नारनौल के सात सरकारी कॉलेजों में 417 स्नातकोत्तर सीटें खाली हैं। खासकर एमए संस्कृत और एमकॉम में रिक्तता अधिक है। कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों और अभिभावकों की मांग पर पोर्टल पुनः खोलने के लिए डीएचई को अनुरोध भेजा है।
Narnaul Colleges Admission Update: नारनौल जिले के सात सरकारी कॉलेजों में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों की 417 सीटें अभी भी खाली हैं। सबसे ज्यादा खाली सीटें एमए संस्कृत, एमए अंग्रेजी, एमकॉम और पीजीडीसीए जैसे पारंपरिक विषयों में देखी जा रही हैं। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों में पारंपरिक विषयों के प्रति रुचि कम हो रही है। इस वजह से वे उच्चतर शिक्षा निदेशालय (DHE) से पोर्टल फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं, ताकि रिक्त सीटें भरी जा सकें।
कॉलेजों में दाखिले की स्थिति
सात सरकारी कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन फिर भी अधिकांश सीटें खाली रह गई हैं। नारनौल जिले के पीजी कॉलेज में 110 सीटें रिक्त हैं, जबकि राजकीय कॉलेज अटेली में 135 सीटें खाली हैं। इसके अलावा राजकीय महिला कॉलेज अटेली में 16, महेंद्रगढ़ में 7, सतनाली कॉलेज में 6 और महेंद्रगढ़ कॉलेज में 14 सीटें अभी भी भरने के लिए उपलब्ध हैं।
छात्रों की बदलती प्राथमिकताएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के छात्र पारंपरिक विषयों के बजाय कंप्यूटर, प्रबंधन, और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी वाले कोर्सेज को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि योगा, एमकॉम और संस्कृत जैसे विषयों में दाखिले में गिरावट देखी जा रही है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह रुझान स्नातक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है।
पोर्टल फिर से खोलने की मांग
कॉलेज प्रशासन और अभिभावक संगठन उच्चतर शिक्षा निदेशालय से रिक्त सीटों के लिए पोर्टल को फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं। नोडल अधिकारी डॉ. सतीश सैनी का कहना है कि कई छात्र अभी भी दाखिले के लिए कॉलेज आ रहे हैं। इसलिए पोर्टल को री-ओपन करना जरूरी है, ताकि खाली सीटों पर एडमिशन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यूजी द्वितीय और तृतीय वर्ष के लिए भी पोर्टल खोलने का आग्रह किया गया है।
पोर्टल खुला है स्नातक स्तर पर
वहीं, स्नातक प्रथम वर्ष (UG) में दाखिले के लिए पोर्टल अभी 28 अगस्त तक खुला है। छात्र इस दौरान रिक्त सीट वाले कॉलेज में जाकर उसी दिन आवेदन और फीस जमा कर सकते हैं। यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए लागू की गई है।
रिक्त सीटों के कारण और समाधान
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि पारंपरिक विषयों में कम रुचि और छात्रों का अन्य कोर्सेज की ओर झुकाव रिक्त सीटों का प्रमुख कारण है। इसके अलावा दाखिले की प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन पोर्टल पर पूछताछ तो काफी हुई, लेकिन वास्तविक एडमिशन में अपेक्षित संख्या नहीं पहुंच पाई। ऐसे में कॉलेज प्रशासन का मानना है कि पोर्टल को फिर से खोलना छात्रों के लिए अवसर और कॉलेजों के लिए समाधान साबित होगा।
कॉलेजों के द्वारा भेजी गई रिक्वेस्ट
कॉलेजों के नोडल अधिकारियों ने उच्चतर शिक्षा निदेशालय को पत्र भेजकर पोर्टल को पुनः खोलने की औपचारिक मांग की है। पत्र में रिक्त सीटों के विवरण के साथ बताया गया है कि अभी भी छात्र दाखिले के लिए कॉलेज आ रहे हैं और पोर्टल के पुनः खुलने से सभी सीटें भरी जा सकती हैं।
विद्यार्थियों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावक और छात्र दोनों ही रिक्त सीटों को भरने के लिए उत्साहित हैं। उनका कहना है कि पोर्टल खुलने से कई छात्र अपनी पसंद के विषय में दाखिला ले सकेंगे। अभिभावकों का मानना है कि पारंपरिक विषयों की तरफ छात्र की रूचि कम हो रही है, लेकिन अगर अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो छात्र इन विषयों में दाखिला लेने के लिए तैयार हैं।