मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने तुरा में शिक्षा सुधारों को बढ़ावा देने के लिए CM LEAD Fellowship और MBOSE E-Office सिस्टम लॉन्च किया। कार्यक्रम में SSA शिक्षकों को सम्मानित किया गया और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता व नवाचार पर जोर दिया गया।
शिलांग: मेघालय सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने शनिवार को तुरा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कई नई शिक्षा सुधार योजनाओं की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान और नेतृत्व के लिए सम्मानित भी किया गया।
ऑल गारो हिल्स SSA स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (AGHSSASTA-CB) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षा अधिकारी, सामुदायिक नेता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन तुरा के माचाकोलग्रे एलपी स्कूल मैदान में किया गया, जहां पूरे गारो हिल्स क्षेत्र से लोग पहुंचे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने डिजिटल प्रशासन, शिक्षा सुधार और शिक्षक कल्याण से जुड़ी कई नई पहलों की शुरुआत की, जिन्हें मेघालय के शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
MBOSE E-Office सिस्टम लॉन्च, पारदर्शिता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने MBOSE E-Office Management and Accounting System लॉन्च किया। इस डिजिटल प्रणाली का उद्देश्य शिक्षा प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना और वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करना है।
सरकार का मानना है कि इस तकनीक आधारित प्रणाली के जरिए स्कूल प्रशासन, लेखा प्रबंधन और दस्तावेजों की निगरानी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में यह कदम शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।
CM LEAD Fellowship की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान “Chief Minister’s Leadership in Education and Development (CM LEAD) Fellowship” की भी शुरुआत की।
इस योजना का उद्देश्य युवाओं और पेशेवरों को शिक्षा सुधार अभियानों से जोड़ना है। इसके तहत चयनित युवा प्रोफेशनल्स मेघालय के 12 जिलों में शिक्षा सुधार, नवाचार और प्रशासनिक सहयोग के लिए काम करेंगे।
सरकार का मानना है कि नई पीढ़ी की भागीदारी से शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक सोच, तकनीकी समाधान और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सुधार केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, शिक्षकों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
शिक्षा अधिकारियों के लिए 27 वाहनों को हरी झंडी
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की जमीनी निगरानी को मजबूत करने के लिए 27 नए वाहनों को भी हरी झंडी दिखाई गई।
इन वाहनों का इस्तेमाल शिक्षा अधिकारियों और निरीक्षण टीमों द्वारा ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग बेहतर होगी और शिक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
मेघालय जैसे पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिक्षकों के योगदान की सराहना
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने अपने संबोधन में SSA शिक्षकों के योगदान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन अक्सर उनके योगदान को पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती।
उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “आप केवल बच्चों को पढ़ाते नहीं हैं, बल्कि भविष्य का निर्माण करते हैं। राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।”
मुख्यमंत्री ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा को भी याद किया और कहा कि उन्होंने जीवनभर शिक्षा को सामाजिक विकास का सबसे मजबूत माध्यम माना।
रटने की बजाय अवधारणात्मक शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में केवल रटने पर आधारित पढ़ाई से आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में अवधारणात्मक समझ, रचनात्मक सोच और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा सुधार आसान नहीं होते, लेकिन यदि हम आने वाली पीढ़ियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना चाहते हैं, तो हमें शिक्षण पद्धति में बदलाव लाना होगा।”
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान दें और शिक्षा को केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित न रखें।
SSA शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का भरोसा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने SSA शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की चुनौतियां केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनके कार्य वातावरण को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब शिक्षक सम्मान और आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।
SSLC परिणामों में सुधार पर खुशी
मुख्यमंत्री ने मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (MBOSE) और शिक्षा विभाग को हालिया SSLC परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न शैक्षणिक पहलों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से “CM IMPACT Guidebooks” का उल्लेख किया, जिन्हें छात्रों की तैयारी बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में मेघालय शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
शिक्षा विभाग ने बताई सरकार की रणनीति
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव विजय कुमार मंत्रि ने भी संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, सुशासन और तकनीक आधारित सुधारों को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा आधारित मॉनिटरिंग और प्रशासनिक सुधारों के जरिए शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
ऑल गारो हिल्स SSA स्कूल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लाबिंगस्टोन जी. मोमिन ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षक कल्याण और शिक्षा क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता देना सराहनीय है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भविष्य में भी शिक्षकों की समस्याओं और शिक्षा सुधारों पर इसी तरह गंभीरता से काम करती रहेगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की रौनक
कार्यक्रम के दौरान गारो हिल्स की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी देखने को मिली।
SSA शिक्षकों और स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक वांगला नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
इस सांस्कृतिक आयोजन ने कार्यक्रम को केवल प्रशासनिक समारोह नहीं, बल्कि सामुदायिक उत्सव का रूप दे दिया।
मेघालय में शिक्षा क्षेत्र के लिए नया संदेश
तुरा में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने मेघालय में शिक्षा सुधारों के लिए सरकार की नई दिशा और प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शिता और युवाओं की भागीदारी पर इसी तरह जोर दिया गया, तो मेघालय आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा सुधारों का मॉडल बन सकता है।
कार्यक्रम का समापन प्रार्थना, धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक आशीर्वचन के साथ हुआ, जहां सभी ने राज्य में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।










