मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस, विपक्ष का आरोप; CEC ने सवालों पर चुप्पी साधी

विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया है। विवाद के बीच CEC ने सवालों का जवाब देने से इंकार किया। जानें पूरा मामला और ताजा

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) Gyanesh Kumar ने रविवार को विपक्ष द्वारा संसद में उन्हें पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। 

नई दिल्ली: भारत में राजनीतिक हलचल तेज होती दिख रही है, क्योंकि विपक्षी दलों ने संसद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए नोटिस प्रस्तुत किया है। यह कदम राजनीतिक विवाद और चुनावी प्रक्रियाओं पर बढ़ते सवालों के बीच आया है। हालांकि, ज्ञानेश कुमार ने रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस नोटिस पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सीधे तौर पर विपक्ष के नोटिस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उनका यह रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एक साथ नोटिस देकर CEC को हटाने का प्रस्ताव पेश किया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया

भारत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल संसद के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, चुनाव आयुक्तों को केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर सीईसी द्वारा हटाया जा सकता है। इसलिए, इस तरह का कदम राजनीतिक और कानूनी रूप से काफी जटिल होता है। विपक्ष के नोटिस के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये की जांच करना है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक प्रणाली की ताकत को परखने का एक उदाहरण है, क्योंकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता भारत में लोकतांत्रिक चुनावों की रीढ़ मानी जाती है।

विपक्ष के आरोप

विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार पर कई मौकों पर सत्ताधारी भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया है। विशेष रूप से मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान विपक्ष का दावा है कि आयोग ने पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए। इसके परिणामस्वरूप विपक्ष ने संसद में नोटिस देकर CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में नोटिस जमा कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह कदम कानून के पालन में उठाया गया है ताकि संसद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। अगला कदम इस मामले की जांच के लिए समिति का गठन करना होगा।

इस कदम के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव दोनों हैं। भारत में चुनाव आयोग की निष्पक्षता लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है। यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संसद में प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह भारत में चुनावी स्वतंत्रता और संवैधानिक ढांचे पर गहरा असर डाल सकता है।

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