नीतीश कुमार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा है। प्रभारी मंत्री विकास योजनाओं की निगरानी, समीक्षा और जिला प्रशासन से समन्वय का काम करेंगे।
Patna: बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने विकास योजनाओं और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी के लिए मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंप दिया है। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जिलों में योजनाओं की समीक्षा, प्रशासनिक समन्वय और जनता से जुड़े कार्यों की रफ्तार तेज होगी।
विधानसभा चुनाव के बाद प्रशासनिक ढांचे में बदलाव
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। इसके बाद मंत्रियों को उनके-अपने विभागों की जिम्मेदारी दी गई। अब इसी क्रम में राज्य सरकार ने मंत्रियों को जिलों का प्रभारी मंत्री भी नियुक्त किया है। इस फैसले को प्रशासनिक मजबूती और जमीनी स्तर पर कामकाज की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार का कहना है कि जिले के प्रभारी मंत्री न केवल विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे, बल्कि जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर जनहित से जुड़े मुद्दों का समाधान भी सुनिश्चित करेंगे। इससे योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर दिखाई देंगी।
पुरानी अधिसूचनाएं रद्द, नई व्यवस्था लागू
मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया है कि जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष सह प्रभारी मंत्री के मनोनयन से संबंधित पहले की सभी अधिसूचनाओं को विलोपित कर दिया गया है। अब नई व्यवस्था के तहत अगले आदेश तक मंत्रियों को उनके नाम के सामने अंकित जिलों का प्रभारी मंत्री सह अध्यक्ष नामित किया गया है।
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था जिलों में प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाएगी और योजनाओं की समयबद्ध मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।
क्यों जरूरी है प्रभारी मंत्री की व्यवस्था
राज्य सरकार के अनुसार, कई बार योजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो पातीं या जमीनी स्तर पर उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। प्रभारी मंत्री की नियुक्ति से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं की नियमित समीक्षा हो और किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रभारी मंत्री जिलों का दौरा करेंगे, अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और जनता की शिकायतों को भी सुनेंगे। इससे प्रशासन और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा।
सम्राट चौधरी को पटना की जिम्मेदारी

इस नई व्यवस्था के तहत उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को राजधानी पटना का प्रभार सौंपा गया है। पटना न सिर्फ राज्य की राजधानी है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी सबसे महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां विकास योजनाओं और शहरी सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
विजय कुमार सिन्हा संभालेंगे मुजफ्फरपुर और भोजपुर
विजय कुमार सिन्हा को मुजफ्फरपुर और भोजपुर जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का एक प्रमुख जिला है, जहां विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। वहीं भोजपुर जिला भी ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अन्य मंत्रियों को मिले जिलों के प्रभार
नई सूची के अनुसार, विजय कुमार चौधरी को पूर्वी चंपारण और नालंदा का प्रभार दिया गया है। बिजेंद्र प्रसाद यादव को वैशाली और सारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। श्रवण कुमार को समस्तीपुर और पूर्णिया जिलों का प्रभारी बनाया गया है।
मंगल पांडेय को दरभंगा और पश्चिमी चंपारण की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ दिलीप कुमार जायसवाल को भागलपुर और गया का प्रभार सौंपा गया है। अशोक चौधरी को सीतामढ़ी, शिवहर और जहानाबाद जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।
श्रीमती लेशी सिंह को मधुबनी और मधेपुरा का प्रभार दिया गया है। मदन सहनी को सुपौल और खगड़िया जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राम कृपाल यादव को कैमूर जिला दिया गया है।
एक-एक जिले पर होगी सीधी निगरानी
संतोष कुमार सुमन को औरंगाबाद का प्रभार मिला है। सुनील कुमार को रोहतास और लखीसराय जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। मो जमा खान को किशनगंज और शेखपुरा जिलों का प्रभारी बनाया गया है।
संजय सिंह ‘टाइगर’ को बांका जिला सौंपा गया है। अरुण शंकर प्रसाद को बेगूसराय, सुरेंद्र मेहता को कटिहार और नारायण प्रसाद को गोपालगंज की जिम्मेदारी दी गई है।
श्रीमती रमा निषाद को बक्सर, लखेन्द्र कुमार रौशन को अररिया और श्रेयसी सिंह को नवादा जिला दिया गया है। डॉ प्रमोद कुमार को सहरसा और सिवान जिलों का प्रभार सौंपा गया है। संजय कुमार को मुंगेर, संजय कुमार सिंह को जमुई और दीपक प्रकाश को अरवल जिले की जिम्मेदारी दी गई है।
विकास योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
सरकार का दावा है कि प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति से जिलों में विकास योजनाओं की रफ्तार तेज होगी। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा सीधे मंत्री स्तर पर होगी। इससे अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी बढ़ेगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।












