मुंबई के BKC इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी के पास फर्जी PMO पहचान पत्र मिला, जबकि उसके साथ मौजूद बॉडीगार्ड के पास बंदूक बरामद हुई।
BKC में कार्यक्रम से पहले पुलिस की कार्रवाई
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी BKC इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मुंबई पुलिस ने नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर यानी NMACC से दो संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बताया था। सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास मौजूद पहचान पत्र को फर्जी पाया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और उसके साथ मौजूद बॉडीगार्ड को भी गिरफ्तार किया।
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, बॉडीगार्ड के पास एक बंदूक बरामद हुई है। हथियार का लाइसेंस वैध पाया गया है। हालांकि, कार्यक्रम स्थल पर हथियार और फर्जी सरकारी पहचान पत्र के साथ पहुंचने के पीछे आरोपियों का वास्तविक मकसद क्या था, इसकी जांच अभी जारी है।
आरोपी ने खुद को PMO अधिकारी बताया
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में हुई है। वह मुंबई के खार इलाके का रहने वाला बताया गया है। उसके पिता का नाम प्रेमल पारिख बताया गया है।
मुंबई पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख 7 सितंबर को कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र लेकर कार्यक्रम स्थल के अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान सुरक्षा जांच में पुलिस की नजर उस पर पड़ी। जांच के दौरान उसके पास मिले पहचान पत्र संदिग्ध पाए गए।
इसके बाद BKC पुलिस थाने में आरोपी और उसके साथ मौजूद बॉडीगार्ड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले की आगे की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है।
बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक
पुलिस के अनुसार, रोहन पारेख के साथ मौजूद व्यक्ति की पहचान दिलीप कुंदे के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है। पुलिस ने उसके पास से बंदूक बरामद की।
पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हथियार का लाइसेंस वैध है। इसके बावजूद हथियार लेकर उस स्थान पर पहुंचने और संदिग्ध पहचान पत्र के इस्तेमाल की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
मुंबई पुलिस ने बताया कि जिस स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम प्रस्तावित था, वहां दो लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से एक व्यक्ति खुद को PMO अधिकारी बता रहा था और दूसरे के पास बंदूक थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी पहचान पत्र किसने तैयार किया, उसका इस्तेमाल क्यों किया गया और आरोपियों का कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने का उद्देश्य क्या था।
आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया
गिरफ्तारी के बाद CIU यूनिट आरोपियों को कोर्ट लेकर पहुंची। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि रोहन पारेख कथित तौर पर कार्यक्रम स्थल के आसपास पहले से मौजूद था और एक रात पहले ही वहां पहुंच गया था।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान आरोपी की ओर से उसके वकील ने अलग पक्ष रखा। वकील के मुताबिक, रोहन को PMO के एक एडिशनल सेक्रेटरी के नाम से एक ईमेल प्राप्त हुआ था। हालांकि, इस ईमेल की वास्तविकता और वैधता की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कोर्ट ने आरोपी से जुड़े मामले में कार्यक्रम के प्रोटोकॉल और PMO कार्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए। आरोपी के वकील के अनुसार, रोहन ने कार्यक्रम से एक दिन पहले आयोजन स्थल के पास जाकर कुछ सामान भी खरीदा था।
आरोपी ने खुद को बताया पीड़ित
मामले में आरोपी रोहन पारेख ने खुद को पीड़ित बताया है। उसके दावे के अनुसार, उसे PMO के नाम पर किसी तरुण नाम के व्यक्ति ने फर्जी ईमेल भेजा था।
आरोपी पक्ष का कहना है कि रोहन को जो जानकारी मिली, वह कथित तौर पर PMO से जुड़ी हुई प्रतीत होती थी। हालांकि, इस दावे की सत्यता अभी जांच का विषय है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ईमेल किसने भेजा और क्या इसका संबंध फर्जी पहचान पत्र से है।
मामले में एक तीसरे व्यक्ति का भी नाम सामने आया है। उसकी पहचान प्रथमेश बागूर के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वह रोहन पारेख का दोस्त है और फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
तीन लोगों के जबरन प्रवेश का आरोप
मुंबई पुलिस के अनुसार, मामले में आरोप है कि तीन लोगों ने एक संदिग्ध सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल किया और हथियार के साथ मॉल की सुरक्षा व्यवस्था पार करते हुए BKC स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश किया।
पुलिस ने सरकारी कर्मचारी होने का कथित रूप से नाटक करने और हथियार के साथ गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने सहित भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार हथियार का लाइसेंस वैध पाया गया है। इस मामले में फिलहाल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश जारी है।
PM मोदी का मुंबई कार्यक्रम
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई के BKC स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन करने वाले थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का संबोधन भी प्रस्तावित था।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल की सुरक्षा को लेकर व्यापक व्यवस्था की गई थी। ऐसे में फर्जी PMO पहचान पत्र के साथ कथित प्रवेश की कोशिश और हथियार की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है।
हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी में आरोपियों के किसी आतंकी संगठन या अन्य आपराधिक नेटवर्क से संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले उनके उद्देश्य को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
11 सितंबर तक पुलिस हिरासत
मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। इस दौरान जांच एजेंसियां फर्जी पहचान पत्र, कथित ईमेल, कार्यक्रम स्थल में प्रवेश की कोशिश और हथियार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेंगी।
पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि PMO अधिकारी के रूप में पहचान स्थापित करने के लिए फर्जी दस्तावेज किस उद्देश्य से तैयार किए गए थे। इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच रही है कि कथित ईमेल और फर्जी पहचान पत्र के पीछे कौन लोग हैं तथा फरार बताए जा रहे तीसरे आरोपी की इसमें क्या भूमिका है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही घटनाक्रम के पीछे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।










