ग्रेटर नोएडा में UPITS 2026 के बिजनेस सेशन में पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश के विकास, निवेश और निर्यात पर बात की। उन्होंने 2030 तक प्रदेश के वार्षिक निर्यात को 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया।
ग्रेटर नोएडा: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में कहा कि प्रदेश की औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियां अब वैश्विक बाजार से जुड़ रही हैं। उन्होंने एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश का उल्लेख करते हुए 2030 तक उत्तर प्रदेश के वार्षिक निर्यात को 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया।
वैश्विक व्यापार में यूपी की बढ़ती भूमिका
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन पीयूष गोयल ने ‘लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ’ विषय पर आयोजित विशेष बिजनेस सेशन में हिस्सा लिया। UPITS 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक किया जा रहा है और इसमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निर्यातकों, निर्माताओं और निवेशकों को जोड़ने पर जोर दिया गया है।

पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विकास के क्षेत्र में नई यात्रा तय की है। उनके अनुसार, प्रदेश में उद्यमियों का आत्मविश्वास और निवेश की गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर देखा जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में निर्मित एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट और बड़े औद्योगिक पार्कों का उल्लेख किया। उन्होंने डिफेंस, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश को भी बदलते औद्योगिक परिदृश्य का हिस्सा बताया।
2030 तक 5 लाख करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात को वर्ष 2030 तक 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश का वार्षिक निर्यात वर्तमान में करीब 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पाद और ब्रांड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात, विदेशी निवेश और पर्यटन प्रदेश की विकास यात्रा के अगले प्रमुख क्षेत्र हैं।
गोयल ने व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े लोगों से वैश्विक बाजार में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के जरिए भारतीय कारोबारियों को कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल रही है। केंद्र सरकार भी देशभर के MSME, व्यापारियों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स तक FTA के लाभ पहुंचाने पर जोर दे रही है।
राजस्व संग्रह और कारोबारी माहौल पर कही बात
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के कारोबारी माहौल और कानून-व्यवस्था को लेकर मौजूद चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय उद्यमियों में प्रदेश में बड़े निवेश को लेकर पर्याप्त विश्वास नहीं था।
गोयल ने कहा कि सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव के बाद राजस्व संग्रह में वृद्धि हुई है। उन्होंने आबकारी, भूमि हस्तांतरण, रजिस्ट्रेशन फीस, स्टांप ड्यूटी और खनन जैसे राजस्व स्रोतों का उदाहरण दिया।
खनन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 में बालू, मौरंग, पत्थर और अन्य खनिजों से राज्य का राजस्व लगभग 1,548 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, बाद के वर्षों में इस क्षेत्र से राजस्व में कई गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि बढ़े हुए राजस्व से सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों के लिए सरकार के पास अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब सरप्लस बजट पेश करने की स्थिति में है।
UPITS से ग्लोबल मार्केट तक पहुंच का मंच
पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो को केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के कारोबार को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला मंच बताया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, UPITS 2026 में भारतीय विक्रेताओं, निर्यातकों और MSME को विदेशी खरीदारों के साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने उद्यमियों से वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से खुले बाजारों का लाभ उत्तर प्रदेश के कारोबारी और निर्यातक उठा सकते हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश के MSME मंत्री भूपेंद्र चौधरी, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, MSME राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, प्रमुख सचिव MSME शशि भूषण लाल सुशील, उद्योग आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन और विशेष सचिव MSME शिशिर समेत अन्य अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।











