बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद बनने के लिए तैयार हैं। उनके राज्यसभा में पहुंचने के साथ ही दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सहयोगी दलों के पूर्व मुख्यमंत्रियों का एक नया क्लब बन जाएगा।
नई दिल्लीः Nitish Kumar राज्यसभा जाने के लिए तैयार हैं। उनके राज्यसभा सांसद बनने के साथ ही दिल्ली में Bharatiya Janata Party और NDA के सहयोगी दलों के मुख्यमंत्रियों का क्लब बन जाएगा। राजनीति का यह नया ट्रेंड प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृहमंत्री Amit Shah की सियासी चाल का नतीजा है।
अटल बिहारी वाजपेयी-लाल कृष्ण आडवाणी के जमाने में एनडीए के सहयोगी दलों के मुख्यमंत्री क्षेत्रीय कमान संभालते थे। लेकिन नीतीश कुमार के संसद पहुंचते ही क्षेत्रीय शक्ति केंद्र की पुरानी पीढ़ी खत्म हो जाएगी और नई सियासी संरचना आकार लेगी।
मोदी-शाह युग का नया राजनीतिक ट्रेंड
एनडीए के सहयोगी दलों में पहले से ही करीब 15 पूर्व मुख्यमंत्री सांसद हैं। इनमें से छह वर्तमान में मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। मोदी खुद भी पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और उन्होंने राज्य स्तर से राष्ट्रीय नेतृत्व तक की यात्रा तय की। नीतीश कुमार के राज्यसभा पहुंचने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्रियों की संख्या संसद में बढ़कर लगभग 16 हो जाएगी। यह बदलाव मोदी-शाह युग के एक खास राजनीतिक ट्रेंड को दर्शाता है, जिसमें क्षेत्रीय नेतृत्व को दिल्ली की संसदीय राजनीति में लाकर राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त किया जा रहा है।
विशेष रणनीति के तहत, पुराने और अनुभवी नेता संसदीय भूमिकाओं के लिए दिल्ली भेजे जा रहे हैं, जबकि राज्यों में नई लीडरशिप को संगठन और प्रशासन की कमान सौंपी जा रही है। इस पैटर्न से स्पष्ट होता है कि बीजेपी और NDA गठबंधन अनुभवी नेताओं का अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर प्रयोग करना चाहते हैं।

कौन-कौन से पूर्व मुख्यमंत्री हैं दिल्ली में?
मोदी कैबिनेट और संसदीय राजनीति में शामिल पूर्व मुख्यमंत्रियों में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- राजनाथ सिंह – उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
- शिवराज सिंह चौहान – मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
- मनोहर लाल खट्टर – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री
- एचडी कुमारस्वामी – कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री
- जीतन राम मांझी – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
- सर्बानंद सोनोवाल – असम के पूर्व मुख्यमंत्री
इसके अलावा, बिप्लब कुमार देब, त्रिवेंद्र सिंह रावत और बसवराज बोम्मई जैसे नेता भी संसदीय राजनीति में सक्रिय हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार, नारायण राणे, जगदंबिका पाल और एचडी देवेगौड़ा भी संसद में भूमिका निभा चुके हैं। हालांकि, कुछ पूर्व मुख्यमंत्री जैसे वसुंधरा राजे और रमन सिंह अब भी राज्यों की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उनकी केंद्रीय भूमिका सीमित है।










