मेरठ: सपा नेता और किसान नेता दिग्विजय भाटी की पुलिस हिरासत में कथित पिटाई और प्रताड़ना के मामले ने मेरठ पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। भाटी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें अपमानित करने के लिए ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना बजाकर जबरन नचाया। मामले में नए SSP के कार्यभार संभालने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी/इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि दिग्विजय भाटी और किसान नेता मोहित जाटव ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों का कहना था कि उनके साथ पुलिस कार्यालय और SOG कार्यालय में मारपीट की गई। आरोपों के सामने आने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा और सपा नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
दिग्विजय भाटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें और उनके साथी को काफी देर तक पीटा। उनके मुताबिक, मारपीट के दौरान जूते, लात-घूंसे और लाठियों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उन्हें SOG कार्यालय ले जाया गया, जहां भी कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई।
सबसे ज्यादा चर्चा उस आरोप की हुई जिसमें भाटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल पर ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना बजाया और उन्हें उस पर नाचने के लिए मजबूर किया। उन्होंने दावा किया कि वह मारपीट के कारण ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे, फिर भी उन्हें नाचने के लिए कहा गया। उनके अनुसार, एक बार नाचने के बाद पुलिसकर्मी ने दोबारा नाचने को कहा।
भाटी के आरोपों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों का रवैया बेहद अमानवीय था। उन्होंने दावा किया कि विरोध करने और हाथ जोड़ने के बावजूद उनकी कथित पिटाई जारी रही। इस दौरान उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया।
मामला सामने आने के बाद मेरठ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। सपा विधायक अतुल प्रधान ने भी भाटी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। मामले को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच पुलिस विभाग ने जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
इसी बीच मेरठ के तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय का तबादला कर उन्हें पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किए जाने की कार्रवाई भी हुई। इसके बाद नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति ने कार्यभार संभाला और मामले में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की। नए SSP के आने के बाद इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर किया गया है।
हालांकि, पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों का एक अलग पक्ष भी सामने आया है। पुलिस ने कथित तौर पर इन आरोपों को निराधार बताया था और दावा किया था कि दोनों की चोटें स्कूटी से गिरने के कारण आई थीं। ऐसे में अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और चोटों की वास्तविक वजह क्या थी।
मामले की जांच मेरठ के ADG भानु भास्कर के निर्देश पर सहारनपुर DIG अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर आरोपों और पुलिस के दावों की सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच में यह देखा जा सकता है कि दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को कब और किस मामले में हिरासत में लिया गया था। उन्हें किस अधिकारी के निर्देश पर SOG के हवाले किया गया, वहां कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे और हिरासत के दौरान उनके साथ क्या व्यवहार किया गया—इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा पुलिस कार्यालय और SOG कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी जांच में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि घटना के दौरान कैमरे सक्रिय थे तो फुटेज से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दोनों नेताओं के साथ क्या हुआ। इसी तरह मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें पैर बांधकर उल्टा लटकाया और तलवों, कमर तथा पीठ पर लाठियों से पीटा। उन्होंने आंख और शरीर पर चोट लगने का भी दावा किया। सामने आई तस्वीरों में उनकी आंख के आसपास सूजन और चोट के निशान होने की बात कही गई है। इन चोटों की मेडिकल रिपोर्ट भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है।
पुलिस विभाग की ओर से आठ पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर किया जाना इस मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। लाइनहाजिर किए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी पुलिसकर्मी आरोपों में दोषी साबित हो गए हैं। विभागीय और स्वतंत्र जांच के बाद ही किसी की जिम्मेदारी और कथित भूमिका स्पष्ट होगी।
इस पूरे मामले में सपा नेताओं ने पुलिस पर राजनीतिक दबाव बनाने और बदले की कार्रवाई के आरोप भी लगाए हैं। दूसरी ओर पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड और घटना की परिस्थितियों का हवाला दिया गया है। इसलिए जांच के दौरान दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों को आमने-सामने रखकर देखा जाएगा।
नए SSP के स्तर से हुई कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी संदेश गया है कि हिरासत में किसी व्यक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही निकलेगा।
इस मामले ने एक बार फिर हिरासत में पूछताछ के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और पूछताछ के अधिकार के साथ-साथ हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा भी पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि जांच में मारपीट या अमानवीय व्यवहार की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर आगे विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल मेरठ पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष जांच पूरी करना है। एक तरफ सपा नेता गंभीर आरोप लगा रहे हैं, दूसरी ओर पुलिस ने आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट, CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य पूरे मामले की तस्वीर साफ करने में अहम होंगे।
‘चोली के पीछे क्या है’ गाने पर जबरन नचाने का आरोप इस मामले का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके पीछे लगे मारपीट और हिरासत में प्रताड़ना के आरोप उससे कहीं ज्यादा गंभीर हैं। नए SSP द्वारा इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर किए जाने के बाद अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि सपा नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।