असम के गुवाहाटी में CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका और कई कार्यकर्ताओं को वॉलंटियर मीटिंग से पहले पुलिस ने हिरासत में लिया। CJP ने दावा किया कि टीम शांतिपूर्ण बैठक के लिए पहुंची थी और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
गुवाहाटी: असम के गुवाहाटी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर और प्रवक्ता आशुतोष रांका तथा संगठन के कई कार्यकर्ताओं को रविवार को पुलिस ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई CJP की क्षेत्रीय वॉलंटियर मीटिंग शुरू होने से पहले हुई। संगठन का कहना है कि उसकी टीम शांतिपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए पहुंची थी। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, रांका के साथ कई अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वॉलंटियर मीटिंग से पहले हिरासत
CJP ने रविवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसके स्वयंसेवकों को गुवाहाटी में प्रस्तावित वॉलंटियर मीटिंग से पहले असम पुलिस ने हिरासत में लिया। संगठन के मुताबिक, बैठक में करीब 200 से 300 स्वयंसेवकों के शामिल होने की योजना थी। बैठक का आयोजन पहले गुवाहाटी के एथगांव इलाके में होना था। बाद में आयोजन स्थल को बदलकर असम सचिवालय के सामने चौधरी टीला किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
CJP ने आरोप लगाया था कि पहले वाले स्थल पर दबाव बनाए जाने के बाद कार्यक्रम का स्थान बदला गया। रविवार को बैठक शुरू होने से पहले पुलिस ने रांका और वहां पहुंच रहे अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। NE Now की रिपोर्ट के अनुसार, रांका के साथ नागालैंड से आए कुछ प्रतिभागियों को भी हिरासत में लिया गया।
रांका ने हिमंता बिस्व सरमा पर लगाए आरोप
हिरासत में लिए जाने से पहले आशुतोष रांका ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार को डर है कि अगर CJP की टीम असम के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखेगी तो यह जानकारी पूरे देश के सामने आ जाएगी।
रांका ने असम में बुनियादी ढांचे और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उनके मुताबिक, संगठन राज्य के स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने के साथ-साथ अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर भी लोगों के बीच काम करना चाहता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुख्यमंत्री या असम सरकार की ओर से रांका के इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र बयान उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को रांका और CJP के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल
CJP के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया कि पुलिस ने रांका और अन्य सदस्यों को बैठक में शामिल होने से पहले ही हिरासत में ले लिया।
दीपके के अनुसार, संगठन की टीम एक वॉलंटियर मीटिंग के लिए जा रही थी। CJP ने दावा किया कि कार्यक्रम स्थल के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी और रास्ते को भी रोका गया था।
द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए सदस्यों से मिलने के लिए बाहर पहुंचे वकीलों को अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पर अलग-अलग दावे
पुलिस कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए CJP कार्यकर्ताओं की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
Daijiworld की रिपोर्ट में CJP के हवाले से करीब 50 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया, जबकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। इसी रिपोर्ट में 30 से अधिक कार्यकर्ताओं के हिरासत में होने की जानकारी भी दी गई है।
वहीं, अन्य रिपोर्टों में आशुतोष रांका समेत कई प्रमुख सदस्यों और स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। इसलिए इस समय हिरासत में लिए गए लोगों की निश्चित संख्या बताना उचित नहीं होगा।
CJP का असम में शिक्षा अभियान
आशुतोष रांका और CJP की असम गतिविधियां मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की स्थिति के मुद्दे से जुड़ी बताई जा रही हैं।
CJP ने हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए अभियान चलाया है। राजस्थान में रांका के नेतृत्व वाली टीम ने सरकारी स्कूलों का निरीक्षण भी किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर जिले के कुछ स्कूलों में CJP टीम ने बुनियादी सुविधाओं की कमी, असुरक्षित इमारतों और स्कूल की रसोई में मैगॉट्स मिलने जैसे मुद्दे उठाए थे।
संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में मौजूद समस्याओं को सामने लाना और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाना है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़ा विवाद
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित अपने गांव से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया था। अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और छात्रों को उपलब्ध संसाधनों की स्थिति का जायजा लेने की बात कही गई थी।
दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया था। उन्होंने निजी स्कूलों की फीस पर सीमा लगाने की मांग भी की थी।
CJP के मुताबिक, अभियान के अगले चरण में महाराष्ट्र के दूसरे क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया जाना था। संगठन अब इसी तरह का अभियान असम और पूर्वोत्तर में भी आगे बढ़ाने की बात कह रहा है।
CJP ने जारी किया बयान
हिरासत की घटना के बाद CJP ने सोशल मीडिया पर कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाने के कारण उसके स्वयंसेवकों को हिरासत में लिया गया है। संगठन ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उसका अभियान जारी रहेगा।
CJP ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि वह असम में स्वयंसेवकों का नेटवर्क बढ़ाने और सरकारी स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने की योजना पर काम करता रहेगा।
असम में संगठन विस्तार की तैयारी
CJP की 27 सितंबर की बैठक को असम और पूर्वोत्तर में संगठन के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा था। पार्टी की ओर से पहले ही कहा गया था कि क्षेत्रीय वॉलंटियर मीटिंग में स्थानीय स्वयंसेवकों से संपर्क बढ़ाने और संगठन की गतिविधियों पर चर्चा की जाएगी।
आशुतोष रांका शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे थे और रविवार को होने वाली बैठक में शामिल होने वाले थे। CJP की ओर से पहले जारी जानकारी के अनुसार, संगठन के कई अन्य सदस्य भी 23 सितंबर से असम में मौजूद थे।
पुलिस कार्रवाई पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार
हिरासत की घटना के बाद CJP ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में असम पुलिस की ओर से हिरासत के कारणों पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रांका और अन्य कार्यकर्ताओं को किन कानूनी प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया और उन्हें कितनी देर तक हिरासत में रखा जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों में संगठन के आरोपों और पुलिस कार्रवाई का विवरण है, जबकि हिरासत की आधिकारिक वजह की पुष्टि होना बाकी है।
गुवाहाटी में हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब CJP शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर असम में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रही थी। आगे की स्थिति पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट हो सकती है।











