मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष से वैश्विक तेल बाजार में उछाल आया है। बढ़ती कीमतों के कारण रूस को तेल निर्यात से बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उसे अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है।
Russia: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। इस युद्ध को शुरू हुए करीब 17 दिन हो चुके हैं और इसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है। जहां कई देश इस संकट से परेशान हैं, वहीं रूस के लिए यह स्थिति एक तरह से “आपदा में अवसर” साबित होती नजर आ रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से रूस को बड़ा आर्थिक लाभ हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रूस को हर दिन करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट
मिडिल ईस्ट के मौजूदा संघर्ष में सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की हो रही है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इसके कारण कई देशों को तेल आयात के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
इस स्थिति का फायदा रूस उठा रहा है। जब मिडिल ईस्ट के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ा, तो कई देशों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य सप्लायर्स की ओर रुख किया। इसी दौरान रूस के तेल की मांग में तेजी आई है।
रूस के तेल निर्यात में तेज बढ़ोतरी
रूस पहले से ही दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल है। हालांकि 2022 में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया था और उसके तेल निर्यात पर भी असर पड़ा था। लेकिन अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने रूस को एक नया मौका दे दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस इस समय दुनिया के कई देशों को तेल बेच रहा है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से रूस को हर दिन करीब 150 मिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त बजटीय राजस्व मिल रहा है।
यूराल क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल
रूस के प्रमुख तेल ब्रांड यूराल क्रूड की कीमतों में भी इस दौरान बड़ी बढ़ोतरी हुई है। कुछ महीने पहले तक यह तेल करीब 52 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था। लेकिन मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद इसकी कीमत बढ़कर लगभग 70 से 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी रूस के लिए सीधे तौर पर आर्थिक लाभ का कारण बन रही है। तेल की कीमतों में इस तेजी का मतलब है कि रूस को अपने निर्यात से पहले की तुलना में कहीं ज्यादा पैसा मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के पहले 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से बड़ी कमाई कर ली। अनुमान है कि इस दौरान रूस को 1.3 बिलियन डॉलर से 1.9 बिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त कर राजस्व मिला।
महीने के अंत तक बढ़ सकता है रूस का राजस्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ बनाए रखता है और तेल टैंकरों की आवाजाही सीमित रहती है, तो इस महीने के अंत तक रूस को 3.3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
अमेरिका का फैसला और यूक्रेन की नाराजगी
अमेरिका ने ईरान युद्ध के दौरान रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट देने का फैसला किया है। इससे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों को कमजोर करना सही नहीं है। हालांकि विरोध के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल इस छूट को बरकरार रखा है। इस फैसले से भी रूस को तेल निर्यात में फायदा मिल सकता है।







