पाकिस्तान की गीदड़भभकी! क्या वाकई ढाई मोर्चों पर युद्ध लड़ने की ताकत रखता है इस्लामाबाद?

पाकिस्तान की गीदड़भभकी! क्या वाकई ढाई मोर्चों पर युद्ध लड़ने की ताकत रखता है इस्लामाबाद?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ‘ढाई फ्रंट वॉर’ बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद एक साथ भारत, अफगानिस्तान और बलूचिस्तान जैसे तीन मोर्चों पर युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों ने स्थिति पर शंका जताई है।

World News: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में भारत और अफगानिस्तान दोनों को चेतावनी देते हुए ‘ढाई फ्रंट वॉर’ (Two-and-a-Half Front War) की बात कही है। आसिफ का दावा है कि अगर शांति वार्ता नाकाम हुई, तो पाकिस्तान खुला युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान के पास इतनी सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक क्षमता है कि वह एक साथ तीन दिशाओं से आने वाले संकटों का सामना कर सके? आइए विस्तार से समझते हैं कि पाकिस्तान किन परिस्थितियों में यह बयान दे रहा है और उसकी स्थिति वास्तव में कितनी मजबूत है।

अफगानिस्तान से तनाव: कैसे भड़की जंग की चिंगारी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन अक्टूबर 2025 ने दोनों देशों के बीच हालात को और बिगाड़ दिया। 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका इलाकों में हवाई हमले किए। उसका दावा था कि इन इलाकों में पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के ठिकाने हैं, जो पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

इन हमलों के बाद तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर सीमा उल्लंघन और आक्रमण का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमाओं पर एक सप्ताह तक गोलीबारी चली। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सीमाओं पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही।

बाद में कतर और तुर्किये की मध्यस्थता से दोहा और इस्तांबुल में वार्ता शुरू हुई। 18-19 अक्टूबर को ceasefire (युद्धविराम) पर सहमति बनी। 28 अक्टूबर को हुई दूसरी बैठक में तीन समझौते हुए – युद्धविराम जारी रखना, सीमा निगरानी तंत्र बनाना और उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान। हालांकि इसके बाद बातचीत ठप पड़ी है।

पाकिस्तान अब भी कह रहा है कि अफगानिस्तान में उसके दुश्मन छिपे हैं और तालिबान उन्हें सौंपने से इनकार कर रहा है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 25 अक्टूबर को चेतावनी दी कि अगर वार्ता असफल हुई तो “खुला युद्ध” तय है।

भारत पर आरोप: तालिबान को बताया ‘भारत का एजेंट’

पाकिस्तान ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक इस बार भी भारत को बीच में घसीट लिया। 28 अक्टूबर को एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने दावा किया कि भारत ने अफगान तालिबान के भीतर घुसपैठ कर ली है। उन्होंने कहा कि काबुल में बैठे लोग दिल्ली के इशारों पर काम कर रहे हैं। यहां तक कि आसिफ ने तालिबान को “भारत की गोद में बैठा” बताया।

उनका आरोप है कि भारत अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के खिलाफ proxy war लड़ना चाहता है। आसिफ ने कहा कि भारत पाकिस्तान को पूर्वी मोर्चे (India border) और पश्चिमी मोर्चे (Afghanistan border) दोनों पर व्यस्त रखना चाहता है ताकि उसे कमजोर किया जा सके।

1 नवंबर को Geo News को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने दोहराया कि भारत पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उनका कहना था कि “हमारे पास सबूत हैं कि भारत पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।”

भारत का जवाब: पाकिस्तान अपनी असफलताओं से भाग नहीं सकता

भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने 16 अक्टूबर को कहा कि पाकिस्तान अपनी असफलताओं का ठीकरा हमेशा दूसरों के सिर पर फोड़ता है। भारत ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता (sovereignty) का सम्मान करता है और वहां केवल मानवीय सहायता के लिए मौजूद है।

भारत ने हाल ही में तालिबान सरकार को भूकंप राहत सामग्री के रूप में 15 टन भोजन भेजा था और काबुल में अपना दूतावास फिर से खोला। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान को डर है कि भारत और तालिबान के बीच ‘व्यावहारिक संबंध’ विकसित हो रहे हैं, जिससे इस्लामाबाद की रणनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

बलूचिस्तान: पाकिस्तान का ‘आधा मोर्चा’ जो अंदर से कमजोर 

अब बात करते हैं ‘ढाई मोर्चों’ की अवधारणा में ‘आधे’ मोर्चे की — यानी बलूचिस्तान की। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां दशकों से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। Baloch Liberation Army (BLA) जैसे संगठन पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं।

बलूचों का आरोप है कि उनके प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों (गैस, तेल, खनिज) का फायदा पंजाब प्रांत को मिलता है, जबकि उन्हें हाशिए पर रखा जाता है। 2025 में बलूच विद्रोह और अधिक हिंसक हुआ। मार्च में बीएलए ने सैन्य ठिकानों पर हमला कर दर्जनों सैनिकों को मार दिया। अगस्त में क्वेटा में हुए धमाके में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई।

पाकिस्तान की सेना ने वहां भारी तैनाती कर रखी है, लेकिन विद्रोही guerrilla tactics से हमला करते हैं, जिससे सेना के लिए हालात संभालना मुश्किल हो जाता है। रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बलूचिस्तान का विद्रोह पाकिस्तान के लिए “तीसरा और सबसे खतरनाक मोर्चा” बन चुका है।

ढाई मोर्चों का अर्थ: तीन दिशाओं से बढ़ता दबाव

‘ढाई मोर्चों’ का मतलब है – भारत और अफगानिस्तान से बाहरी खतरे और बलूचिस्तान से आंतरिक विद्रोह। पाकिस्तान की सीमाएं भारत से 3300 किलोमीटर और अफगानिस्तान से 2600 किलोमीटर लंबी हैं। साथ ही, बलूचिस्तान का पहाड़ी इलाका 1000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है, जहां नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं है।

पूर्वी मोर्चे पर कश्मीर विवाद लगातार बना हुआ है। मई 2025 में पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया। पश्चिमी मोर्चे पर अफगानिस्तान की सीमा से TTP और अन्य आतंकवादी संगठन पाकिस्तान में घुसपैठ करते हैं।

पाकिस्तानी सेना की स्थिति: हथियार हैं, लेकिन ताकत नहीं

पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार जरूर हैं, जो उसे deterrence (निरोधक शक्ति) देते हैं। लेकिन पारंपरिक युद्ध क्षमता में वह भारत से काफी पीछे है।

भारत के पास आधुनिक टैंक, मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट्स और उन्नत रक्षा तकनीक है, जबकि पाकिस्तान का रक्षा बजट आर्थिक संकट के कारण सीमित है। 2025 में पाकिस्तान की मुद्रास्फीति 25% से अधिक रही और विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटा।

हालांकि, पाकिस्तान ने हाल ही में मिसाइल निगरानी के लिए नई यूनिट बनाई है और दावा किया है कि वह दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार है। मगर विशेषज्ञों का कहना है कि सेना पहले से ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में फंसी हुई है।

आर्थिक संकट: सबसे बड़ा कमजोर बिंदु

किसी भी देश की सैन्य शक्ति उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट में है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, विदेशी कर्ज बढ़ रहा है और IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के सामने सरकार झुकी हुई है।

ऐसे में युद्ध जैसी स्थिति उसकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है। सेना को दो या तीन मोर्चों पर टिकाए रखना बेहद कठिन होगा। Half-front यानी बलूचिस्तान पहले ही संसाधनों को खा रहा है।

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