नेपाल में बालेन शाह की सरकार को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाला Gen-Z वर्ग अब उसी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरता नजर आ रहा है।
Balen Shah Government Crisis: नेपाल की राजनीति में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार को लेकर विरोध के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। जिस युवा और Gen-Z समर्थन के दम पर बालेन शाह सत्ता तक पहुंचे थे, अब उसी वर्ग के एक हिस्से ने उनके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। राजधानी काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की है।
सरकार के गठन के करीब 150 दिन के भीतर ही बालेन शाह को सड़क पर विरोध, संसद में विपक्ष के सवालों और अपनी ही पार्टी के नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इससे नेपाल की नई सरकार के सामने राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
Gen-Z ने काठमांडू में किया प्रदर्शन
बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही समय बाद युवा प्रदर्शनकारी काठमांडू के माइतीघर मंडला में एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के कामकाज और नीतियों पर सवाल उठाए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बालेन शाह को सत्ता तक पहुंचाने में युवा मतदाताओं और Gen-Z समूह की भूमिका को काफी अहम माना गया था। ऐसे में समर्थक वर्ग के एक हिस्से का विरोध सरकार के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सड़क पर विरोध के साथ-साथ नेपाल की संसद में भी प्रधानमंत्री की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी सांसदों ने संसद की बैठकों में बालेन शाह की कम मौजूदगी को मुद्दा बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शाह को 26 अगस्त को संसद में उपस्थित होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि अब तक आयोजित 39 बैठकों में प्रधानमंत्री केवल पांच में शामिल हुए हैं। उनकी अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज है।
बालेन शाह ने 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों बाद उनकी सरकार के सामने पैदा हुआ यह राजनीतिक दबाव उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
सीमा शुल्क के फैसले पर भी हुआ विरोध

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े व्यापारिक क्षेत्रों में भी सरकार के कुछ फैसलों को लेकर असंतोष देखने को मिला। भारत से लगते सीमावर्ती इलाकों में सीमा शुल्क से संबंधित निर्णय के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हुआ। दबाव बढ़ने पर अधिकारियों को इस नीति में कुछ राहत देने की जरूरत पड़ी। नेपाल और भारत के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर बालेन शाह के बयानों को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है। भारत के क्षेत्र से संबंधित उनके एक बयान पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए।
दक्षिणी नेपाल में हिंसा ने बढ़ाई मुश्किल
भारत से लगते दक्षिणी नेपाल के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव और हिंसक झड़पों की घटनाओं ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाया। सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर आलोचना के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह को देश को संबोधित करना पड़ा। आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सरकार की भूमिका पर सवाल उठना किसी भी नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाएं बालेन शाह सरकार की राजनीतिक परीक्षा ले रही हैं।
नेपाल में भारतीय सेना की अग्निपथ योजना के तहत नेपाली नागरिकों की भर्ती का मुद्दा भी अब तक पूरी तरह हल नहीं हुआ है। पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों ने भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने और इससे जुड़े गतिरोध का समाधान करने की मांग उठाई है। यह मुद्दा नेपाल और भारत के पुराने सैन्य संबंधों से जुड़ा है। ऐसे में सरकार पर इसके समाधान को लेकर भी दबाव बना हुआ है।












