान छिपाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराई गई थी। इससे एजेंसियों को शक हुआ कि विदेशी महिलाओं को भारत में अवैध तरीके से ठहराने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था।

अब लोला की गिरफ्तारी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि विदेशी महिलाओं को भारत लाने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित होती थी। साथ ही यह भी जांच होगी कि नेटवर्क के लिए ग्राहकों की व्यवस्था कौन करता था और पैसे का लेनदेन किस तरीके से होता था।

लखनऊ के पॉश इलाकों में किराए के फ्लैट लेकर इस तरह की गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप ने स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा और निगरानी से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि आरोपियों ने लंबे समय तक किराए के मकानों में रहकर अपनी गतिविधियां कैसे जारी रखीं।

इस मामले में पुलिस और खुफिया एजेंसियों की जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम सामने आने की संभावना है। लोला से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों और कथित नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उसके खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी है और अदालत में मामला आगे बढ़ने के साथ ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

कुल मिलाकर, लखनऊ में करीब एक साल से फरार उज्बेकिस्तान की लोला कायूमोवा को आईबी ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर नेपाल और उज्बेकिस्तान से महिलाओं को भारत लाकर हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने और उनकी पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर प्लास्टिक सर्जरी कराने का आरोप है। 2025 में दो विदेशी महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद यह नेटवर्क जांच के दायरे में आया था। अब लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसके कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, सहयोगियों और अन्य गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

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