मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन शिवलिंग पूजा और पितृ तर्पण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है। काले तिल, गन्ने का रस, आक के फूल, शमी के पत्ते और 108 बिल्व पत्र अर्पित करने की परंपरा इस दिन विशेष रूप से पालन की जाती है।
Margashirsha Amavasya 2025: मार्गशीर्ष अमावस्या इस साल 20 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी और हिंदू धर्म में यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त पितृ तर्पण, दान-पुण्य और भगवान शिव की पूजा करते हैं। खासकर शिवलिंग पर काले तिल, गन्ने का रस, आक के फूल, शमी के पत्ते और 108 बिल्व पत्र अर्पित करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पूजा विधि का पालन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी प्राप्त होता है।
मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 कब है
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 9 नवंबर 2025 की सुबह 9 बजकर 43 मिनट से शुरू हो रही है और 20 नवंबर की दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक समाप्त होगी। अमावस्या का मुख्य दिन इस बार 20 नवंबर, गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन सूर्य और चंद्र की स्थिति विशेष होने के कारण पितृ तर्पण और शिवलिंग पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

शिवलिंग पर अर्पित करने योग्य चीजें
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि इन चीजों को अर्पित करने से पितृ दोष शांत होता है और व्यक्ति की किस्मत चमक उठती है।
- काले तिल और जल: इस दिन शिवलिंग पर काले तिल मिलाकर जल अर्पित करना चाहिए। अर्पण करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना अनिवार्य है। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- गन्ने का रस या गुड़: शिवलिंग पर गन्ने का रस अर्पित करना भी शुभ माना गया है। अगर गन्ने का रस उपलब्ध न हो तो सादे जल में थोड़ा गुड़ मिलाकर अर्पित किया जा सकता है। ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और धन की प्राप्ति में वृद्धि होती है।
- आक के फूल: आक के फूल शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है। ये फूल अमावस्या के दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
- शमी के पत्ते: शिवलिंग पर शमी के पत्ते अर्पित करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ ग्रहों के प्रभाव में कमी आती है। यह उपाय ग्रह दोषों से बचाव में मदद करता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
- 108 बिल्व पत्र और शहद: 108 बिल्व पत्रों का अर्पण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बाद शहद की पतली धारा से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
दान-पुण्य और पितृ तर्पण का महत्व
मार्गशीर्ष अमावस्या केवल शिवलिंग पूजा तक सीमित नहीं है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। पितृ तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन किए गए दान से भी जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है।
पूजा की तैयारी और विधि
इस दिन पूजा की तैयारी सरल लेकिन विधिपूर्वक होनी चाहिए। सबसे पहले शिवलिंग को स्वच्छ जल से धोकर साफ करें। इसके बाद काले तिल, गन्ने का रस या गुड़, आक के फूल, शमी के पत्ते और 108 बिल्व पत्रों का अर्पण करें। पूजा करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप नियमित रूप से करें। शहद की पतली धारा से अभिषेक करने के बाद दीप प्रज्वलित करें और भगवान शिव से आशीर्वाद लें।
शिवलिंग पूजा का आध्यात्मिक लाभ
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन की गई शिवलिंग पूजा से व्यक्ति के जीवन में नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। इसके अलावा यह पूजा मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक स्थिरता और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
विशेष टिप्स और सावधानियां
- पूजा में हमेशा साफ और शुद्ध सामग्री का उपयोग करें।
- शिवलिंग की सफाई के लिए स्वच्छ जल का इस्तेमाल करें।
- पूजा के दौरान मानसिक शुद्धि और ध्यान बनाए रखें।
- अगर आक के फूल उपलब्ध न हों तो अन्य पवित्र फूलों का प्रयोग किया जा सकता है।
- पूजा के बाद किए गए दान से परिवार और समाज के कल्याण में योगदान करें।











