नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है। 1,344 शव बरामद हुए हैं और करीब 5,000 लोग लापता हैं। 13,101 लोगों को बचाया गया है, जबकि पर्यटन क्षेत्र में बुकिंग रद्द हो रही हैं।
काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का अनुमान है। अब तक 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है।
बाढ़ का असर नेपाल की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। सितंबर से नवंबर के बीच आने वाले पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों को बुकिंग रद्द होने का सामना करना पड़ रहा है। इससे आपदा के आर्थिक प्रभाव के और बढ़ने की आशंका है।
13 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल में बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, शनिवार शाम 6 बजे तक 13,101 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका था।
हालांकि, करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। बचाव दल प्रभावित इलाकों में खोज अभियान चला रहे हैं। नेपाली सेना भी अलग-अलग स्थानों पर राहत और तलाश अभियान में जुटी है।
बाढ़ से कई इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
7,570 घर प्रभावित, 55 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त
NDRRMA के शुरुआती आकलन के अनुसार, बाढ़ से करीब 7,570 घर प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा लगभग 55 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
बाढ़ के कारण 37 सड़क पुल और 68 झूला पुल भी टूटे या क्षतिग्रस्त हुए हैं। नेपाल जैसे पहाड़ी और दुर्गम भूगोल वाले देश में पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने से लोगों की आवाजाही और राहत कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है।
बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं है। सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय परिवहन, आपूर्ति व्यवस्था और पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के कृषि क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। शुरुआती आकलन में करीब 1,806 हेक्टेयर खेती की जमीन के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
कृषि भूमि को नुकसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। बाढ़ के कारण घरों और खेतों के साथ-साथ ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
कुल 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा एक सोलर प्रोजेक्ट और बिजली की दो ट्रांसमिशन लाइनें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन नुकसान के चलते करीब 783 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
अगले छह महीनों में 8 अरब नेपाली रुपये की जरूरत
नेपाल सरकार के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित लोगों के बचाव, राहत और तत्काल प्रबंधन के लिए अगले छह महीनों में करीब 8 अरब नेपाली रुपये की आवश्यकता होगी।
सरकार पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट के आधार पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने की योजना तैयार करेगी।
इससे संकेत मिलता है कि आपदा के बाद नेपाल के सामने केवल तत्काल राहत पहुंचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित बुनियादी ढांचे और लोगों के पुनर्वास के लिए लंबे समय तक संसाधनों की जरूरत होगी।
पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा बाढ़ का असर
बाढ़ से नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। सितंबर से नवंबर के बीच नेपाल में पर्यटन का पीक सीजन रहता है, लेकिन बाढ़ की तस्वीरों और खबरों के बाद विदेशी पर्यटकों के बीच पूरे देश की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, होटल और ट्रैवल कंपनियों को बुकिंग रद्द होने का सामना करना पड़ रहा है। काठमांडू के एक होटल की करीब 20 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो चुकी हैं।
होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक, बाढ़ के बाद एक सप्ताह के दौरान विशेष रूप से ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन हुआ। इससे पर्यटन कारोबार के सामने चुनौती बढ़ गई है।
सरकार ने शुरू किया ‘नेपाल कॉलिंग’ अभियान
पर्यटन क्षेत्र पर बाढ़ के असर को कम करने और विदेशी पर्यटकों के बीच स्थिति को स्पष्ट करने के लिए नेपाल सरकार ने ‘नेपाल कॉलिंग’ अभियान शुरू किया है।
सरकार के मुताबिक, काठमांडू, पोखरा, चितवन, लुंबिनी, जनकपुर, अन्नपूर्णा और एवरेस्ट सहित ज्यादातर प्रमुख पर्यटन स्थल और एयरपोर्ट खुले हैं।
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हालांकि, कुछ पर्यटन मार्ग अभी प्रभावित या प्रतिबंधित हैं। इनमें लांगटांग, गोसाइंकुंडा, हेलंबू सर्किट और तामांग हेरिटेज ट्रेल शामिल हैं।
सरकार का प्रयास है कि आपदा से प्रभावित क्षेत्रों और खुले पर्यटन स्थलों के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए, ताकि बाढ़ की तस्वीरों के कारण पूरे नेपाल को असुरक्षित मानने की धारणा को दूर किया जा सके।
ग्लेशियल झीलों से बाढ़ का खतरा भी चिंता का विषय
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में ग्लेशियल झीलों से अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। नेपाल चार खतरनाक ग्लेशियल झीलों का जलस्तर कम करने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर की परियोजना पर काम कर रहा है।
इस परियोजना में कोशी और गंडकी बेसिन की चार झीलें शामिल हैं। इनमें लुमडिंग त्शो और होंगु-2 सोलुखुम्बु में, लोअर बरुण संखुवासभा में और थुलागी (डोना) मनांग में स्थित है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल झीलों का जलस्तर कम करना पर्याप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक, हर झील का अलग अध्ययन, प्रभावी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, पानी के बहाव को नियंत्रित करने के उपाय और बाढ़ के संभावित रास्तों में निर्माण पर नियंत्रण भी जरूरी है।
47 ग्लेशियल झीलों को बताया गया था बेहद खतरनाक
ICIMOD और UNDP की 2020 की रिपोर्ट में नेपाल, तिब्बत और भारत की 47 ग्लेशियल झीलों को ग्लेशियल झील फटने से आने वाली बाढ़ के लिहाज से बेहद खतरनाक बताया गया था। इनमें 21 झीलें नेपाल में थीं।
ग्लेशियल झीलों में जमा पानी अचानक बाहर निकलने पर नीचे के इलाकों में तेज बाढ़ आ सकती है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा विशेष चिंता का विषय है।
राहत के साथ पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती
नेपाल के सामने अब तत्काल राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती भी है। हजारों घरों, सड़कों, पुलों, कृषि भूमि और ऊर्जा परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने के कारण प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।
करीब 400 अरब नेपाली रुपये के शुरुआती नुकसान का अनुमान आपदा के आर्थिक पैमाने को दर्शाता है। वहीं, पर्यटन बुकिंग में गिरावट से संकेत मिलता है कि बाढ़ का असर प्रत्यक्ष नुकसान से आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
सरकार अब राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की तैयारी कर रही है। आने वाले समय में PDNA रिपोर्ट से नुकसान और जरूरतों का अधिक विस्तृत आकलन सामने आने की उम्मीद है।








