NEET PG कट-ऑफ विवाद: क्या अब माइनस 40 नंबर वाले भी बनेंगे डॉक्टर?

NEET PG कट-ऑफ विवाद: क्या अब माइनस 40 नंबर वाले भी बनेंगे डॉक्टर?

NEET PG 2026 की कट-ऑफ में केंद्र सरकार के बड़े बदलाव ने मेडिकल शिक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. SC/ST/OBC उम्मीदवारों के लिए परसेंटाइल शून्य करने से माइनस स्कोर वालों को भी पीजी में प्रवेश का रास्ता खुला है, जिस पर डॉक्टर संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है.

NEET PG Cut-Off Controversy: केंद्र सरकार ने NEET PG 2026 में दाखिले के नियमों में बदलाव करते हुए SC/ST/OBC उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल शून्य और जनरल व EWS के लिए 7 तय कर दी है. यह फैसला देशभर में लागू होगा और इसका मकसद खाली पीजी सीटों को भरना बताया गया है. हालांकि FAIMA और FORDA जैसे मेडिकल संगठनों ने इसे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता के लिए खतरा बताते हुए विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इससे भविष्य में डॉक्टरों की विश्वसनीयता और मानकों पर असर पड़ सकता है.

नई कट-ऑफ और इसके असर

NEET PG की नई कट-ऑफ के अनुसार, जनरल और EWS कैटेगरी के लिए परसेंटाइल 7 और SC/ST/OBC के लिए 0 कर दी गई है. इससे 18 हजार खाली सीटें भरने के लिए माइनस स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी प्रवेश मिल सकता है. पहले SC/ST/OBC उम्मीदवारों के लिए 40 पर्सेंटाइल और जनरल के लिए 50 पर्सेंटाइल तय थी.

डॉक्टरी शिक्षा जगत में यह बदलाव चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे योग्य मेधावी छात्रों को नुकसान और निजी मेडिकल कॉलेजों को आर्थिक लाभ हो सकता है. FAIMA और FORDA जैसी संगठन ने इसका विरोध करते हुए इसे प्राइवेट कॉलेजों के लिए "लॉटरी" बताया है, जिससे गलत उम्मीदवारों को सीट मिल सकती है.

मेडिकल संगठनों की प्रतिक्रिया

FAIMA के अध्यक्ष डॉ. रोहन कृष्णण ने कहा कि यह फैसला देश में मेडिकल शिक्षा के स्टैंडर्ड को कमजोर करेगा और प्राइवेट कॉलेजों को करोड़ों रुपए कमाने का मौका देगा. FORDA ने भी इसे मेडिकल छात्रों के हित में नहीं माना और सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की संभावना जताई.

संगठनों का आरोप है कि इस बदलाव से अगले दशक में भारतीय डॉक्टरों की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना प्राथमिकता हो.

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