पीएम मोदी का इजरायल दौरा! क्या बनेगा भारत का दूसरा भरोसेमंद साथी? आइए जानें

प्रधानमंत्री मोदी का दो दिवसीय इजरायल दौरा, रक्षा, AI, ड्रोन्स और टेक्नोलॉजी में भारत-इजरायल साझेदारी मजबूत होगी, फ्री ट्रेड और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल दौरे पर हैं। दौरे में रक्षा, AI, ड्रोन और टेक्नोलॉजी साझेदारी के समझौते होंगे। भारत-इजरायल रणनीतिक सहयोग और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी चर्चा होगी।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिवसीय विदेश दौरे पर इजरायल जा रहे हैं। इस दौरान भारत और इजरायल के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी को लेकर कई बड़े समझौते होने की उम्मीद है। इस दौरे से पहले चर्चा है कि क्या इजरायल भारत का रूस जैसा दूसरा भरोसेमंद साथी बन सकता है।

मोदी-नेतन्याहू की गहरी दोस्ती

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ही कट्टर राष्ट्रवादी नेता हैं। दोनों आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया रखते हैं और अपने देशों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं। पीएम मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती कई सालों की साझेदारी और विश्वास पर आधारित है।

दोनों नेता नियमित रूप से फोन पर बातचीत करते हैं और अपने-अपने देशों का दौरा करते रहते हैं। नेतन्याहू ने कहा है कि पीएम मोदी उनके व्यक्तिगत दोस्त हैं और उनके दौरे को “ऐतिहासिक” बताया है। यही दोस्ती भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।

रक्षा और टेक्नोलॉजी में रणनीतिक साझेदारी

भारत और इजरायल के बीच रक्षा साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है। रूस पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है, लेकिन अब इजरायल भी आधुनिक टेक्नोलॉजी और हथियारों में भारत का भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार 2020-24 के बीच रूस के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया। भारत इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। इजरायली हथियारों में स्पाइक मिसाइल, हेरॉन ड्रोन, बाराक-8, राम्पेज और आइरन डोम जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी शामिल है, जो रूस के पास भी उपलब्ध नहीं हैं।

2026 में 8.6 अरब डॉलर की नई डील

2026 में भारत और इजरायल ने 8.6 बिलियन डॉलर से अधिक के हथियारों और सुरक्षा टेक्नोलॉजी समझौते पर सहमति जताई है। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, लेजर आधारित आयरन बीम और एडवांस्ड मिसाइलें शामिल हैं। पीएम मोदी के दौरे में इस समझौते पर नई MoU पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। समझौते में संवेदनशील टेक्नोलॉजी शेयरिंग और संयुक्त उत्पादन पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत की सैन्य क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

इजरायल का हेक्सागन एलायंस

इजरायल ने भारत को “हेक्सागन एलायंस” में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें भारत, इजरायल, अरब देश, अफ्रीका, ग्रीस और साइप्रस शामिल होंगे। इस गठबंधन का उद्देश्य रेडिकल शिया और सुन्नी एक्सिस का मुकाबला करना है। पीएम मोदी इस रणनीतिक विजन का समर्थन करते हैं।

इजरायल चीन-पाकिस्तान अक्ष के खिलाफ भारत को खुफिया और तकनीकी मदद प्रदान कर सकता है। साइबर सुरक्षा, क्वांटम टेक्नोलॉजी, AI और ड्रोन स्वार्म के क्षेत्र में इजरायल विश्व में अग्रणी है। इसके अलावा भारत के सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस सिस्टम में भी इजरायल की तकनीकी मदद अहम होगी।

इजरायल हथियारों का ऑपरेशन सिंदूर में योगदान

2025 में पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली हथियारों ने सटीक हमले किए। इजरायल की टेक्नोलॉजी की मदद से भारत ने ऑपरेशन में सफलता हासिल की। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत और इजरायल की रक्षा साझेदारी न केवल हथियारों की आपूर्ति तक सीमित है, बल्कि टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस शेयरिंग में भी महत्वपूर्ण है।

पीएम मोदी का दौरे का कार्यक्रम

पीएम मोदी इस दौरे के दौरान इजरायली संसद (नैसेट) को संबोधित करेंगे। यह भारतीय प्रधानमंत्री का पहली बार इजरायली संसद में संबोधन होगा। इसके बाद वे यद वासेम होलोकॉस्ट स्मारक जाएंगे और इनोवेशन इवेंट में भाग लेंगे।

दौरे के दौरान कृषि, जल प्रबंधन, AI, स्वच्छ ऊर्जा और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा होगी। भारत और इजरायल के राजनयिक संबंध औपचारिक रूप से 1992 में शुरू हुए थे, लेकिन 2014 से मोदी युग में यह संबंध काफी मजबूत हो चुके हैं।

भारत-इजरायल “स्ट्रैटेजिक इंटीमेसी” का नया अध्याय

पीएम मोदी का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भारत-इजरायल के बीच “स्ट्रैटेजिक इंटीमेसी” का नया अध्याय कहा जा रहा है। इजरायल पहले से ही भारत का रणनीतिक साझेदार बन चुका है, और इस दौरे के बाद रक्षा, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा।

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