मोतीपुर चीनी मिल खुलने की उम्मीद से बढ़ेगी गन्ने की खेती, मुजफ्फरपुर के 5 प्रखंडों में लौटेगी रौनक

मोतीपुर चीनी मिल के संभावित पुनः संचालन से मुजफ्फरपुर के 5 प्रखंडों में गन्ने की खेती बढ़ाने की तैयारी है। 60 लाख से 2 आधुनिक नर्सरियां बनेंगी।

मोतीपुर चीनी मिल दोबारा शुरू होने की उम्मीद से मुजफ्फरपुर में गन्ने की खेती बढ़ाने की तैयारी है। पांच प्रखंडों में खेती विस्तार की योजना के साथ दो आधुनिक नर्सरियों में सालाना पांच लाख पौधे तैयार होंगे।

मुजफ्फरपुर: मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की कवायद के बीच जिले में गन्ने की खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल 124 गांवों में करीब 650 किसान गन्ना उगा रहे हैं। मिल चालू होने पर मड़वन, पारू, बंदरा, बोचहां और कुढ़नी में भी खेती विस्तार की योजना है। इसके लिए मीनापुर में दो आधुनिक नर्सरियां विकसित की जाएंगी।

पांच प्रखंडों में फिर बढ़ेगा गन्ने का रकबा

मोतीपुर चीनी मिल के दोबारा संचालन की उम्मीद ने मुजफ्फरपुर जिले के गन्ना किसानों में उत्साह बढ़ाया है। मिल के बंद होने के बाद जिन क्षेत्रों में गन्ने की खेती का रकबा कम हो गया था, वहां दोबारा खेती को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है।

मोतीपुर चीनी मिल खुलने की उम्मीद से बढ़ेगी गन्ने की खेती, मुजफ्फरपुर के 5 प्रखंडों में लौटेगी रौनक

फिलहाल जिले के 124 गांवों में करीब 650 किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। इनमें मीनापुर के छह, कांटी के 20, मोतीपुर के 46 और साहेबगंज के 52 गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादित गन्ना वर्तमान में सिथवलिया चीनी मिल भेजा जा रहा है।

मोतीपुर चीनी मिल के चालू होने के बाद मड़वन, पारू, बंदरा, बोचहां और कुढ़नी प्रखंडों में भी गन्ने की खेती का विस्तार करने की योजना है। इन इलाकों में पहले बड़े स्तर पर गन्ने की खेती होती थी, लेकिन मिल बंद होने के बाद किसानों ने इसका रकबा घटा दिया।

किसान ने 20 एकड़ में खेती की तैयारी की

रोशनपुर के किसान सत्यम कुमार फिलहाल 10 एकड़ जमीन में गन्ने की खेती कर रहे हैं। मोतीपुर चीनी मिल के दोबारा शुरू होने की उम्मीद के बीच उन्होंने इस वर्ष अपना खेती का रकबा बढ़ाकर 20 एकड़ करने की तैयारी की है।

सत्यम कुमार के अनुसार, 1998 के बाद मोतीपुर मिल के संचालन में दिक्कत आने लगी थी। इसके बाद किसान रीगा मिल को गन्ना भेजते थे। वर्ष 2012 से उनके क्षेत्र का गन्ना सिथवलिया चीनी मिल भेजा जा रहा है।

गांव में रूपेश कुमार के अलावा किशुनगर के राजीव पांडेय और मनीष पांडेय भी नियमित रूप से गन्ने की खेती कर रहे हैं। मिल दोबारा खुलने की संभावना से किसानों को स्थानीय स्तर पर गन्ने की बिक्री की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

60 लाख रुपये से बनेंगी दो आधुनिक नर्सरियां

गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए मीनापुर में दो आधुनिक गन्ना नर्सरियां विकसित की जाएंगी। इसके लिए झिटकहियां के किसान किशोर कुमार सिंह और प्रसाद गांव के किसान पंकज कुमार का चयन किया गया है।

दोनों किसानों के यहां करीब 8-8 हजार वर्गफीट क्षेत्र में नर्सरी विकसित की जाएगी। प्रत्येक नर्सरी पर करीब 30 लाख रुपये खर्च होने हैं। सरकार की ओर से परियोजना लागत का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

दोनों नर्सरियों से हर साल करीब पांच लाख गन्ने के पौधे तैयार होने की उम्मीद है। एक एकड़ में करीब 10 हजार पौधों की जरूरत होती है। इस हिसाब से नर्सरियों से हर वर्ष करीब 20 से 25 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिल सकता है।

अक्टूबर से शीतकालीन गन्ने की खेती शुरू करने की तैयारी है। इससे आने वाले समय में जिले में गन्ने की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन की हुई पैमाइश

मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया के तहत मिल की जमीन से जुड़े काम भी आगे बढ़ रहे हैं। इंडियन पोटाश लिमिटेड यानी IPL को लीज पर दी गई मिल की 266 एकड़ जमीन की पैमाइश और सीमांकन पूरा कर लिया गया है।

पैमाइश के दौरान करीब 51 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण पाया गया, जबकि 215 एकड़ जमीन खाली मिली। पांच मौजा में फैली जमीन का सीमांकन 17 अमीनों की टीम ने किया।

बखरा मौजा में 28.58 एकड़ जमीन पर पक्का निर्माण, दुकानें और अन्य तरह के कब्जे मिले हैं। बरियारपुर में 114.57 एकड़ में से 96.48 एकड़ जमीन खाली मिली। वहीं, पचरूखी में आठ एकड़ में करीब 7.3 एकड़ जमीन खाली पाई गई।

अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी

मिल की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कवायद भी चल रही है। इसी बीच रीगा चीनी मिल का संचालन कर रही कर्नाटक की निरानी शुगर्स लिमिटेड के संचालक मरुगेश आर. निरानी की टीम ने हाल में मोतीपुर चीनी मिल परिसर का निरीक्षण किया।

अधिकारियों के अनुसार, गन्ने की खेती का विस्तार मिल के संभावित पुनः संचालन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नर्सरियों के जरिए किसानों को गन्ने के पौधे उपलब्ध कराने और खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

मोतीपुर मिल के दोबारा शुरू होने से जिले के पांच अन्य प्रखंडों में गन्ने की खेती को गति मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार उपलब्ध होने के साथ जिले में चीनी उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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