5 लाख की साइबर ठगी की जांच में 125 करोड़ के फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, पटना से 4 गिरफ्तार

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 5 लाख की ठगी की जांच में 125.39 करोड़ रुपये से अधिक के कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया। पटना से चार आरोपी गिरफ्तार हुए।

सूरत में 5 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच ने 125.39 करोड़ रुपये से अधिक के कथित अंतरराज्यीय फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया। पुलिस ने पटना के एक होटल से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। फर्जी बैंकिंग APK के जरिए मोबाइल हैक करने का आरोप है।

सूरत: गुजरात की सूरत साइबर क्राइम सेल ने महज 5 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच करते हुए देशभर में फैले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, जांच में 125.39 करोड़ रुपये से अधिक की कथित साइबर धोखाधड़ी का पता चला है। इस मामले में पटना के एक होटल से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी बैंकिंग ऐप के नाम पर फर्जी APK फाइल तैयार कर लोगों को व्हाट्सऐप के जरिए भेजते थे। जैसे ही पीड़ित इस फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, आरोपियों को डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद वे बैंकिंग और निजी जानकारी का इस्तेमाल कर खातों से रकम निकालने में सक्षम हो जाते थे।

5 लाख रुपये की शिकायत से शुरू हुई जांच

सूरत साइबर क्राइम पुलिस के सामने यह मामला एक शिकायत के बाद आया, जिसमें एक व्यक्ति के बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपये कथित तौर पर निकाल लिए गए थे। जांच के दौरान पुलिस ने लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की तकनीकी पड़ताल शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि इस मामले के तार गुजरात से बाहर तक जुड़े हुए हैं। तकनीकी सुरागों ने जांचकर्ताओं को झारखंड के जामताड़ा और देवघर तक पहुंचाया।

इसके बाद सूरत साइबर क्राइम सेल की टीम ने इन इलाकों में जांच और निगरानी शुरू की। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान नेटवर्क के कथित मुख्य आरोपी जहरूल अंसारी उर्फ चांद की गतिविधियों का पता चला।

जामताड़ा से देवघर और फिर पटना तक पीछा

पुलिस के अनुसार, जहरूल अंसारी ट्रेन से यात्रा कर रहा था। सूरत साइबर सेल की टीम ने उसकी लोकेशन और गतिविधियों पर तकनीकी निगरानी बनाए रखी।
 जांच टीम ने जामताड़ा से देवघर और फिर वहां से पटना तक उसका पीछा किया। पुलिस के मुताबिक, यह पूरा ऑपरेशन करीब 2,456 किलोमीटर की दूरी तक चला।

आखिरकार पटना शहर के एक होटल में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जहरूल अंसारी उर्फ चांद को गिरफ्तार किया। उसके साथ राजन कुमार, सुनील प्रसाद सोनी और आदित्यराज उर्फ अमन को भी पकड़ा गया। पुलिस अब चारों आरोपियों से पूछताछ कर कथित साइबर नेटवर्क में उनकी भूमिका और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

336 फर्जी APK से हजारों मोबाइल प्रभावित

जांच में साइबर ठगी के नेटवर्क का बड़ा दायरा सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी द्वारा तैयार और प्रसारित की गई 336 फर्जी APK फाइलें देशभर में 31,174 मोबाइल फोन पर इंस्टॉल की गई थीं। इनमें से 5,613 मोबाइल फोन कथित तौर पर हैक किए गए। पुलिस का कहना है कि इन प्रभावित उपकरणों का इस्तेमाल आगे साइबर धोखाधड़ी के लिए किया गया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की कुल राशि 125.39 करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही कथित धोखाधड़ी की अंतिम राशि और नेटवर्क में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

बैंकिंग ऐप की नकल कर बनाया गया फर्जी APK

पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों को बैंकिंग सेवा से जुड़ी जरूरी अपडेट या अन्य बहाने से फर्जी APK डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे। इसके लिए बैंक के नाम और ऐप की पहचान का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि फाइल वास्तविक लगे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी फर्जी ‘PNB One’ ऐप जैसी दिखने वाली APK फाइलों का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हें मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभावित पीड़ितों तक पहुंचाया जाता था। फर्जी ऐप इंस्टॉल होने के बाद कथित तौर पर आरोपियों को मोबाइल डिवाइस की कई संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच मिल जाती थी।

निजी और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच का आरोप

पुलिस के मुताबिक, फर्जी ऐप के जरिए आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल में मौजूद कई तरह की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच हासिल हो जाती थी। इसमें बैंकिंग संबंधी डेटा, KYC से जुड़ी जानकारी, SMS, कॉन्टैक्ट, कॉल लॉग और फोटो जैसी निजी सामग्री शामिल होने का दावा किया गया है। इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने किन-किन लोगों को निशाना बनाया और उनके मोबाइल से प्राप्त जानकारी का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

रकम को अलग-अलग खातों में भेजने का आरोप

जांच के अनुसार, कथित तौर पर पीड़ितों के खातों से रकम निकालने के बाद उसे अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता था। पुलिस का दावा है कि इस प्रक्रिया में म्यूल अकाउंट और फर्जी क्रेडिट कार्ड जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसियां कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। उनका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम किन खातों में गई और बाद में उसे कैसे आगे स्थानांतरित किया गया। पुलिस के अनुसार, कुछ रकम को नकदी में बदलने और फिर कैश डिपॉजिट मशीनों के जरिए अन्य खातों में जमा करने का तरीका भी अपनाया गया था।

देशभर में नेटवर्क की तलाश

सूरत साइबर क्राइम सेल अब इस मामले को सिर्फ चार गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं मान रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी APK तैयार करने, उन्हें लोगों तक पहुंचाने, मोबाइल डिवाइस से जानकारी हासिल करने और कथित तौर पर रकम को इधर-उधर करने में कितने लोग शामिल थे।

जांचकर्ताओं का ध्यान उन बैंक खातों पर भी है जिनमें कथित साइबर फ्रॉड की रकम पहुंची। इन खातों के जरिए नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

जामताड़ा और देवघर कनेक्शन की भी जांच

साइबर अपराध से जुड़े मामलों में झारखंड का जामताड़ा लंबे समय से जांच एजेंसियों के निशाने पर रहा है। इस मामले में भी तकनीकी जांच के दौरान जामताड़ा और देवघर से कनेक्शन सामने आने की बात पुलिस ने कही है।

हालांकि, किसी स्थान से कनेक्शन सामने आना अपने आप में वहां मौजूद हर व्यक्ति या समूह की संलिप्तता साबित नहीं करता। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों और कथित नेटवर्क के बीच वास्तविक संबंधों की पुष्टि करने के लिए सबूत जुटा रही है।

डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

यह मामला मोबाइल ऐप और APK फाइलों के जरिए होने वाली साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को भी सामने लाता है। अनजान स्रोतों से प्राप्त APK इंस्टॉल करने पर मोबाइल में मौजूद निजी और वित्तीय जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ आमतौर पर उपयोगकर्ताओं को आधिकारिक ऐप स्टोर या संबंधित संस्थान के सत्यापित माध्यमों से ही बैंकिंग ऐप डाउनलोड करने की सलाह देते हैं। किसी मैसेजिंग ऐप के जरिए भेजी गई संदिग्ध APK फाइल को इंस्टॉल करने से बचना भी महत्वपूर्ण है।

आगे की जांच में खुल सकते हैं और राज

सूरत साइबर क्राइम सेल की जांच अभी जारी है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के अलावा डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और कथित लेनदेन की जांच कर रही है। 125.39 करोड़ रुपये से अधिक के कथित साइबर फ्रॉड का दावा सामने आने के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया, कितनी रकम वास्तव में ठगी गई और इस पूरे कथित ऑपरेशन में कौन-कौन लोग शामिल थे। 

फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी को जांच में अहम सफलता माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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