Maharashtra Politics: मीरा-भायंदर की नई मेयर बनीं डिंपल मेहता, ‘अमराठी’ पहचान पर विवाद तेज

मीरा-भायंदर की नई मेयर डिंपल मेहता चुनी गईं। उनके ‘अमराठी’ पहचान को लेकर विवाद तेज हो गया है। जानें राजनीतिक और स्थानीय प्रतिक्रिया। ‘अमराठी महापौर’ पर विवाद

मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पार्षद डिंपल मेहता को सर्वसम्मति से नया महापौर चुन लिया गया है। वहीं, ध्रुवकिशोर पाटिल को उप महापौर नियुक्त किया गया। 

Mira Bhayandar Municipal Corporation: मीरा-भायंदर नगर निगम में हुए महापौर चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार डिंपल मेहता को सर्वसम्मति से महापौर चुना गया, यह चुनाव हाल ही में संपन्न 29 नगर पालिकाओं के चुनावों के बाद महापौर चयन प्रक्रिया के तहत नगर निगम परिसर में कराया गया, जहां मराठी एकीकरण समिति के विरोध के बावजूद मतदान हुआ और डिंपल मेहता को स्पष्ट बहुमत मिला, हालांकि चुनाव से पहले ही इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा गया था क्योंकि समिति ने केवल मराठी महापौर की मांग उठाई थी, जिसे बीजेपी ने दरकिनार कर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत

मीरा-भायंदर नगर निगम परिसर में हुए महापौर चुनाव में डिंपल मेहता को 79 वोट मिले, जिससे उनकी जीत तय हो गई। यह मतदान हाल ही में संपन्न 29 नगर पालिकाओं के चुनावों के बाद महापौर चयन प्रक्रिया के तहत कराया गया था। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया। मतदान के दौरान बीजेपी के 78 पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद ने डिंपल मेहता के पक्ष में मतदान किया। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार रुबीना शेख को केवल 16 वोट मिले, जिन्हें मीरा-भायंदर विकास अघाड़ी के पार्षदों का समर्थन प्राप्त था।

उप महापौर पद के लिए भी मतदान हुआ, जिसमें बीजेपी के ध्रुवकिशोर पाटिल को भी 79 वोट मिले और वे निर्विरोध चुने गए। इस परिणाम ने एक बार फिर नगर निगम में बीजेपी की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया।

Maharashtra Politics: मीरा-भायंदर की नई मेयर बनीं डिंपल मेहता, ‘अमराठी’ पहचान पर विवाद तेज

‘अमराठी महापौर’ पर बढ़ा विवाद

चुनाव से पहले ही शहर में राजनीतिक माहौल गरम था। मराठी एकीकरण समिति ने यह मुद्दा उठाया था कि मीरा-भायंदर का महापौर केवल मराठी समुदाय से होना चाहिए। समिति ने दावा किया कि स्थानीय राजनीति और प्रशासन में मराठी पहचान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, बीजेपी ने इस मांग को खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई। मतदान के दौरान नगर निगम परिसर के बाहर मराठी संगठनों और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।

डिंपल मेहता के महापौर बनने के बाद यह विवाद और तेज हो गया। मराठी एकीकरण समिति ने आरोप लगाया कि शहर की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान के बावजूद एक गैर-मराठी उम्मीदवार को महापौर बनाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने “मराठी महापौर ही चाहिए” के नारे लगाए और नगर निगम प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया।

विवाद के बीच बीजेपी विधायक प्रताप सरनाइक ने मराठी एकीकरण समिति पर तीखा हमला बोला। एबीपी माझा से बातचीत में उन्होंने कहा कि समिति ने पहले उद्धव ठाकरे गुट (उबाठा) और MNS के साथ मिलकर बीजेपी के 28 पार्षदों को हरवाने का काम किया था, और अब वही लोग विरोध कर रहे हैं।

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