भारतीय मूल की नवनीतम नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के कुछ ही देर बाद शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी।
US Sanctions ICC: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने न्यायालय के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदमों की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आरोप लगाया कि ICC अमेरिका और इजरायल के नागरिकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहा है।
वहीं, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वह दबाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपना काम जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था, युद्ध अपराधों की जांच और वैश्विक कूटनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ICC पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिकी और इजरायली नागरिकों के खिलाफ अनुचित तरीके से कर रहा है। इसी आधार पर ट्रंप प्रशासन ने न्यायालय के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने संदेश में कहा कि वाशिंगटन ICC की गतिविधियों को रोकने और उसके संसाधनों तक पहुंच सीमित करने के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका उसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता।
अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रतिबंधों का वास्तविक दायरा और उनके कानूनी प्रभाव संबंधित आधिकारिक आदेशों पर निर्भर करेंगे। रुबियो ने यह भी दावा किया कि ICC को लेकर अमेरिकी राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच व्यापक सहमति है। उनके मुताबिक, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं ने न्यायालय की कुछ कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई है।
ICC ने कहा- अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए काम जारी रहेगा
अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने अपने कामकाज को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। न्यायालय का रुख है कि बाहरी दबाव के बावजूद युद्ध अपराधों और अन्य गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों से जुड़े मामलों की जांच तथा अभियोजन का काम जारी रहना चाहिए। ICC अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्थापित एक स्थायी न्यायिक संस्था है। इसका उद्देश्य नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध जैसे गंभीर मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराना है।
हालांकि, ICC के पास अपनी स्वतंत्र पुलिस व्यवस्था नहीं है। गिरफ्तारी वारंट लागू करने और आरोपियों को न्यायालय के सामने पेश करने के लिए उसे सदस्य देशों के सहयोग पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में किसी बड़े देश के प्रतिबंध न्यायालय के वित्तीय लेन-देन, सहयोग और कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।

नेतन्याहू और पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का मामला
ICC की गतिविधियों को लेकर अमेरिका और न्यायालय के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण इजरायल और रूस से जुड़े मामले हैं। न्यायालय ने नवंबर 2024 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों के संबंध में गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
इसी तरह, मार्च 2023 में ICC ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ यूक्रेन से बच्चों के कथित गैरकानूनी निर्वासन और स्थानांतरण से जुड़े युद्ध अपराधों के आरोपों पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इन वारंटों को लेकर संबंधित देशों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं, ICC का कहना है कि उसके न्यायिक फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी वारंट अपने आप में दोषसिद्धि नहीं होता।
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से जुड़ा विवाद
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तब और तेज हुई, जब अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा को नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़ी खबरों के साथ जोड़ा गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है और उन्हें शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
हालांकि, किसी पुरस्कार की घोषणा और अमेरिकी प्रशासन के प्रतिबंधों के बीच सीधा संबंध साबित करने के लिए विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। इसलिए दोनों घटनाओं के समय को आधार बनाकर किसी एक को दूसरी कार्रवाई का निश्चित कारण बताना उचित नहीं होगा। भारतीय मूल की नवनीतम नवी पिल्लै अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं। वह ICC की पूर्व न्यायाधीश रही हैं। हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़े किसी भी दावे की पुष्टि नोबेल समिति की आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।










