मणिपुर सांसद बिमोल अकोइजाम ने Kuki समूहों से SoO समझौते की समीक्षा की मांग उठाई

मणिपुर के सांसद बिमोल अकोइजाम ने केंद्र से कुकी सशस्त्र समूहों के साथ SoO समझौते की शर्तें और अनुपालन स्थिति सार्वजनिक करने की मांग पर सवाल उठाये है,

मणिपुर के सांसद बिमोल अकोइजाम ने केंद्र से कुकी सशस्त्र समूहों के साथ SoO समझौते की शर्तें और अनुपालन स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कथित वसूली और हिंसा के आरोपों की जांच तथा उल्लंघन साबित होने पर कार्रवाई की अपील की।

इम्फाल: मणिपुर के इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद डॉ. आंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने केंद्र सरकार से कुकी सशस्त्र समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी SoO समझौते की शर्तों और अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए समझौते की निरंतरता की समीक्षा करने और उल्लंघन साबित होने की स्थिति में इसे समाप्त करने पर विचार करने की अपील की। अकोइजाम ने अपने नोटिस में मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी दिको द्वारा लगाए गए एक आरोप का भी उल्लेख किया। आरोप के मुताबिक SoO व्यवस्था के तहत आने वाले KNPF-P नामक संगठन पर छह लियांगमेई नागरिकों के अपहरण और हत्या में कथित संलिप्तता का आरोप है। सांसद ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से SoO समझौते के तहत आने वाले संगठनों की गतिविधियों और उनकी प्रतिबद्धताओं के पालन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

क्या है SoO समझौता?

Suspension of Operations यानी SoO व्यवस्था केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार द्वारा कुछ कुकी-जो सशस्त्र संगठनों के साथ अपनाई गई एक संघर्षविराम व्यवस्था है। इसका उद्देश्य हिंसक गतिविधियों को रोकना, सशस्त्र समूहों को बातचीत की प्रक्रिया में लाना और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना रहा है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित समूहों से हथियारबंद गतिविधियां रोकने और तय नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। इसके बदले सरकार की ओर से बातचीत और निगरानी की व्यवस्था होती है। SoO समझौते के अंतर्गत आने वाले संगठनों को निर्धारित शिविरों में रहने और तय शर्तों का पालन करने की व्यवस्था भी रही है।

हालांकि, मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव और हिंसा के बीच इस समझौते की प्रभावशीलता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। अब इनर मणिपुर के सांसद द्वारा समझौते की शर्तों और अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

छह नागरिकों की हत्या का आरोप

बिमोल अकोइजाम ने अपने लोकसभा नोटिस में मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी दिको के उस कथित आरोप का संदर्भ दिया, जिसमें KNPF-P पर छह लियांगमेई नागरिकों के अपहरण और हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधित संगठन SoO व्यवस्था के दायरे में आने वाला समूह बताया गया है। यदि किसी ऐसे संगठन पर हिंसा या गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आते हैं, तो इससे समझौते की निगरानी और उसके अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

हालांकि, किसी संगठन की जिम्मेदारी या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है। सांसद ने इसी संदर्भ में सरकार से SoO व्यवस्था के तहत संगठनों के आचरण और अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर कथित वसूली का मुद्दा

अकोइजाम ने मणिपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कथित जबरन वसूली और धमकी की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं और इनमें कथित तौर पर SoO समझौते के तहत आने वाले या सरकार के साथ बातचीत में शामिल सशस्त्र समूहों का नाम लिया जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग मणिपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच आवागमन तथा दूसरे राज्यों से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति इन्हीं मार्गों पर काफी हद तक निर्भर रहती है।

यदि राजमार्गों पर वसूली, धमकी या अवरोध की घटनाएं होती हैं, तो इसका सीधा असर परिवहन, कारोबार, ईंधन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ सकता है। सांसद ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि राष्ट्रीय राजमार्ग किसी भी प्रकार की जबरन वसूली, धमकी और अवरोध से मुक्त रहें।

अमित शाह से सार्वजनिक करने की मांग

सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मौजूदा SoO समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने समझौते के तहत आने वाले संगठनों के अनुपालन की स्थिति भी लोगों के सामने रखने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समझौते के तहत शामिल किसी संगठन द्वारा निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया गया है, तो सरकार को उसकी समीक्षा करनी चाहिए। गंभीर उल्लंघन साबित होने की स्थिति में संबंधित समूह के साथ समझौता खत्म करने यानी संभावित रूप से उसे रद्द करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। इस मांग के पीछे मुख्य सवाल यह है कि संघर्षविराम व्यवस्था के तहत शामिल संगठनों की गतिविधियों की निगरानी कितनी प्रभावी है और नियमों के उल्लंघन पर सरकार किस तरह की कार्रवाई करती है।

मणिपुर में पहले से जारी है तनाव

मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा और तनाव से प्रभावित रहा है। इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा। राज्य में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है।

हिंसा के दौरान कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। सड़क संपर्क, व्यापार, शिक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा। सुरक्षा बलों की तैनाती और अलग-अलग पक्षों के बीच बातचीत के प्रयासों के बावजूद स्थिति को पूरी तरह सामान्य बनाने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे माहौल में सशस्त्र समूहों के साथ किसी भी संघर्षविराम या बातचीत की व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

SoO समझौते की निगरानी पर सवाल

बिमोल अकोइजाम की मांग का एक प्रमुख पहलू SoO समझौते की निगरानी और अनुपालन से जुड़ा है। किसी संघर्षविराम समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके नियमों का कितनी गंभीरता से पालन किया जा रहा है और उल्लंघन होने पर कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।

सांसद ने केंद्र से मौजूदा समझौते और उसके अनुपालन की स्थिति को सार्वजनिक करने को कहा है। इससे नागरिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि समझौते के तहत शामिल संगठनों पर क्या शर्तें लागू हैं और उनके पालन की निगरानी किस तरह की जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मांग पर आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा पर जोर

अकोइजाम ने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित रखने की मांग की है। मणिपुर में राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण जीवनरेखा भी हैं। राजमार्गों पर किसी भी प्रकार की वसूली या अवरोध से ट्रक चालकों, व्यापारियों और आम यात्रियों को परेशानी हो सकती है। साथ ही इससे राज्य में आवश्यक वस्तुओं की कीमत और उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।

सांसद ने सरकार से ऐसे कदम उठाने का आग्रह किया है जिनसे राजमार्गों पर बिना डर के यातायात सुनिश्चित हो सके और किसी भी सशस्त्र समूह को जबरन वसूली या धमकी के जरिए गतिविधियां चलाने का अवसर न मिले।

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

बिमोल अकोइजाम की ओर से उठाया गया मुद्दा SoO समझौते की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। उनका आग्रह है कि केंद्र सरकार समझौते की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़े अनुपालन रिकॉर्ड को सार्वजनिक करे तथा कथित उल्लंघनों की निष्पक्ष समीक्षा करे।

यदि किसी समूह पर लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो समझौते की शर्तों के तहत कार्रवाई का सवाल उठेगा। दूसरी ओर, आरोपों की पुष्टि से पहले किसी संगठन को दोषी ठहराने से बचना भी कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलहाल सांसद की मांग के बाद केंद्र सरकार के सामने SoO व्यवस्था की समीक्षा, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और मणिपुर के राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित रखने से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख सामने रखने की चुनौती है।

Leave a comment