अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और डायबिटीज का कनेक्शन, नेपाल की रिसर्च से नई जानकारी

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और डायबिटीज का कनेक्शन, नेपाल की रिसर्च से नई जानकारी

नेपाल में ग्लासगो विश्वविद्यालय के नेतृत्व में CoDIAPREM परियोजना शुरू हुई है, जो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और उच्च कैलोरी वाले आहार के टाइप-2 डायबिटीज पर प्रभाव को जांचेगी। स्टडी 2026 से 2030 तक चलेगी और पारंपरिक आहार अपनाकर रोग की रोकथाम और रिमिशन संभव है या नहीं, यह पता लगाएगी। रिसर्च दक्षिण एशिया में कम लागत वाले समाधान पेश कर सकती है।

CoDIAPREM Project: नेपाल में ग्लासगो विश्वविद्यालय ने 2026 से 2030 तक चलने वाली चार वर्षीय स्टडी शुरू की है, जिसमें यह देखा जाएगा कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और उच्च कैलोरी वाले फूड्स टाइप-2 डायबिटीज बढ़ा रहे हैं या नहीं। इस परियोजना में स्थानीय स्वयंसेवकों और अस्पतालों के सहयोग से पारंपरिक आहार अपनाने का प्रभाव मापा जाएगा। इसका उद्देश्य रोग की रोकथाम, रिमिशन और वजन नियंत्रण के जरिए स्वास्थ्य सुधार करना है। परियोजना हॉवर्ड फाउंडेशन से 17.8 लाख पाउंड की फंडिंग के साथ संचालित की जाएगी।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और डायबिटीज का खतरा

नेपाल में ग्लासगो विश्वविद्यालय के नेतृत्व में शुरू हुई CoDIAPREM परियोजना यह जांचेगी कि क्या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ टाइप-2 डायबिटीज बढ़ाने में जिम्मेदार हैं। रिसर्च का उद्देश्य पारंपरिक आहार अपनाकर इस बीमारी को रोकना या उलटना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वजन कम करना और प्रोसेस्ड फूड कम करना कम लागत वाला प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।

नेपाल में टाइप-2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रहा है, विशेषकर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में। पिछले कुछ दशकों में प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन और वजन बढ़ने के कारण बीमारी के मामले बढ़े हैं। CoDIAPREM परियोजना 2026 से 2030 तक चलेगी और इसे हॉवर्ड फाउंडेशन से 17.8 लाख पाउंड की फंडिंग मिली है।

रिसर्च में क्या होगा

इस चार वर्षीय स्टडी में समुदाय स्तर पर स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से पारंपरिक आहार अपनाने का प्रभाव जांचा जाएगा। यह देखा जाएगा कि क्या लोग बिना दवा के लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल कर सकते हैं, नई डायबिटीज के मामले कम हो सकते हैं और वजन घटाने से रिमिशन संभव है। शुरुआती पायलट स्टडी ने कम लागत में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।

वैज्ञानिक और वैश्विक संदर्भ

रिसर्च अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, मोटापे और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध पर आधारित है। WHO और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार अतिरिक्त शरीर की चर्बी लीवर और पैंक्रियास जैसे अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है और ब्लड शुगर कंट्रोल बिगाड़ती है।

CoDIAPREM परियोजना दक्षिण एशिया में डायबिटीज रोकथाम और रिमिशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह रिसर्च कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी रणनीतियां पेश कर सकती है।

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