संसद का मॉनसून सत्र 2026: कांग्रेस 16 जुलाई को बनाएगी रणनीति, 19 जुलाई को होगी सर्वदलीय बैठक

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र से पहले कांग्रेस 16 जुलाई को अपनी रणनीति तय करेगी, जबकि 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक आयोजित होगी। जानिए सत्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद संसद के मॉनसून सत्र की घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्षी दल आगामी सत्र को लेकर अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

नई दिल्ली: भारत की संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने सत्र की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह सत्र 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। आगामी सत्र को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दल भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

संसद के इस महत्वपूर्ण सत्र से पहले कांग्रेस ने 16 जुलाई को अपनी संसदीय रणनीति तय करने के लिए बैठक बुलाई है, जबकि केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का फैसला किया है।

कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक 16 जुलाई को

कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर 16 जुलाई की सुबह 11 बजे कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता आगामी मॉनसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में विपक्ष की रणनीति को अंतिम रूप देना, सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी करना और संसद के भीतर पार्टी की भूमिका को प्रभावी बनाना है। कांग्रेस नेतृत्व आर्थिक स्थिति, महंगाई, रोजगार, किसानों से जुड़े मुद्दों और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति पर विचार कर सकता है।

19 जुलाई को होगी सर्वदलीय बैठक

मॉनसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 19 जुलाई को सुबह 11 बजे केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक प्रत्येक संसदीय सत्र से पहले आयोजित की जाने वाली परंपरागत प्रक्रिया का हिस्सा होती है, जिसका उद्देश्य सरकार और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करना तथा संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सहयोग प्राप्त करना है।

बैठक के दौरान सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी विभिन्न राजनीतिक दलों को देगी और प्रमुख विधेयकों पर चर्चा के लिए सहयोग की अपील करेगी। साथ ही विपक्षी दल भी अपनी प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं को सरकार के सामने रख सकते हैं।

संसद के मॉनसून सत्र की आधिकारिक घोषणा

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों का मॉनसून सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह सत्र 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है और राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

इस बार संसद के मॉनसून सत्र में प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत कर सकती है। विधेयक से जुड़ा एक प्रस्ताव विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। 

प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार यदि प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटाने का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ सकते हैं और संसद में इस पर विस्तृत बहस होने की संभावना जताई जा रही है। अंतिम निर्णय संसद में चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

हंगामेदार रहने की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मॉनसून सत्र कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और विधायी मुद्दों के कारण काफी अहम रहने वाला है। विपक्ष सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय विषयों पर जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। 130वें संविधान संशोधन विधेयक सहित अन्य संभावित विधेयकों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। इसके अलावा आर्थिक नीतियां, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाएं और अन्य समसामयिक विषय भी संसद की चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

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