लखनऊ में 50 फीट ऊंचे झूले की ट्रॉली टूटी बच्चियां चीखती रहीं- रोको, चोट लग गई, खून बह रहा है भाई-बहन समेत 5 घायल

लखनऊ के इंदिरानगर सावन महोत्सव में 50 फीट ऊंचे झूले का बकेट टूट गया। हादसे में तीन भाई-बहन समेत 5 लोग घायल हुए, दो युवतियों की हालत गंभीर।
लखनऊ में 50 फीट ऊंचे झूले की ट्रॉली टूटी बच्चियां चीखती रहीं- रोको, चोट लग गई, खून बह रहा है भाई-बहन समेत 5 घायल
Photo Credit / Attribution: Google

लखनऊ के इंदिरानगर इलाके में लगे सावन महोत्सव मेले में बड़ा हादसा हो गया। करीब 50 फीट ऊंचे झूले पर सवार लोगों के साथ उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झूले की एक ट्रॉली यानी बकेट अचानक टूट गई। हादसे के बाद झूले पर मौजूद बच्चियां और युवतियां घबराकर चीखने लगीं। सामने आए वीडियो में घायल युवतियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिनमें वे झूला रोकने और चोट लगने की बात कहती नजर आती हैं। हादसे में भाई-बहन समेत कुल पांच लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। दो युवतियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। 

बताया जा रहा है कि हादसा उस समय हुआ, जब मेले में झूला चल रहा था और लोग ऊंचाई पर पहुंचकर उसका आनंद ले रहे थे। अचानक ट्रॉली का हिस्सा टूटने से उसमें बैठे लोगों में दहशत फैल गई। कुछ ही क्षणों में मेले का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। हादसे के बाद झूले को रोक दिया गया और घायल लोगों को नीचे लाने की कोशिश की गई।

वीडियो में हादसे के बाद घायल बच्चियों की परेशानी साफ दिखाई देती है। वे दर्द के कारण रोती-चीखती नजर आती हैं। एक बच्ची चोट लगने और खून निकलने की बात कहती सुनाई देती है। आसपास मौजूद लोग भी घायलों को संभालने और उनकी मदद करने की कोशिश करते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद हादसे की गंभीरता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

हादसे में घायल लोगों में तीन भाई-बहन के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है। परिवार के लोग मेले में घूमने और झूला झूलने पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही देर में यह मनोरंजन उनके लिए दर्दनाक हादसे में बदल गया। झूले की ट्रॉली टूटने के बाद परिवार के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई।

हादसे के बाद घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पांच लोग घायल हुए हैं और इनमें दो युवतियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को चोटों के आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। परिवार के लोग हादसे के बाद काफी परेशान दिखाई दिए।

प्रारंभिक जांच में झूले के संचालन में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन की ओर से यह देखा जाना जरूरी है कि झूले को चलाने से पहले उसके सभी हिस्सों की तकनीकी जांच की गई थी या नहीं।

मेले में लगाए जाने वाले बड़े झूलों में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है। ऊंचाई पर चलने वाले झूले में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ट्रॉली, लॉकिंग सिस्टम, बोल्ट, केबल और अन्य हिस्सों की नियमित जांच जरूरी होती है। ऐसे में ट्रॉली टूटने की घटना ने मेले में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ में सावन के दौरान जगह-जगह धार्मिक और मनोरंजन से जुड़े आयोजन किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में परिवार और बच्चे पहुंचते हैं। बच्चों के लिए मेले के झूले विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। इसलिए झूले संचालकों और आयोजनकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि मनोरंजन के साथ सुरक्षा व्यवस्था में कोई समझौता न हो।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि झूले की ट्रॉली आखिर किस वजह से टूटी। क्या उसमें कोई तकनीकी खराबी थी, क्या ट्रॉली के लॉकिंग सिस्टम में समस्या थी या फिर झूले के रखरखाव में लापरवाही हुई थी, इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। अगर सुरक्षा जांच के दौरान कोई कमी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी हो सकती है।

प्रशासन के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मेले में लगे दूसरे झूलों की सुरक्षा जांच कराई जाए। किसी एक झूले में खराबी सामने आने के बाद बाकी झूलों को भी बिना जांच के चलाना जोखिम भरा हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों से निरीक्षण कराने के बाद ही झूलों के संचालन की अनुमति देना यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

हादसे के समय मेले में मौजूद लोगों में भी डर का माहौल बन गया। झूले से अचानक आवाज आने और ट्रॉली टूटने के बाद लोग इधर-उधर भागने लगे। घायल यात्रियों को देखकर उनके परिजन और आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ समय के लिए मेले में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

घटना के बाद झूले के संचालन को लेकर भी सवाल उठे हैं। अगर झूला काफी ऊंचाई पर चल रहा था तो उसके प्रत्येक हिस्से की जांच और सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। खासकर बच्चों और युवतियों के सवार होने के कारण संचालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए थी।

हादसे में घायल परिवारों के लिए यह घटना लंबे समय तक याद रहने वाली है। मेले में मनोरंजन के लिए पहुंचे लोगों को इस बात का अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि कुछ ही मिनटों में उन्हें अस्पताल जाना पड़ सकता है। ऐसे हादसे यह बताते हैं कि सार्वजनिक आयोजनों में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

पुलिस और प्रशासन की जांच में मेले के आयोजकों और झूला संचालकों से पूछताछ की जा सकती है। झूले को लगाने की अनुमति, सुरक्षा प्रमाणपत्र, तकनीकी निरीक्षण और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच हो सकती है। यदि किसी नियम का उल्लंघन सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने भी मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि बड़े झूलों को चलाने से पहले उनकी पूरी तकनीकी जांच होनी चाहिए और बच्चों को झूले पर बैठाने से पहले सुरक्षा लॉक की जांच करना जरूरी है।

इस तरह के हादसों से बचने के लिए झूला संचालकों को प्रत्येक सवारी से पहले सुरक्षा लॉक और सीट की स्थिति जांचनी चाहिए। झूले की नियमित सर्विसिंग और खराब हिस्सों को समय पर बदलना भी जरूरी है। किसी भी तरह की असामान्य आवाज या तकनीकी समस्या दिखाई देने पर झूला तत्काल बंद किया जाना चाहिए।

फिलहाल पांच लोगों के घायल होने की सूचना है। दो युवतियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। प्रशासनिक जांच के बाद ही हादसे की पूरी वजह और जिम्मेदारी तय हो सकेगी। इस घटना के बाद मेले में लगे अन्य झूलों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

कुल मिलाकर, लखनऊ के इंदिरानगर में सावन महोत्सव के दौरान करीब 50 फीट ऊंचे झूले की ट्रॉली टूटने से बड़ा हादसा हो गया। झूले पर सवार बच्चियां और युवतियां घबराकर चीखने लगीं। हादसे में तीन भाई-बहन समेत पांच लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि दो युवतियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रारंभिक तौर पर झूला संचालन में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका जताई गई है। अब जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट होगी।

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