तालिबान शासन का कठोर फैसला, गर्भनिरोधक दवाओं की बिक्री पर लगाई रोक

तालिबान शासन ने अफगानिस्तान में गर्भनिरोधक दवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले से महिलाओं की सेहत, मातृत्व और अधिकारों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका

तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान में गर्भनिरोधक दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से महिलाओं में कुपोषण, बार-बार गर्भधारण और मातृ मृत्यु दर बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

World News: अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत महिलाओं की जिंदगी लगातार और मुश्किल होती जा रही है। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन से बाहर किए जाने के बाद अब महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक और बड़ा फैसला सामने आया है। तालिबान सरकार ने देशभर में गर्भनिरोधक दवाओं (Contraceptive Medicines) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का सीधा असर लाखों महिलाओं की सेहत, मातृत्व और जीवन पर पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि यह फैसला महिलाओं को एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल रहा है। गर्भनिरोधक साधनों की अनुपलब्धता के कारण कम उम्र में बार-बार गर्भधारण की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे महिलाओं में कुपोषण और अन्य बीमारियां आम हो गई हैं।

तालिबान का फरमान

तालिबान प्रशासन ने हाल ही में आदेश जारी कर पूरे देश में गर्भनिरोधक गोलियां और अन्य birth control उपाय बेचने वाले सभी क्लीनिकों को बंद करने का निर्देश दिया है। इस फरमान के बाद कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर छापेमारी की गई। मेडिकल स्टोर्स से गर्भनिरोधक दवाएं हटवा दी गईं और डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी गई है।

डॉक्टरों को यह साफ कहा गया है कि यदि वे गर्भनिरोधक दवाओं की सलाह देते पाए गए या miscarriage से जुड़ी किसी भी तरह की मदद करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस डर के माहौल में कई डॉक्टर महिलाओं का इलाज करने से भी हिचकने लगे हैं।

महिलाओं की सेहत पर पड़ता गंभीर असर

गर्भनिरोधक दवाओं पर रोक का सबसे बड़ा असर महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य पर दिख रहा है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक अफगानिस्तान में करीब 80 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण (Malnutrition) का शिकार हो रही हैं। बार-बार गर्भधारण के कारण महिलाओं के शरीर को संभलने का समय नहीं मिल पा रहा है।

तालिबान शासन का कठोर फैसला, गर्भनिरोधक दवाओं की बिक्री पर लगाई रोक

महिलाओं में एनीमिया, विटामिन की कमी, कमजोरी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) में भारी इजाफा हो सकता है।

डॉक्टरों के हाथ बंधे, इलाज बना चुनौती

तालिबान के फरमान के बाद मेडिकल प्रोफेशनल्स खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। कई डॉक्टरों का कहना है कि वे जानते हैं कि गर्भनिरोधक साधन महिलाओं के लिए कितने जरूरी हैं, लेकिन डर के कारण वे खुलकर मदद नहीं कर पा रहे।

महिला मरीजों को अक्सर बिना किसी सलाह के घर भेज दिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है, लेकिन तालिबान शासन में विकल्प बेहद सीमित हैं।

नर्सों की भारी कमी

तालिबान के सत्ता में आने के बाद महिलाओं की शिक्षा और काम पर लगाई गई पाबंदियों का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में महिला डॉक्टर और नर्स अस्पतालों से बाहर हो चुकी हैं। कई जगहों पर महिलाओं के इलाज के लिए प्रशिक्षित स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है।

अफगानिस्तान जैसे समाज में जहां महिलाएं पुरुष डॉक्टरों से इलाज कराने में झिझकती हैं, वहां महिला मेडिकल स्टाफ की कमी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसका नतीजा यह है कि महिलाएं अस्पताल जाने के बजाय घर पर ही प्रसव कराने को मजबूर हो रही हैं।

घर पर प्रसव और बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों के डर के कारण घर पर प्रसव (Home Delivery) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बिना प्रशिक्षित दाइयों और मेडिकल उपकरणों के होने वाले प्रसव महिलाओं और नवजात बच्चों दोनों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं।

कई मामलों में समय पर मदद न मिलने से जटिलताएं बढ़ जाती हैं, जिससे मां और बच्चे की जान तक खतरे में पड़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भनिरोधक दवाओं पर रोक इस समस्या को और गंभीर बना देगी।

महिलाओं पर पहले से लगी सख्त पाबंदियां

गर्भनिरोधक दवाओं पर प्रतिबंध कोई अकेला फैसला नहीं है। तालिबान शासन में महिलाओं पर पहले से ही कई तरह की पाबंदियां लागू हैं। शिक्षा से लेकर सार्वजनिक जीवन तक महिलाओं की भूमिका को सीमित कर दिया गया है।

महिलाओं को बिना पुरुष अभिभावक के बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए जाते। दुकानों और विज्ञापनों में महिलाओं की तस्वीरें लगाने पर रोक है। सभी महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और सार्वजनिक जगहों पर बोलने तक से बचने की सलाह दी जाती है।

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