पैरों में सूजन क्यों होती है? जानें पेरिफरल आर्टरी डिजीज से इसका कनेक्शन

पैरों में सूजन क्यों होती है? जानें पेरिफरल आर्टरी डिजीज से इसका कनेक्शन

पेरिफरल आर्टरी डिजीज पैरों की नसों से जुड़ी गंभीर समस्या है, जिसमें धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से खून का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके लक्षण पैरों में दर्द और सूजन से शुरू होकर हार्ट अटैक के खतरे तक पहुंच सकते हैं, इसलिए समय पर पहचान और सावधानी जरूरी है।

Peripheral Artery Disease: पैरों की नसों में होने वाली यह बीमारी तब सामने आती है, जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होकर ब्लॉकेज बना देता है। यह समस्या पैरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दिल और दिमाग की नसों को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके शुरुआती लक्षण सीढ़ी चढ़ते समय दर्द, सूजन और सुन्नपन के रूप में दिखते हैं। समय रहते इलाज न होने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए जागरूकता और सही जीवनशैली बेहद जरूरी मानी जाती है।

पैरों की नसों की बीमारी क्या है

पेरिफरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमने लगता है। इससे नसों में सूजन और ब्लॉकेज हो जाता है और पैरों तक खून का प्रवाह ठीक से नहीं पहुंच पाता।

यह समस्या सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहती। विशेषज्ञों के अनुसार, जब पैरों की धमनियों में ब्लॉकेज होता है, तो शरीर की दूसरी आर्टरी में भी इसी तरह की रुकावट बनने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे दिल और दिमाग पर असर पड़ सकता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

पेरिफरल आर्टरी डिजीज के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। सीढ़ी चढ़ते समय पैरों में दर्द या ऐंठन, टखनों और पंजों में सूजन, पैरों का ठंडा महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

इसके अलावा पैरों का रंग नीला या हल्का बैंगनी पड़ना, सुन्नपन, त्वचा का रूखा होना या नाखूनों का मोटा और पीला हो जाना भी चेतावनी के संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

हार्ट अटैक से क्या है संबंध

दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, पेरिफरल आर्टरी डिजीज वाले मरीजों में हार्ट अटैक के मामले देखे जाते हैं। पैरों में बना ब्लॉकेज या क्लॉट हार्ट तक भी नुकसान पहुंचा सकता है।

मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, शारीरिक गतिविधि की कमी और पहले से मौजूद हृदय रोग वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। हर मरीज में हार्ट अटैक हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन इसे एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है।

बचाव के आसान उपाय

इस बीमारी से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार सबसे अहम है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित रखना मददगार हो सकता है।

डॉक्टर अधिक फैट, मैदा और रेड मीट से बचने, धूम्रपान छोड़ने और मानसिक तनाव कम रखने की सलाह देते हैं। समय-समय पर हेल्थ चेकअप भी जरूरी है, खासकर अगर पहले से दिल से जुड़ी समस्या रही हो।

Leave a comment