Stock Market Outlook: 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक बाजार पर तेल, US-Iran वार्ता और आर्थिक आंकड़ों का असर

28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक शेयर बाजार पर कच्चे तेल, US-Iran वार्ता, रुपये, बॉन्ड यील्ड और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों का असर देखने को मिल सकता है।

28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल, अमेरिका-ईरान वार्ता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और आर्थिक आंकड़ों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों की नजर रुपये, एफआईआई गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन पर भी रहेगी।

Business: कम कारोबारी सत्र वाले आगामी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों का असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल, रुपये की चाल और अगस्त के औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों पर रहेगी। गांधी जयंती के कारण 2 अक्टूबर को बाजार बंद रहेगा।

अमेरिका-ईरान वार्ता और कच्चे तेल की कीमतें रहेंगी अहम

आगामी कारोबारी सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतें शामिल रहेंगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बातचीत में प्रगति और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़ी किसी रूपरेखा से ऊर्जा कीमतों में नरमी आ सकती है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा के अनुसार, तेल की कीमतों में कमी से भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। इसके विपरीत, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग PMI पर नजर

घरेलू स्तर पर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और एचएसबीसी विनिर्माण पीएमआई बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियों और वाहन बिक्री के मासिक आंकड़े भी निवेशकों के लिए अहम संकेत देंगे।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के नीतिगत फैसले के बाद वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल पर भी बाजार की नजर रहेगी। बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर में तेजी से उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जबकि यील्ड में नरमी बाजार को राहत दे सकती है।

रुपये की चाल और ब्रेंट क्रूड भी तय करेंगे बाजार का रुख

रुपये की चाल भी आगामी सप्ताह का महत्वपूर्ण कारक रहेगी। कच्चे तेल की खरीद के लिए डॉलर की मांग और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत देने वाला स्तर नहीं है। अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम कम हो सकता है, जबकि तनाव बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, बाजार की नजर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन और केंद्र के राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर रहेगी। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उपभोक्ता भरोसा, JOLTS रोजगार आंकड़े और यूरो क्षेत्र की सितंबर मुद्रास्फीति के आंकड़े भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.53 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 205.9 अंक यानी 0.88 प्रतिशत नीचे रहा। वहीं, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा।

Leave a comment