प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन बारिश से घर डूबे: बिहार में गंडक में बहा स्कूल, हिमाचल-उत्तराखंड में 6 मौतें; पुल भी नदी में समाया

प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन बारिश से घरों में पानी घुस गया। बिहार में गंडक से स्कूल बहा, हिमाचल-उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से 6 मौतें हुईं।
प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन बारिश से घर डूबे: बिहार में गंडक में बहा स्कूल, हिमाचल-उत्तराखंड में 6 मौतें; पुल भी नदी में समाया
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देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर आफत बनकर बरस रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कहीं रिहायशी इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है तो कहीं नदी के तेज बहाव और कटाव ने स्कूल जैसी सार्वजनिक इमारतों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के बीच भूस्खलन की घटनाओं ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ताजा घटनाक्रम में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से कुल छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में चट्टानों की चपेट में आकर एक पुल के नदी में समा जाने से आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन बारिश का दौर जारी रहने से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। रिहायशी क्षेत्रों में बारिश का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। लोगों के घरों में रखा सामान पानी में डूबने और खराब होने की स्थिति में है। कई जगह लोगों को अपने घरों से पानी निकालने और जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं।

प्रयागराज में बारिश का असर रेलवे परिचालन पर भी देखने को मिला है। रामबाग रेलवे स्टेशन के तीन ट्रैक पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। इसके कारण कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म और रेल परिचालन प्रभावित हुआ। लगातार बारिश को देखते हुए जिले में स्कूलों को भी बंद रखा गया है, ताकि बच्चों को जलभराव और खराब मौसम के बीच घर से बाहर निकलने की जरूरत न पड़े।

शहर के कई रिहायशी इलाकों में हालात ऐसे बने हैं कि घरों के अंदर बेड, सोफा और अन्य घरेलू सामान तक पानी पहुंच गया। लगातार बारिश से जलनिकासी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि बारिश रुकने के बाद ही पानी निकलने और सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से जलभराव वाले इलाकों पर नजर रखी जा रही है और लोगों को जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

उधर बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में गंडक नदी का कटाव लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी के तेज बहाव और कटाव की चपेट में आकर एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय की पांच में से चार कक्षाएं नदी में समा गई हैं। स्कूल का बचा हुआ हिस्सा भी खतरे में बताया जा रहा है। नदी जिस तेजी से किनारे की जमीन को काट रही है, उससे आसपास के दूसरे इलाकों और संरचनाओं पर भी खतरा बना हुआ है।

बगहा में गंडक नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने के साथ कटाव का असर भी तेज हो गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। स्कूल के बड़े हिस्से के नदी में बह जाने के बाद अब प्रशासन के सामने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल परिसर और आसपास के इलाके की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो गया है।

नदी कटाव प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है। नदी का किनारा बारिश के दौरान कमजोर हो सकता है और अचानक जमीन कटने का खतरा बना रहता है। ऐसे में लोगों को नदी के बेहद करीब जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

उत्तर बिहार में गंडक के अलावा दूसरी नदियों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में पानी भरने और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ जाती है। नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर भी कई नदियों के जलस्तर पर पड़ता है। इसलिए नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन और स्थानीय लोगों की सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है।

हिमाचल प्रदेश में भी बारिश और भूस्खलन ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सिरमौर जिले में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड की घटना में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। मृतकों में एक ट्रक चालक और नेपाल के दो मजदूर बताए जा रहे हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी से अचानक मलबा और चट्टानें गिरने से हादसा हुआ। राज्य के कई हिस्सों में सड़कें भी भूस्खलन के कारण बाधित हुई हैं।

हिमाचल में लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में सड़क यातायात को सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है। चट्टानें गिरने और मलबा आने से कई मार्ग बंद हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही पहाड़ी रास्तों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

उत्तराखंड में भी बारिश के बीच भूस्खलन की घटना में तीन लोगों की मौत हुई है। पौड़ी गढ़वाल में पहाड़ी से आया मलबा एक मकान की चपेट में आ गया। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में जमीन खिसकने का खतरा बढ़ा हुआ है। कई सड़कें भी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रभावित हुई हैं।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भी हालात गंभीर बने। यहां चट्टान गिरने से एक पुल के क्षतिग्रस्त होकर नदी में समा जाने की जानकारी सामने आई है। पुल के प्रभावित होने से आवाजाही पर असर पड़ा है। यह मार्ग रणनीतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, इसलिए पुल को नुकसान पहुंचने से स्थानीय लोगों के साथ यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है।

पर्वतीय इलाकों में बारिश के दौरान नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। सामान्य दिखाई देने वाली सड़क या नदी का रास्ता कुछ ही समय में खतरनाक हो सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

देश के कई हिस्सों में एक साथ बारिश होने से राहत और बचाव एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ा है। मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ की समस्या है तो पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और सड़क बाधित होने की चुनौती सामने है। प्रशासन को एक साथ कई मोर्चों पर निगरानी रखनी पड़ रही है।

बारिश का असर केवल लोगों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान को नुकसान पहुंच रहा है। स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है। रेलवे ट्रैक जलमग्न हो रहे हैं। वहीं नदी कटाव के कारण सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ों में सड़क और पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाएं भी खतरे में आ रही हैं।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। हिमाचल प्रदेश में 19 से 21 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि उत्तराखंड में 20 से 24 अगस्त के बीच भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना रह सकता है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। प्रयागराज जैसे शहरों में लगातार बारिश होने पर जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। गंगा और यमुना समेत नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा हो सकता है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नदी किनारे कटाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी है। इसी तरह पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका वाले मकानों और सड़कों पर निगरानी बढ़ानी पड़ती है।

लोगों को भी खराब मौसम के दौरान अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत है। नदी, नाला, पुल या जलभराव वाले रास्ते को पार करने की कोशिश खतरनाक हो सकती है। बच्चों को विशेष रूप से जलस्रोतों के आसपास जाने से रोकना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को सड़क की स्थिति और प्रशासन की एडवाइजरी की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

बारिश के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी बना रहता है। खुले मैदान, खेत और नदी किनारे मौजूद लोगों को मौसम खराब होते ही सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है। पेड़ के नीचे खड़े होने के बजाय पक्की इमारत या सुरक्षित स्थान में रहना ज्यादा उचित है।

प्रयागराज में लगातार बारिश से जहां शहर के लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है, वहीं बिहार के बगहा में नदी कटाव ने स्कूल को नुकसान पहुंचाकर स्थिति की गंभीरता दिखा दी है। दूसरी तरफ हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश ने भूस्खलन के रूप में जानलेवा रूप ले लिया है। इन घटनाओं से साफ है कि मानसून के दौरान मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के खतरे बने हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन और राहत एजेंसियां संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और नदियों के जलस्तर पर निर्भर करेगा कि स्थिति कितनी गंभीर होती है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश से बिहार और हिमाचल-उत्तराखंड तक मानसून ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन बारिश से कई घरों में पानी घुस गया और घरेलू सामान डूब गया। बिहार के बगहा में गंडक नदी के कटाव से प्राथमिक स्कूल की पांच में से चार कक्षाएं नदी में समा गईं। हिमाचल के सिरमौर और उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में लैंडस्लाइड से तीन-तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि पिथौरागढ़ में चट्टान गिरने से पुल नदी में समा गया। ऐसे हालात में लोगों को नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम विभाग और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की जरूरत है।

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