गया-नगर परिषद (नपं) की हालिया बोर्ड बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब कई पार्षदों ने प्रशासन और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगा दिए। बैठक का माहौल अचानक गर्म हो गया और देखते ही देखते बहस तीखी नोकझोंक में बदल गई।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक की शुरुआत सामान्य एजेंडे के साथ हुई थी, जिसमें विकास कार्यों की समीक्षा और आगामी योजनाओं पर चर्चा होनी थी। लेकिन जैसे ही खर्च, टेंडर और कार्यों की गुणवत्ता का मुद्दा उठा, पार्षदों ने खुलकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया।
कुछ पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी है और कई परियोजनाओं में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनका कहना था कि बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा और कुछ मामलों में पक्षपात भी किया जा रहा है।
बैठक के दौरान कई बार स्थिति ऐसी बनी कि एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। कुछ पार्षदों ने तो यहां तक कह दिया कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी कार्य नियमों के तहत किए जा रहे हैं और पारदर्शिता बनाए रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। उन्होंने पार्षदों से सहयोग की अपील भी की, ताकि विकास कार्यों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
हालांकि, पार्षदों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार दिखना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी परियोजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बैठकों में अगर संवाद और पारदर्शिता बनी रहे, तो विवादों से बचा जा सकता है। लेकिन जब आरोप गंभीर हों, तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।










