ममता मोहनदास: फ्लॉप डेब्यू और दो बार कैंसर... हौसले की मिसाल बनी ‘महाराजा’ की हीरोइन

‘महाराजा’ की हीरोइन ममता मोहनदास ने फ्लॉप डेब्यू और दो बार कैंसर जैसी मुश्किलों के बावजूद हौसले की मिसाल कायम की। पूरी कहानी पढ़ें। पर्सनल लाइफ और टूटी शादी

टीवी और सिनेमा की दुनिया में कुछ कलाकारों के लिए सफलता आसान होती है, तो कुछ को इसके लिए जीवनभर संघर्ष करना पड़ता है। इन कठिनाइयों के बावजूद कुछ सितारे अपनी मेहनत और हौसले से खुद को साबित कर लेते हैं। 

एंटरटेनमेंट न्यूज़: सभी स्टार्स को इतनी किस्मत नहीं मिलती कि उन्हें किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म में लीड रोल करके धमाकेदार शुरुआत करने का मौका मिले। कई एक्टर्स मामूली रोल्स से अपना करियर शुरू करते हैं, कुछ को बॉक्स ऑफिस पर असफलताओं का सामना करना पड़ता है, और कुछ एक्टर्स अपनी एक्टिंग की कमी के लिए कड़ी आलोचना का शिकार होते हैं। 

मोहनलाल जैसे कुछ भाग्यशाली कलाकारों ने न केवल अपनी पहली फिल्म ‘मंजिल विरिंजा पूक्कल’ (1980) में बड़ा रोल किया, बल्कि फिल्म को जबरदस्त हिट होते देखा और अपने अभिनय के लिए तारीफें भी पाईं। वहीं, फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत की अहम भूमिका का उदाहरण एक्ट्रेस और प्लेबैक सिंगर ममता मोहनदास की पहली फिल्म भी है।

बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में फ्लॉप डेब्यू

ममता मोहनदास का जन्म बहरीन में हुआ और उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए भारत का रुख किया। मात्र 21 साल की उम्र में उन्हें टी हरिहरन की निर्देशित फिल्म ‘मयूखम’ (2005) में लीड रोल ऑफर हुआ। हरिहरन मलयालम सिनेमा के बड़े फिल्मकार हैं, जिन्होंने ‘पंचाग्नि’, ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’ जैसी हिट फिल्में दी हैं।

हालांकि, ‘मयूखम’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, लेकिन ममता की एक्टिंग को सराहा गया। इसके बाद उन्हें लगातार ऑफर मिलने लगे, जिनमें ‘बस कंडक्टर’ (2005), ‘लंका’ (2006), ‘बाबा कल्याणी’ (2006) शामिल हैं। लेकिन इनमें से किसी फिल्म से उन्हें वह लोकप्रियता नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।असली पहचान उन्हें ममूटी की ऐतिहासिक फिल्म ‘बिग बी’ (2007) से मिली। इसके बाद भी उन्हें लगातार अभिनय के बड़े ऑफर नहीं मिले, लेकिन उनके करियर की राह खुलती रही।

सिंगिंग में भी मिली सफलता, कैंसर से दो बार जंग

एक बहु-प्रतिभाशाली कलाकार होने के नाते ममता ने सिंगिंग में भी हाथ आजमाया। तेलुगू, तमिल और मलयालम फिल्मों में गाने गाए, और थलपति विजय की फिल्म ‘विल्लू’ (2009) का ब्लॉकबस्टर गाना ‘डैडी मम्मी’ उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने कई हिट गाने गाए और साउथ इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।

ममता का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। उन्हें दो बार कैंसर हुआ। पहली बार 2009 में हॉजकिन लिंफोमा का पता चला। उन्होंने तुरंत इलाज कराया और डेढ़ साल बाद कैंसर मुक्त हो गईं। लेकिन 2013 में उन्हें बोन मैरो ट्रांसप्लांट असफलता के कारण कैंसर फिर से हो गया। इसके बावजूद ममता ने हार नहीं मानी और लॉस एंजेल्स में इलाज करवाया। 

2023 में उन्हें विटिलिगो नाम की ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला, जिससे त्वचा का रंग फीका पड़ने लगा। इसके बावजूद ममता ने अपने फैंस के लिए सोशल मीडिया पर सकारात्मक संदेश साझा किया।

पर्सनल लाइफ और टूटी शादी

नवंबर 2011 में ममता ने अपने बचपन के दोस्त प्रेगिथ पद्मनाभन से शादी की। लेकिन शादी अधिक समय तक नहीं चली और एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए। तलाक के बाद भी ममता ने अपने जीवन में हिम्मत और हौसला बनाए रखा। ममता मोहनदास विवादों से भी अछूती नहीं रहीं। यौन उत्पीड़न मामले में उनके बयान ने उन्हें आलोचनाओं का सामना कराना पड़ा। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने बयान दिया कि कभी-कभी पीड़ित खुद भी ऐसी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार होती हैं। इस बयान को लेकर उन्हें काफी प्रतिक्रिया मिली।

ममता ने कैंसर के बाद 45 फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में ‘महाराजा’, ‘ओट्टा’, ‘बांद्रा’, ‘जण गन मन’, ‘थिरप्पू’, ‘लालबाग’ जैसी हिट फिल्में शामिल हैं। उनके अभिनय की आलोचना के बावजूद उनकी मेहनत और समर्पण को हमेशा सराहा गया। फिलहाल ममता ‘माय डियर सिस्टर’ नामक फिल्म पर काम कर रही हैं।

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