इजरायल और भारत समेत छह देशों ने 'Hexagon of Alliances' बनाया। इसका उद्देश्य शिया और सुन्नी धुरियों के बीच संतुलन बनाना है। पाकिस्तान ने इसे मुस्लिम उम्मा के खिलाफ करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
Pakistan: इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मिडिल ईस्ट में छह देशों के गठबंधन यानी 'Hexagon of Alliances' बनाने का प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें भारत भी शामिल है। इस योजना का उद्देश्य उन देशों को एक मंच पर लाना है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों को समान नजर से देखते हैं।
नेतन्याहू के अनुसार, यह गठबंधन शिया और सुन्नी धुरियों के उभरते खतरे के खिलाफ संतुलन बनाएगा। शिया धुरी का नेतृत्व ईरान करता है, जिसमें हमास, हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठन शामिल हैं। वहीं उभरती कट्टर सुन्नी धुरी को आईएसआईएस के बचे हुए तत्वों से जोड़ा गया है।
पाकिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति
पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और इसे 'मुस्लिम उम्मा के खिलाफ ब्लॉक' करार दिया। पाकिस्तान की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर नेतन्याहू की इस योजना की निंदा की। सीनेट ने कहा कि यह प्रस्ताव मुस्लिम समुदाय की एकता और अखंडता को कमजोर करने का प्रयास है।
पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी (PPP) की सांसद पलवाशा मोहम्मद जई खान ने यह प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों की ओर से पेश किया। PPP शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा है।
फलस्तीन और पवित्र स्थलों पर आपत्ति
पाकिस्तानी सीनेट ने कहा कि कब्जे वाले फलस्तीन क्षेत्रों और पवित्र स्थलों की कानूनी या ऐतिहासिक स्थिति को बदलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नेतन्याहू के बयान क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं।

सीनेट ने यह भी कहा कि इजरायल द्वारा सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के फैसले को खारिज किया जाएगा। दिसंबर में इजरायल ने सोमालीलैंड को औपचारिक रूप से स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में मान्यता दी थी, जिस पर कई मुस्लिम देशों और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोपरेशन (OIC) ने आपत्ति जताई थी।
भारत का गठबंधन में शामिल होना
नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया कि भारत इस गठबंधन का हिस्सा है। उनका कहना है कि भारत, ग्रीस, ग्रीक साइप्रस प्रशासन और कुछ अन्य अरब, अफ्रीकी व एशियाई देश इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन का मकसद कट्टरता और उभरती हिंसा की धुरियों के बीच संतुलन बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा से पहले नेतन्याहू ने इस योजना का जिक्र किया था। इस दौरान उन्होंने बताया कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा।
शिया और सुन्नी धुरियों के बीच संतुलन
नेतन्याहू के मुताबिक शिया धुरी का नेतृत्व ईरान करता है। इसमें हमास, हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठन शामिल हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा माने जाते हैं। दूसरी ओर, उभरती कट्टर सुन्नी धुरी को आईएसआईएस के बचे हुए तत्वों से जोड़ा गया है।
नेतन्याहू का कहना है कि इस गठबंधन के माध्यम से उन देशों को साथ लाया जाएगा, जो इन धुरियों के खतरे को समझते हैं और शांतिपूर्ण समाधान में योगदान कर सकते हैं।












