NavIC Update: सिर्फ 3 एक्टिव सैटेलाइट्स के सहारे भारत का स्वदेशी GPS, ISRO जल्द लॉन्च करेगा NVS-03

NavIC में फिलहाल सिर्फ 3 सक्रिय सैटेलाइट्स ही पोजिशनिंग सेवा दे रहे हैं। ISRO जल्द NVS-03 लॉन्च करेगा, जिससे भारत के स्वदेशी GPS सिस्टम की क्षमता फिर से मजबूत होगी।

भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC में फिलहाल केवल तीन एक्टिव सैटेलाइट्स ही पोजिशनिंग सेवा दे रहे हैं। सरकार ने संसद में बताया कि ISRO जल्द NVS-03 लॉन्च करेगा, जिससे NavIC की पूरी क्षमता बहाल होने की उम्मीद है।

Tech: NavIC Update को लेकर सरकार ने संसद में अहम जानकारी दी है। भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC में फिलहाल केवल तीन सक्रिय सैटेलाइट्स ही कार्यरत हैं। चार सैटेलाइट्स के बिना स्वतंत्र पोजिशनिंग सेवा संभव नहीं है, इसलिए ISRO नए सैटेलाइट लॉन्च कर सिस्टम को फिर से पूरी क्षमता के साथ संचालित करने की तैयारी कर रहा है।

सिर्फ तीन सैटेलाइट्स पर निर्भर हुआ NavIC सिस्टम

भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) इस समय सीमित क्षमता के साथ काम कर रहा है। संसद में सरकार ने जानकारी दी कि वर्तमान में केवल तीन सक्रिय सैटेलाइट्स ही पोजिशनिंग सेवाएं देने की स्थिति में हैं। किसी भी स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम को सटीक लोकेशन उपलब्ध कराने के लिए कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइट्स की आवश्यकता होती है।

इसी वजह से NavIC फिलहाल अपने दम पर पूर्ण नेविगेशन सेवा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। हालांकि इसकी टाइमिंग सर्विस अभी भी सामान्य रूप से काम कर रही है और कई सेवाओं में इसका उपयोग जारी है।

पुराने सैटेलाइट के मिशन पूरा होने से आई चुनौती

सरकार के अनुसार NavIC की मौजूदा स्थिति की प्रमुख वजह पुराने सैटेलाइट IRNSS-1F का मिशन पूरा होना है। यह सैटेलाइट लगभग 10 वर्ष की निर्धारित अवधि पूरी कर चुका है।

फिलहाल IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01 ही सक्रिय हैं। इनकी संख्या चार से कम होने के कारण सिस्टम स्वतंत्र रूप से लोकेशन सेवा देने में सक्षम नहीं है। यही कारण है कि NavIC की पोजिशनिंग क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है।

GPS, Galileo और GLONASS के साथ मिलकर जारी हैं सेवाएं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस स्थिति का आम नागरिकों या भारतीय सशस्त्र बलों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। फिलहाल NavIC को अमेरिका के GPS, यूरोप के Galileo और रूस के GLONASS जैसे ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम के साथ एकीकृत करके उपयोग किया जा रहा है।

मल्टी-जीएनएसएस (Multi-GNSS) सपोर्ट के कारण स्मार्टफोन, वाहन और रक्षा क्षेत्र में नेविगेशन सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं। सेना भी अपनी परिचालन आवश्यकताओं के लिए इसी संयुक्त प्रणाली का उपयोग कर रही है, जिससे संचालन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।

ISRO जल्द लॉन्च करेगा NVS-03

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) NavIC नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है। सरकार ने बताया कि NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा NVS-04 और NVS-05 का निर्माण और परीक्षण भी उन्नत चरण में पहुंच चुका है।

पिछले वर्ष NVS-02 में तकनीकी समस्या आने के बाद ISRO ने अगले मिशनों की तैयारी तेज कर दी है। नए सैटेलाइट्स के लॉन्च के बाद NavIC की स्वतंत्र नेविगेशन क्षमता दोबारा बहाल होने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों अहम है NavIC?

NavIC भारत का स्वदेशी क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर के दायरे में सटीक लोकेशन और समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है।

इसका उपयोग सड़क परिवहन, समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, रेलवे, नागरिक उड्डयन, मछुआरों की सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि NVS-03 और आगामी सैटेलाइट्स के सफल प्रक्षेपण के बाद NavIC पहले की तरह पूरी क्षमता के साथ काम करने लगेगा और भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली और अधिक मजबूत होगी।

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