Shiv Sena (UBT) ने एक बार फिर Iran और Israel के बीच युद्ध पर टिप्पणी करते हुए United States की भूमिका और India के नेतृत्व पर तंज कसा है। पार्टी के मुखपत्र Saamana में प्रकाशित लेख “कॉकरोच मरते नहीं” में Sanjay Raut ने इस संघर्ष, अमेरिका की रणनीति और भारत के कूटनीतिक रुख पर तीखी टिप्पणियां की हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray faction) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने पार्टी के मुखपत्र Saamana में प्रकाशित अपने लेख “कॉकरोच मरते नहीं” के माध्यम से मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष पर तीखी टिप्पणी की है।
लेख में उन्होंने Iran और Israel के बीच जारी युद्ध, वैश्विक शक्तियों की भूमिका और भारत की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। इस लेख के प्रकाशित होने के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
युद्ध और वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी
अपने लेख में संजय राउत ने कहा कि इतिहास में कई बार युद्ध को राजनीतिक रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उनके अनुसार मौजूदा समय में ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष भी वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन का उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संघर्ष में United States की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। लेख में दावा किया गया है कि अमेरिकी नीतियों और रणनीतियों ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
राउत ने यह भी लिखा कि विश्व राजनीति में अक्सर लोकतंत्र या स्वतंत्रता के नाम पर सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की जाती है, जबकि इसके पीछे कई बार रणनीतिक और आर्थिक हित छिपे होते हैं।

ट्रंप और नेतन्याहू की नीतियों पर निशाना
लेख में संजय राउत ने अमेरिकी नेतृत्व और इजरायल की सरकार की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की नीतियों ने क्षेत्र में तनाव को बढ़ाया। उनके अनुसार ईरान पर कार्रवाई को लोकतंत्र या जनता की स्वतंत्रता के नाम पर उचित ठहराने की कोशिश की गई, लेकिन इसके पीछे भू-राजनीतिक हितों की भूमिका भी रही है।
लेख में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए Mao Zedong और तिब्बत का उदाहरण भी दिया गया है। इसमें कहा गया कि 1950 के दशक में चीन ने तिब्बत को साम्राज्यवाद से मुक्त कराने का दावा किया था, लेकिन बाद में उसने उस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। लेख के अनुसार ईरान पर कई सैन्य हमलों और नेतृत्व को निशाना बनाए जाने के बावजूद देश ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी। इसमें इजरायल के शहर Tel Aviv पर मिसाइल हमलों और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का भी उल्लेख किया गया है।
राउत ने दावा किया कि कई लोगों को उम्मीद थी कि सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन इसके विपरीत उसने कड़ा प्रतिरोध दिखाया। लेख में यह भी कहा गया कि युद्ध के दौरान शामिल देश अक्सर अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ता है।
वैश्विक शांति और मानवीय संकट पर चिंता
लेख में मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न मानवीय संकट पर भी चिंता जताई गई है। विशेष रूप से Gaza Strip में हुई हिंसा और नागरिकों की मौतों का जिक्र करते हुए इसे वैश्विक मानवता के लिए गंभीर चुनौती बताया गया। राउत ने लिखा कि युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिकों और बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के कई शक्तिशाली देश इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आते हैं। लेख के अंतिम हिस्से में संजय राउत ने भारत की कूटनीतिक भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व के इस बड़े संकट के दौरान भारत की भूमिका अपेक्षाकृत शांत और सीमित दिखाई दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को मजबूत नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इस संघर्ष में भारत की सक्रिय कूटनीतिक पहल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी। राउत ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2026 की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा हुआ था, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की चर्चा हुई।












